
UP Electricity News: उत्तर प्रदेश में हर महीने बिजली के बिल में फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) के आधार पर बदलाव किया जाता है। वही इस बार भी अप्रैल 2026 में बिजली खरीद की वास्तविक लागत कम आने के कारण जुलाई 2026 के लिए FPPAS की दर माइनस 4.43 प्रतिशत तय की गई है।
ऐसे में इसका सीधा असर जुलाई महीने के बिजली बिल पर दिखाई देगा। यानी उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अब कम राशि का भुगतान करना होगा। यह राहत ऐसे समय में मिली है जब गर्मियों के दौरान बिजली की खपत सबसे ज्यादा रहती है।
क्यों कम हुआ बिजली का बिल?
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के आदेशों के अनुसार नई दरें लागू की हैं।
दरअसल, बिजली वितरण कंपनियां हर महीने बिजली खरीदने में आने वाले वास्तविक खर्च की समीक्षा करती हैं। यदि बिजली खरीद की लागत बढ़ती है तो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त ईंधन अधिभार लगाया जाता है, जबकि लागत घटने पर इसका लाभ उपभोक्ताओं को दिया जाता है।
अप्रैल 2026 में बिजली खरीद की लागत अनुमान से कम रही। इसी कारण FPPAS की गणना माइनस 4.43 प्रतिशत आई और इसका लाभ जुलाई महीने के बिल में दिया जा रहा है।
किन लोगों को मिलेगा फायदा?
इस फैसले का लाभ उत्तर प्रदेश के सभी बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा। इनमें शामिल हैं—
- घरेलू उपभोक्ता
- ग्रामीण बिजली उपभोक्ता
- शहरी उपभोक्ता
- व्यावसायिक प्रतिष्ठान
- छोटे और बड़े उद्योग
- कृषि श्रेणी के उपभोक्ता
358 करोड़ रुपये की मिलेगी राहत
ईंधन अधिभार शुल्क में कमी के कारण प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं को लगभग 358.31 करोड़ रुपये का सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। जिससे यह राशि बिजली बिल में कटौती के रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी। साथ ही बिजली नियामक आयोग का कहना है कि उपभोक्ताओं से केवल वास्तविक लागत के आधार पर ही शुल्क लिया जाएगा।
15 महीनों की सबसे बड़ी राहत
मार्च 2026 में उपभोक्ताओं को बिजली बिल में 2.42% की राहत मिली थी, लेकिन जुलाई 2026 में यह राहत बढ़कर 4.43% हो गई है। इस लिहाज से पिछले 15 महीनों में यह सबसे बड़ी मासिक कटौती मानी जा रही है। इससे लाखों परिवारों का घरेलू बजट भी कुछ हद तक संतुलित होगा।
कब तक लागू रहेंगी नई दरें?
नई बिजली दरें 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक लागू रहेंगी। इसके बाद अगले महीने फिर से बिजली खरीद की लागत की समीक्षा की जाएगी। यदि लागत में बदलाव होता है तो अगस्त के बिल में भी FPPAS के अनुसार संशोधन किया जा सकता है।
उपभोक्ता परिषद ने फैसले का किया स्वागत
उत्तर प्रदेश उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यदि हर महीने ईंधन अधिभार की गणना पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार होगी, तो उपभोक्ताओं को समय-समय पर इसी तरह राहत मिलती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ता परिषद लंबे समय से सही गणना की मांग कर रही थी।
मध्यम वर्ग और किसानों को मिलेगी राहत
बिजली बिल में आई इस कमी का सबसे अधिक फायदा मध्यम वर्गीय परिवारों और किसानों को मिलने की उम्मीद है। गर्मियों के दौरान पंखे, कूलर और एसी के अधिक इस्तेमाल से बिजली बिल काफी बढ़ जाता है। ऐसे में जुलाई के बिल में 4.43 प्रतिशत की कमी से घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। वहीं छोटे उद्योगों और व्यापारियों की बिजली लागत भी कम होगी, जिससे उनके संचालन खर्च में कमी आएगी।
FPPAS क्या होता है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें FPPAS यानी फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज एक ऐसा शुल्क है, जो बिजली खरीद की वास्तविक लागत के आधार पर हर महीने तय किया जाता है।
- यदि बिजली खरीद महंगी होती है तो यह शुल्क बढ़ जाता है।
- यदि बिजली खरीद सस्ती होती है तो यह शुल्क घट जाता है या माइनस में चला जाता है।
- इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ता है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सबसे बड़ी बात?
दरअसल इस बार की राहत केवल किसी एक श्रेणी तक सीमित नहीं है। प्रदेश के सभी बिजली उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिलेगा। बिजली बिल में कमी से परिवारों की मासिक बचत बढ़ेगी। वहीं उद्योग और व्यापार जगत के लिए भी बिजली खर्च कम होना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि आने वाले महीनों में बिजली खरीद की लागत नियंत्रित रहती है, तो भविष्य में भी उपभोक्ताओं को इसी तरह की राहत मिलने की संभावना बनी रह सकती है।
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