
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने राष्ट्रपति Droupadi Murmu के हालिया बयान पर पलटवार बयान दिया है। जिसमें ममता बनर्जी ने कहा है कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन उन्हें ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक एजेंडे के जाल में फंस गई हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि मुख्यमंत्री का कहना है कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को राजनीति से ऊपर रहकर काम करना चाहिए, न कि चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए।
कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद
दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हाल ही में पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंची थीं, जहां उन्होंने एक कार्यक्रम में भाग लिया। इसी कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसी टिप्पणियां सामने आईं, जिन्हें लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि जिस कार्यक्रम की चर्चा की जा रही है, उसके बारे में राज्य सरकार को पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि न तो कार्यक्रम के आयोजन के बारे में सरकार को बताया गया और न ही उससे जुड़े फंडिंग या व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। जिसके बाद ममता बनर्जी ने कहा कि जब भी राष्ट्रपति किसी राज्य में आती हैं या जाती हैं, तो राज्य सरकार को उसकी जानकारी दी जाती है। लेकिन इस बार जिस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का जिक्र किया गया, उसके बारे में उन्हें कोई ऑफिशियल सूचना नहीं मिली थी।
“हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं”
मुख्यमंत्री का यह भी कहना है कि वह इस समय धरने पर बैठी हुई हैं और राज्य में कई प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों को संभाल रही हैं। जिसके बाद अगर कोई 50 बार भी आए, तो यह जरूरी नहीं कि मैं हर कार्यक्रम में शामिल हो सकूं। कई बार परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि मुख्यमंत्री हर कार्यक्रम में मौजूद नहीं रह सकते। ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी अनुपस्थिति को लेकर जो राजनीतिक बयान दिए जा रहे हैं, वे सही नहीं हैं।
राष्ट्रपति पर भाजपा एजेंडा चलाने का आरोप
दरअसल, इस पूरे विवाद के बीच ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति पर सीधा हमला करते हुए कहा कि उन्हें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि राष्ट्रपति को भाजपा का एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें मैं राष्ट्रपति का बहुत सम्मान करती हूं, लेकिन ऐसा लगता है कि वह भाजपा की नीतियों के जाल में फंस गई हैं। भाजपा की प्राथमिकता राजनीति है, जबकि हमारी प्राथमिकता जनता है। वहीं, लोकतंत्र में सभी संवैधानिक पदों का सम्मान होना चाहिए और उन्हें राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए।
आदिवासी मुद्दों पर भी उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति से कुछ गंभीर सवाल भी पूछे। जिसमें उन्होंने कहा कि जब Manipur में आदिवासी समुदाय के खिलाफ हिंसा और अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही थीं, तब राष्ट्रपति की ओर से कोई कड़ा बयान क्यों नहीं आया। जिसमें इसी तरह Rajasthan और Maharashtra में भी आदिवासी समुदाय के साथ कथित अत्याचार के मामले सामने आए थे, लेकिन उन मुद्दों पर भी राष्ट्रपति की तरफ से कोई बड़ा सवाल नहीं उठाया गया। अब अगर देश के आदिवासी समुदाय के हितों की बात करनी है, तो यह मुद्दा हर राज्य में समान रूप से उठाया जाना चाहिए।
चुनाव से पहले राजनीति न करने की सलाह
ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति से अपील करते हुए कहा है कि चुनाव से पहले उनके साथ राजनीति नहीं की जानी चाहिए। साथ ही, पश्चिम बंगाल में आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने वाली हैं और ऐसे में संवैधानिक पदों को राजनीतिक विवादों से दूर रखना जरूरी है। जिसमें राज्य सरकार ने किसी भी कार्यक्रम को रोकने की कोशिश नहीं की थी और न ही उस आयोजन से उनका कोई सीधा संबंध था।
राज्य सरकार की प्राथमिकता जनता
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दोहराया कि उनकी सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के लोगों की भलाई और विकास है। जिसमें उनकी सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार काम कर रही है। वहीं,
हमारी प्राथमिकता जनता है। भाजपा राजनीति को प्राथमिकता देती है, लेकिन हमारी सरकार हमेशा लोगों के हितों को सबसे ऊपर रखती है।
राजनीतिक बहस तेज होने के आसार
राष्ट्रपति के बयान और ममता बनर्जी के पलटवार के बाद यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो सकते हैं। वहीं, विपक्षी दल भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है।






