
Punjab Election News: पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट मतदाता लिस्ट सामने आने के बाद विधानसभा चुनाव की सियासी तस्वीर बदलती नजर आ रही है। जिसमें मतदाता सूची से हटाए गए नामों के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि इसका असर पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से करीब 75 सीटों पर पड़ सकता है। जिसमें खासतौर पर उन सीटों पर राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ गई है, जहां पिछले चुनाव में जीत और हार का अंतर काफी कम था।
एसआईआर के दौरान पंजाब में कुल 20 लाख 66 हजार 635 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं। इसके अलावा मृत मतदाता, अनुपस्थित मतदाता और डुप्लीकेट या दूसरी जगह दर्ज नाम भी सूची से हटाए गए हैं।
20.66 लाख नाम हटे, सबसे ज्यादा वोट दूसरी जगह गए लोगों के
आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब की मतदाता सूची से हटाए गए 20,66,635 नामों में 9,44,131 यानी 45.67 फीसदी ऐसे लोग हैं, जो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए। वहीं 5,74,568 यानी 27.80 फीसदी मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
इसके अलावा 4,12,715 यानी 19.96 फीसदी मतदाता अनुपस्थित पाए गए या उनका पता नहीं चल सका। वहीं 1,19,145 यानी 5.76 फीसदी नाम डुप्लीकेट या दूसरी जगह दर्ज पाए गए। इन आंकड़ों ने राजनीतिक दलों के बीच हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि बड़ी संख्या में हटाए गए नामों का सीधा संबंध मतदाता सूची की वास्तविक स्थिति और आगामी चुनावी समीकरण से जुड़ सकता है।
6 बड़े जिलों की 52 सीटों पर सबसे ज्यादा असर
SIR में पंजाब के छह बड़े जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ASDD यानी अनअवेलेबल/डिलीटेड कैटेगरी में आए हैं। इन छह जिलों में कुल 52 विधानसभा सीटें हैं और यहां करीब 12 लाख 45 हजार 904 मतदाता इस श्रेणी में आए हैं।
इन जिलों में सबसे ज्यादा नाम लुधियाना में हटाए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक लुधियाना में 4,16,088, अमृतसर में 2,42,751, जालंधर में 1,84,997, पटियाला में 1,38,624, SAS नगर यानी मोहाली में 1,53,714 और गुरदासपुर में 1,09,730 नाम हटाए गए हैं। इन छह जिलों में कुल 52 विधानसभा सीटें हैं और यहां करीब 99.74 लाख कुल मतदाता हैं। ऐसे में 12.45 लाख से ज्यादा नामों का ASDD सूची में आना चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2022 में इन 52 सीटों पर AAP का दबदबा
इन 6 जिलों की 52 विधानसभा सीटों के 2022 के चुनावी नतीजों को देखें तो आम आदमी पार्टी (AAP) का दबदबा साफ दिखाई देता है। वहीं इन सीटों में AAP ने 39 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को 11 और शिरोमणि अकाली दल को 2 सीटें मिली थीं। वहीं बीजेपी इनमें से एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई थी।
लुधियाना की 14 सीटों में AAP ने 13 और अकाली दल ने एक सीट जीती थी। अमृतसर की 11 सीटों में AAP को 9, कांग्रेस और अकाली दल को एक-एक सीट मिली थी। जालंधर की 9 सीटों में कांग्रेस ने 5 और AAP ने 4 सीटें जीती थीं।
मोहाली की तीनों सीटें AAP के खाते में गई थीं, जबकि पटियाला की सभी 8 सीटों पर AAP ने जीत दर्ज की थी। गुरदासपुर की 7 सीटों में कांग्रेस को 5 और AAP को 2 सीटें मिली थीं।
35 सीटों पर जीत के अंतर से ज्यादा वोट हटे
पंजाब में SIR का सबसे बड़ा असर उन 35 विधानसभा सीटों पर दिखाई दे सकता है, जहां 2022 के चुनाव में जीत-हार का अंतर 10 हजार वोट से कम था। इनमें कई सीटों पर जीत का अंतर महज कुछ हजार वोट रहा था।
SIR के दौरान कई सीटों पर हटाए गए या पेंडिंग मतदाताओं की संख्या पिछली जीत के अंतर से काफी ज्यादा बताई जा रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि सूची से हटे नामों में कितने वास्तविक मतदाता हैं और कितने ऐसे नाम हैं जिन्हें दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराया जाना चाहिए। अब अगर किसी सीट पर हजारों वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर रह जाते हैं, तो इसका असर मतदान प्रतिशत और उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति दोनों पर पड़ सकता है।
प्रवासी मजदूर और किराएदार बने बड़ा फैक्टर
लुधियाना, जालंधर और मोहाली जैसे औद्योगिक एवं व्यावसायिक इलाकों में दूसरे राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों और किराएदारों की बड़ी आबादी रहती है। नौकरी या कारोबार के कारण लगातार स्थान बदलने वाले लोगों के पते में बदलाव होने से मतदाता सूची को अपडेट करना चुनौतीपूर्ण रहता है। यही वजह है कि इन शहरी सीटों पर SIR के आंकड़े राजनीतिक दलों के लिए खास महत्व रखते हैं। जिन पार्टियों का आधार प्रवासी मजदूर, अस्थायी निवासी या शहरी मतदाता रहे हैं, उन्हें अब बूथ स्तर पर अपनी रणनीति दोबारा तैयार करनी पड़ सकती है।
NRI और डुप्लीकेट वोटों की भी होगी जांच
पंजाब से बड़ी संख्या में लोग विदेशों में रहते हैं। अमृतसर, जालंधर, पटियाला और गुरदासपुर जैसे जिलों में विदेश जाने वाले लोगों की संख्या भी काफी है। SIR के दौरान ऐसे मतदाताओं के नामों का सत्यापन होने से मतदाता सूची में दर्ज डुप्लीकेट या अनुपस्थित नामों को हटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, राजनीतिक दलों के सामने यह चुनौती भी रहेगी कि वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से सूची से बाहर न रह जाएं। यही वजह है कि ड्राफ्ट सूची के बाद दावा और आपत्ति प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
चुनाव से पहले पार्टियों की बढ़ेगी सक्रियता
SIR के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि पंजाब में आगामी चुनाव से पहले मतदाता सूची राजनीतिक रणनीति का बड़ा मुद्दा बन सकती है। पार्टियों को बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच करनी होगी और जिन वास्तविक मतदाताओं के नाम हटे हैं, उन्हें दोबारा जोड़ने के लिए अभियान चलाना होगा।
ऐसे में कुल मिलाकर, SIR ने पंजाब की करीब 75 विधानसभा सीटों के चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की संभावना पैदा कर दी है। खासकर 35 करीबी मुकाबले वाली सीटों पर मतदाता सूची में बदलाव का असर बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम वापस जुड़ते हैं और चुनाव के समय वास्तविक मतदाता संख्या किस तरह सामने आती है।
ये भी पढ़ें: UP Politics News: अखिलेश का बीजेपी पर तीखा हमला, कहा- रामराज की बात करने वालों ने रामधन भी नहीं छोड़ा
Author
-
अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






