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TMC Crisis: ‘तृणमूल एक है, दो नहीं’, बागी सांसदों के खिलाफ अभिषेक बनर्जी का बड़ा कदम, लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र
बागी सांसदों पर अभिषेक बनर्जी का बड़ा वार
बागी सांसदों पर अभिषेक बनर्जी का बड़ा वार

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में असंतोष लगातार बढ़ा जा रहा है, जो अब खुलकर सामने आने लगा है। दरअसल, आज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने साफ शब्द में लिखा है कि तृणमूल कांग्रेस एकजुट पार्टी है और इसके अंदर किसी भी समानांतर गुट को संसद में मान्यता नहीं दी जानी चाहिए।

बता दें कि अभिषेक बनर्जी कि तरफ से यह बड़ा कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पार्टी के कुछ बड़े सांसद अलग पहचान की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यहां जानें क्या है पूरा मामला।

लोकसभा स्पीकर को भेजा पत्र

रविवार को अभिषेक बनर्जी की ओर से भेजा गया पत्र रविवार को टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा। पत्र में उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी के कुछ सांसद खुद को अलग गुट के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं और संसद में अलग पहचान हासिल करना चाहते हैं।

अभिषेक ने कहा कि ऐसा कोई भी प्रयास न केवल पार्टी संविधान के खिलाफ है बल्कि संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के भी अनुरूप नहीं है। उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि किसी भी ऐसे समूह को मान्यता न दी जाए जो खुद को तृणमूल कांग्रेस से अलग बताने का प्रयास कर रहा हो।

AITC एक ही है, कोई दूसरा गुट नहीं

अपने पत्र में अभिषेक बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) एक अविभाज्य और एकीकृत राजनीतिक दल है। पार्टी का एक अधिकृत नेतृत्व, एक संसदीय दल और एक आधिकारिक व्हिप है।

उन्होंने लिखा कि कानून की नजर में केवल एक ही तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) है। कोई सांसद या सांसदों का समूह अपनी इच्छा से अलग गुट बनाकर खुद को स्वतंत्र राजनीतिक इकाई नहीं घोषित कर सकता। अगर किसी समानांतर गुट को मान्यता दी जाती है तो इससे पार्टी की संवैधानिक संरचना और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा।

बागी सांसदों की बढ़ी सक्रियता

दूसरी तरफ पार्टी के भीतर असंतुष्ट सांसदों का एक समूह खुलकर नेतृत्व को चुनौती देता दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में करीब 19 से 20 सांसदों का एक गुट लोकसभा अध्यक्ष से मिलने की तैयारी में है।

यह भी बताया जा रहा है कि यह समूह संसद में अलग पहचान की मांग करेगा। साथ ही यह भी मांग रख सकता है कि उन्हें लोकसभा में सत्तारूढ़ भाजपा नीत एनडीए सांसदों के साथ बैठने की अनुमति दी जाए। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि यह गुट खुद को ‘असली टीएमसी’ के रूप में पेश करने की रणनीति बना रहा है।

किन सांसदों के नाम आ रहे सामने?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बागी खेमे में कई प्रमुख सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें बापी हलदार, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश वर्मा बसुनिया, असीत कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालिपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन सभी नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पार्टी नेतृत्व ने अभी तक इस सूची पर कोई औपचारिक बयान भी जारी नहीं किया है।

क्यों बढ़ रहा है TMC में असंतोष?

मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के अंदर संगठनात्मक मुद्दों को लेकर नाराजगी बढ़ी है। कई नेताओं और सांसदों ने पार्टी की कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से अभिषेक बनर्जी की भूमिका और नेतृत्व शैली को लेकर भी असहमति जताई है। हाल ही में वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच बयानबाजी ने भी पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया था। इसके बाद लगातार ऐसी खबरें सामने आने लगीं कि कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं और वे अपने लिए अलग राजनीतिक रास्ता तलाश सकते हैं।

ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह स्थिति किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और सांसदों की संभावित बगावत ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। यह भी बताया जा रहा है कि अगर पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट सांसदों को मनाने में सफल नहीं होता है तो इसका असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है। आने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) से पहले पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखना ममता बनर्जी और उनके नेतृत्व के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सोमवार की बैठक पर टिकी नजरें

खबरों के अनुसार, अब सभी की नजर सोमवार को होने वाली उस अहम बैठक पर टिकी हैं, जिसमें बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। वहीं, अभिषेक बनर्जी की चिट्ठी यह संकेत देती है कि तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) का शीर्ष नेतृत्व किसी भी कीमत पर पार्टी के भीतर समानांतर गुट को मान्यता नहीं मिलने देना चाहता। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस राजनीतिक संकट से कैसे निपटती है और क्या बागी सांसद अपने रुख पर कायम रहते हैं या फिर नेतृत्व के साथ समझौते का रास्ता निकलता है।

ये भी पढ़ें: भारत ने पाकिस्तान को 64 रन से रौंदा, टी20 वर्ल्ड कप 2026 में जीत के साथ किया धमाकेदार आगाज

Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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