
Ram Mandir CEO Selection: अयोध्या के भव्य राम मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन को और व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में 18 उम्मीदवारों का अंतिम इंटरव्यू होगा। इन उम्मीदवारों को देशभर से आए करीब 5,200 आवेदनों की लंबी स्क्रूटनी के बाद चुना गया है। ट्रस्ट की ओर से गठित तीन सदस्यीय चयन समिति ने पहले चरण में योग्य उम्मीदवारों के इंटरव्यू किए। अब अंतिम दौर में पहुंचे 18 दावेदारों का आमने-सामने साक्षात्कार अयोध्या में होगा। हालिया रिपोर्टों में भी 5,200 से अधिक आवेदनों और सितंबर में ट्रस्ट की बैठक में CEO चयन पर विचार की जानकारी सामने आई है।
11 और 12 अगस्त को अयोध्या में फाइनल इंटरव्यू
CEO पद के लिए अंतिम इंटरव्यू 11 और 12 अगस्त को रामजन्मभूमि परिसर में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान चयन समिति के तीनों सदस्य उम्मीदवारों से बातचीत करेंगे। फाइनल इंटरव्यू में ट्रस्ट के सदस्य भी मौजूद रहेंगे। समिति उम्मीदवारों के अनुभव, प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व कौशल और मंदिर जैसी बड़ी धार्मिक संस्था के प्रबंधन से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखकर अंतिम मूल्यांकन करेगी। 18 उम्मीदवारों को तीन समूहों के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक संभावित नाम के लिए छह-छह उम्मीदवारों को अंतिम चरण के लिए अयोध्या बुलाया गया है। इस इंटरव्यू के बाद चयन समिति तीन नामों का पैनल तैयार करेगी। यही तीन नाम आगे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने रखे जाएंगे।
2 सितंबर की बैठक में होगा अंतिम फैसला
अंतिम इंटरव्यू के बाद चयन प्रक्रिया तुरंत खत्म नहीं होगी। तीन सदस्यीय समिति अपनी सिफारिश ट्रस्ट को सौंपेगी। इसके बाद 2 सितंबर 2026 को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इन नामों पर चर्चा होगी। इसी बैठक में CEO के नाम पर अंतिम सहमति बनने की संभावना है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, 2 सितंबर की बैठक में CEO के अलावा ट्रस्ट से जुड़े दूसरे प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा होनी है। यानी 11-12 अगस्त का इंटरव्यू महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन नए CEO की अंतिम नियुक्ति ट्रस्ट की मंजूरी के बाद ही होगी।
5,200 से ज्यादा लोगों ने किया था आवेदन
राम मंदिर के CEO पद को लेकर शुरुआत से ही काफी दिलचस्पी देखने को मिली। ट्रस्ट की ओर से आवेदन आमंत्रित किए जाने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 5,200 लोगों ने CEO पद के लिए आवेदन किया। इनमें से कई उम्मीदवार प्रशासनिक सेवाओं, सरकारी संस्थानों, निजी क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण संगठनों में काम करने का अनुभव रखते हैं। इतने बड़े आवेदन आधार के कारण चयन समिति को उम्मीदवारों की छंटनी में काफी समय लगा। इसी वजह से चयन प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय भी लगा।
पहले करीब 54 उम्मीदवारों का इंटरव्यू हुआ
आवेदनों की शुरुआती स्क्रूटनी के बाद योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया। सूत्रों के अनुसार, चयन समिति ने करीब 54 उम्मीदवारों का प्राथमिक इंटरव्यू किया। यह बातचीत ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से हुई। इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों के अनुभव, उनकी योग्यता और जिम्मेदारी संभालने की क्षमता को देखा गया। इसके बाद 18 उम्मीदवारों को फाइनल इंटरव्यू के लिए चुना गया। इस तरह 5,200 से ज्यादा आवेदनों से शुरू हुई प्रक्रिया अब केवल 18 उम्मीदवारों तक पहुंच गई है।
क्यों बनाया जा रहा है राम मंदिर का CEO पद?
राम मंदिर का प्रशासन लगातार बड़ा और जटिल होता जा रहा है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। इसके अलावा मंदिर में दान, सुरक्षा, कर्मचारियों का प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, वित्तीय व्यवस्था और रोजाना के प्रशासन जैसे कई काम होते हैं। इसी को देखते हुए ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासन को एक पेशेवर ढांचे में चलाने के लिए CEO नियुक्त करने का फैसला किया है। यह राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इतिहास में पहला CEO पद होगा। ट्रस्ट द्वारा CEO पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाने की पुष्टि जुलाई में जारी रिपोर्टों में भी हुई थी। उस समय बताया गया था कि CEO की प्राथमिक जिम्मेदारी श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की व्यवस्थाओं को बनाए रखना होगी।
CEO के लिए किन खूबियों पर दिया जा रहा है जोर?
राम मंदिर के CEO की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासनिक पद से काफी अलग मानी जा रही है। मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। इसलिए CEO के पास प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ कई स्तरों पर काम संभालने की क्षमता होना जरूरी माना जा रहा है। चयन प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्टों में वित्तीय प्रबंधन, मानव संसाधन, भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल जैसी क्षमताओं पर जोर दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा उम्मीदवारों के सेवा रिकॉर्ड और पृष्ठभूमि की जांच भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा है।
तीन सदस्यीय चयन समिति कर रही है चयन
CEO की नियुक्ति के लिए ट्रस्ट ने एक तीन सदस्यीय चयन समिति बनाई है। इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली कर रहे हैं। समिति में विष्णुकांत चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल, और सुरेश हावड़े भी शामिल हैं। जुलाई में समिति ने CEO पद के लिए जरूरी मानदंडों और चयन प्रक्रिया पर काम शुरू किया था। इसके बाद आवेदन मंगाए गए और उम्मीदवारों की स्क्रूटनी की गई।
मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता पर भी जोर
CEO की नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा चल रही है। मंदिर में आने वाले दान की बड़ी मात्रा और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए वित्तीय और प्रशासनिक पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी वजह से CEO को मंदिर के रोजाना संचालन में जवाबदेही और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। हाल ही लिए रिपोर्टों के मुताबिक 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक में CEO चयन के अलावा मंदिर की सुरक्षा, दान की काउंटिंग और अन्य व्यवस्थागत मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
कौन बनेगा राम मंदिर का पहला CEO?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अयोध्या के राम मंदिर का पहला CEO कौन बनेगा? इसका जवाब फिलहाल 18 उम्मीदवारों के फाइनल इंटरव्यू के बाद ही सामने आएगा। 11 और 12 अगस्त को चयन समिति उम्मीदवारों का मूल्यांकन करेगी और इसके बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। फिर 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में इन नामों पर अंतिम विचार होगा। यानी राम मंदिर के पहले CEO के नाम का ऐलान अगस्त के अंतिम इंटरव्यू के तुरंत बाद नहीं, बल्कि ट्रस्ट की अंतिम मंजूरी के बाद होने की संभावना है।
क्यों खास है यह नियुक्ति?
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि अयोध्या में तेजी से विकसित हो रहे बड़े धार्मिक और पर्यटन केंद्र का हिस्सा है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने के कारण मंदिर का संचालन एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती भी है। ऐसे में CEO की नियुक्ति से उम्मीद है कि मंदिर के रोजाना कामकाज में स्पष्ट जिम्मेदारियां तय होंगी और प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा पेशेवर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। CEO को श्रद्धालुओं की सुविधा से लेकर कर्मचारियों, वित्तीय प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक कामों के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा।
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