
Champat Rai Resignation: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ा दान विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं ने यह फैसला उस समय लिया है जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ट्रस्ट की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, चंपत राय ने ‘नैतिक आधार’ (Moral Grounds) पर पद छोड़ने का फैसला किया है ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके। ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने भी इसी दौरान अपना इस्तीफा सौंप दिया। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दोनों के इस्तीफे की पुष्टि की है। हालांकि ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए नकद और अन्य चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर पिछले कुछ दिनों से सवाल उठ रहे थे। आरोप लगाए गए कि दान राशि के रखरखाव और गिनती के दौरान वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। मामले के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच के दौरान कई दस्तावेज, रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई।
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR
SIT की शुरुआती जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस ने गुरुवार को आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में ट्रस्ट के पूर्व चालक टिन्नू यादव सहित अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं। इन पर दान राशि और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के कथित गबन, आपराधिक विश्वासघात और साजिश से जुड़े आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल जांच जारी है और आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
चंपत राय ने क्यों दिया इस्तीफा?
सूत्रों के अनुसार, चंपत राय ने कहा कि जब किसी संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हों, तब निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पद से अलग होना उचित है। बताया जा रहा है कि उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए महासचिव पद छोड़ दिया ताकि जांच पर किसी तरह का प्रभाव पड़ने की आशंका न रहे। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है।
अनिल मिश्रा ने भी छोड़ी जिम्मेदारी
चंपत राय के इस्तीफे के कुछ समय बाद ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दोनों नेताओं का मानना था कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
नृपेंद्र मिश्र ने की पुष्टि
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दोनों इस्तीफों की पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट की व्यवस्थाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी और मंदिर में दर्शन, पूजा तथा अन्य धार्मिक गतिविधियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। ट्रस्ट प्रशासन अपने नियमित कार्य जारी रखेगा।
योगी सरकार का रुख
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सरकार इस पूरे मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने से पहले बिना प्रमाण किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें।
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने भी सरकार और ट्रस्ट से कई सवाल पूछे हैं। कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं ट्रस्ट और सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
मंदिर में दर्शन और व्यवस्था सामान्य
ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे घटनाक्रम का रामलला के दर्शन या मंदिर की दैनिक व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। श्रद्धालु पहले की तरह मंदिर में दर्शन कर सकते हैं। दान व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल की भी समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतों की संभावना कम हो सके।
आगे क्या होगा?
अब जांच एजेंसियां एफआईआर में नामजद आरोपियों से पूछताछ, वित्तीय रिकॉर्ड की जांच और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण करेंगी। ट्रस्ट में महासचिव और सदस्य के रिक्त पदों को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, इस पर भी आने वाले दिनों में फैसला हो सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है।
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