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Ujjal Bhuyan Voting Rights: मताधिकार को लेकर जस्टिस भुइयां का बड़ा बयान, कहा- ‘संविधान से ऊपर कोई नहीं’
Ujjal Bhuyan Voting Rights: मताधिकार को लेकर जस्टिस भुइयां का बड़ा बयान
Ujjal Bhuyan Voting Rights: मताधिकार को लेकर जस्टिस भुइयां का बड़ा बयान

Ujjal Bhuyan Voting Rights: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां (Supreme Court Justice Ujjal Bhuyan) ने नागरिकता और मतदान के अधिकार को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि किसी भारतीय नागरिक को वोट देने के अधिकार से वंचित करना उसे अपने ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने जैसा है। जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारतीय नागरिकता और मताधिकार को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक कसौटी पर खरी नहीं उतर सकती। ऐसे में आइए यहां पढ़ें पूरी खबर

NALSAR कार्यक्रम में जस्टिस भुइयां ने रखी बात

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने ये बातें NALSAR में आयोजित नेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में कहीं। उन्होंने कहा कि एक भारतीय नागरिक के नजरिए से वोट देने का अधिकार और मतदाता सूची में शामिल होने का अधिकार अलग-अलग नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, इन दोनों को अलग करना ऐसा है जैसे शरीर से उसकी आत्मा को अलग कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को दो अलग-अलग वर्गों में नहीं बांटता। ऐसा नहीं हो सकता कि कुछ नागरिकों को मतदान का अधिकार मिले और दूसरे नागरिकों को इससे वंचित कर दिया जाए। अगर किसी प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक वोट देने के अधिकार से बाहर हो जाते हैं, तो यह संविधान के अनुच्छेद 326 और अनुच्छेद 14 के तहत गंभीर सवाल खड़ा करता है।

‘दूसरे दर्जे का नागरिक बनाना मनमानी’

जस्टिस भुइयां ने कहा कि अगर कोई प्रक्रिया लाखों भारतीय नागरिकों को उनके ही देश में मतदान के अधिकार से वंचित कर देती है और उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बना देती है, तो ऐसी प्रक्रिया अपने आप में मनमानी मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसे किसी भी तरह के तर्क के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने इसे संविधान की मूल भावना पर हमला बताते हुए कहा कि भारतीय संविधान के तहत स्थापित संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली किसी भी प्रक्रिया को स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस भुइयां ने साफ कहा कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है।

MP जैन का भी किया जिक्र

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने अपने संबोधन में संविधान विशेषज्ञ MP जैन का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विधायिका मतदान के अधिकार को सीमित करने के लिए ऐसे प्रावधान न बनाए, जो तर्कहीन या अनुचित हों। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियादी विशेषताओं में शामिल हैं। अगर यह सिद्धांत कानून बनाने के स्तर पर लागू होता है, तो प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए भी इसका महत्व उतना ही है, बल्कि कुछ मामलों में इससे भी ज्यादा है।

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर जोर

जस्टिस भुइयां ने कहा कि नागरिकता और मतदान का अधिकार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का मतलब है कि प्रत्येक वयस्क नागरिक को वोट देने का अधिकार मिले। इसमें लिंग, धर्म, नस्ल, संपत्ति, शिक्षा या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। हालांकि, कानून में निर्धारित सीमित और उचित अपवाद मौजूद हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार से मनमाने तरीके से दूर न किया जाए। चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और नागरिकों की भागीदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है।

डॉ. आंबेडकर का भी किया उल्लेख

अपने भाषण के दौरान जस्टिस भुइयां ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान सभा में दिए गए समापन भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आंबेडकर इस बात को लेकर सजग थे कि नागरिकों के वयस्क मताधिकार और वोट देने के अधिकार को संविधान में सुरक्षित किया जाना चाहिए। इसे केवल संसदीय कानून के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार देश के स्वतंत्रता संघर्ष से भी जुड़ा हुआ है। यह लंबे संघर्ष और बलिदानों के बाद हासिल हुई आजादी की अभिव्यक्ति है। इसलिए इस अधिकार को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

‘अनुच्छेद 326 से छेड़छाड़ नहीं हो सकती’

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के साथ किसी भी तरह की मनमानी छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि कोई भी अथॉरिटी संविधान से ऊपर नहीं है और न ही किसी ऐसी प्रक्रिया को सही ठहराया जा सकता है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हो। उनकी इस टिप्पणी को मतदान के अधिकार, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

NALSAR के छात्रों की भी तारीफ

कार्यक्रम के दौरान जस्टिस भुइयां ने NALSAR के छात्रों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी प्रतिभा और क्षमता से यह दिखाया है कि एक विश्वविद्यालय के छात्र और खासकर कानून के छात्र में किस तरह का आत्मविश्वास और साहस होना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रतिभाशाली, निडर और साहसी बताया। वहीं, विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाया है और छात्रों को वह मार्गदर्शन दिया है, जिसकी एक विश्वविद्यालय के शिक्षक से उम्मीद की जाती है।

जस्टिस भुइयां का यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब देश में मतदान के अधिकार, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार संवैधानिक बहस होती रही है। उनके संबोधन में लोकतंत्र, नागरिकता, समानता और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के बीच संबंध पर जोर दिया गया।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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