
Sachin Ahir Joins Shiv Sena: महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। इसके साथ ही उन्होंने महायुति उम्मीदवार के रूप में महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति (Deputy Chairman) पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे खेमे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। नामांकन के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मौजूद रहे। महायुति के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया।
मुंबई की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं सचिन अहीर
सचिन अहीर लंबे समय से मुंबई की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से की थी और बाद में शिवसेना (उद्धव गुट) में शामिल हुए थे। वे मजदूर संगठनों और मुंबई के कई इलाकों में मजबूत जनाधार रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। समय के साथ वे उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के करीबी नेताओं में शामिल हो गए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अहीर का पार्टी बदलना केवल एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि इसका असर मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
उपसभापति पद के लिए दाखिल किया नामांकन
शिंदे शिवसेना में शामिल होने के तुरंत बाद सचिन अहीर ने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए महायुति उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। यह पद इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि विधान परिषद की कार्यवाही के संचालन में उपसभापति की अहम भूमिका होती है। इससे पहले इस पद पर नीलम गोरहे कार्यरत थीं। उनके कार्यकाल के बाद अब महायुति ने सचिन अहीर पर भरोसा जताया है।
उद्धव ठाकरे के लिए लगातार दूसरा बड़ा झटका
सचिन अहीर का शिंदे गुट में जाना ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसद भी शिंदे गुट के साथ चले गए थे। इन घटनाओं के बाद विपक्षी शिवसेना की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लगातार हो रहे इन बदलावों का असर आने वाले स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है।
आदित्य ठाकरे के करीबी माने जाते थे
मुंबई के वर्ली क्षेत्र में सचिन अहीर को आदित्य ठाकरे के भरोसेमंद नेताओं में माना जाता रहा है। स्थानीय राजनीति और संगठन को मजबूत करने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। इसी कारण उनके अचानक पार्टी बदलने को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उद्धव ठाकरे ने साधा निशाना
इधर, धाराशिव में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने हाल के राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि शिवसेना को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और महाराष्ट्र की पहचान तथा “महाराष्ट्र धर्म” पर हमला हो रहा है। उद्धव ठाकरे ने राज्य में औद्योगिक निवेश को लेकर भी सरकार की आलोचना की और दावा किया कि कई बड़ी परियोजनाएं महाराष्ट्र से बाहर चली गई हैं।
संजय राउत की दो टूक
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता को अपने फैसले पर भरोसा है तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर जनता के बीच जाकर दोबारा जनादेश लेना चाहिए। राउत ने कहा कि जनता ही तय करेगी कि वह वफादारी के साथ है या दल बदल करने वालों के साथ।
शिंदे गुट के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना लगातार अपने संगठन का विस्तार कर रही है। पिछले कुछ समय में कई जनप्रतिनिधि और नेता शिंदे गुट में शामिल हुए हैं। ऐसे में सचिन अहीर जैसे अनुभवी नेता का शामिल होना महायुति के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र में इसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है।
आगे क्या?
अब सबकी नजर महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के चुनाव और राज्य की बदलती राजनीतिक रणनीति पर रहेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उद्धव ठाकरे का गुट इस राजनीतिक झटके के बाद संगठन को किस तरह मजबूत करता है। महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से लगातार दल-बदल और नए राजनीतिक समीकरण देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में और भी महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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