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PM Modi से मिले सुप्रिया सुले समेत NCP(SCP) के 8 सांसद, परिसीमन बिल पर सियासी अटकलें तेज

PM Modi Meeting With NCP(SCP): नई दिल्ली में सोमवार को महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी एक अहम मुलाकात देखने को मिली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP(SCP) की लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी के आठ सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है और कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खींचतान जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक करीब 15 से 20 मिनट चली। सांसदों ने प्रधानमंत्री के सामने महाराष्ट्र और अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे रखे। सुप्रिया सुले के नेतृत्व में हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा इसलिए भी तेज हो गई क्योंकि NCP(SCP) विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा है। हालांकि, मुलाकात के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक बातचीत का मुख्य फोकस महाराष्ट्र से जुड़े विकास और स्थानीय मुद्दों पर था। परिसीमन को लेकर पार्टी के रुख पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

किन मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने उठाया गया?

NCP(SCP) सांसदों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े कई मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने रखा। बीड से सांसद बजरंग सोनवणे ने उजनी बांध से बीड जिले को पानी उपलब्ध कराने की मांग उठाई। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में पानी की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा है। ऐसे में सिंचाई और पेयजल से जुड़े विषय को प्रधानमंत्री के सामने रखना सांसदों के लिए महत्वपूर्ण माना गया। वहीं शिरूर से सांसद और अभिनेता-राजनेता अमोल कोल्हे ने नासिक-पुणे रेलवे लाइन से जुड़े मुद्दे को उठाया। इस रेल परियोजना को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है और इसे महाराष्ट्र के दो महत्वपूर्ण शहरों के बीच कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जाता है। भिवंडी से सांसद बालू मामा म्हात्रे ने नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम भूमिपुत्र दी बा पाटिल के नाम पर रखने की मांग प्रधानमंत्री के सामने रखी। इसके अलावा किसानों और महाराष्ट्र के विकास से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि सांसदों ने महाराष्ट्र से संबंधित विभिन्न मांगों और परियोजनाओं को प्रधानमंत्री के सामने रखने के लिए यह बैठक की थी।

परिसीमन को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?

मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा परिसीमन को लेकर हो रही है। इसकी वजह यह है कि केंद्र सरकार के स्तर पर परिसीमन को लेकर पहले से राजनीतिक बहस चल रही है और NCP(SCP) के आठ सांसदों की प्रधानमंत्री से सामूहिक मुलाकात ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सियासी हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या NCP(SCP) किसी संभावित परिसीमन प्रस्ताव पर सरकार के साथ बातचीत या सहयोग का रास्ता अपना सकती है? हालांकि, फिलहाल इसे केवल अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। NCP(SCP) की ओर से यह घोषणा नहीं की गई है कि पार्टी परिसीमन से जुड़े किसी प्रस्ताव का समर्थन करेगी। दरअसल, परिसीमन का मुद्दा महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। लोकसभा और विधानसभा सीटों के संभावित पुनर्गठन का असर राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है। इसी वजह से विपक्षी दल इस मुद्दे पर लगातार सावधानी से अपनी स्थिति रखते रहे हैं।

कांग्रेस की नजर भी NCP(SCP) पर

NCP(SCP) के सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात ऐसे समय हुई है जब विपक्षी खेमे में भी परिसीमन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस ने NCP(SP) से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे को परिसीमन से अलग रखा जाए। इससे साफ है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर बातचीत और राजनीतिक चिंता बनी हुई है। NCP(SCP) के पास लोकसभा में आठ सांसद हैं। इसलिए पार्टी का किसी भी बड़े संवैधानिक या चुनावी सुधार से जुड़े मुद्दे पर रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि प्रधानमंत्री के साथ हुई इस मुलाकात का परिसीमन विधेयक पर समर्थन से सीधा संबंध है।

सुप्रिया सुले ने मुलाकात के बाद क्या कहा?

मुलाकात के बाद सुप्रिया सुले ने इसे महाराष्ट्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बैठक बताया। उनका कहना था कि सांसद प्रधानमंत्री के सामने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं और विकास से जुड़ी मांगें रखने गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी FCRA बिल का विरोध करेगी। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि पार्टी ने बैठक के दौरान अलग-अलग मुद्दों पर अपनी स्थिति प्रधानमंत्री के सामने रखी। यानी प्रधानमंत्री से मिलना अपने आप में सरकार के सभी प्रस्तावों पर समर्थन का संकेत नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि परिसीमन को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

22 जुलाई को भी हुई थी मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NCP(SCP) नेताओं के बीच यह पहली हालिया मुलाकात नहीं है। इससे पहले 22 जुलाई को शरद पवार और सुप्रिया सुले ने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इसके बाद सोमवार को पार्टी के आठ सांसदों का प्रधानमंत्री के साथ मिलना राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ संसद में विपक्ष और सरकार के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के एक प्रमुख विपक्षी दल के सांसदों का प्रधानमंत्री के साथ मिलना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।

नवनीत राणा ने मुलाकात पर क्या कहा?

इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। बीजेपी नेता नवनीत राणा ने कहा कि अगर महाराष्ट्र के विकास के लिए शरद पवार गुट के सांसद प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं तो इसमें कोई गलत बात नहीं है। उनका कहना था कि अगर सांसद महाराष्ट्र की प्रगति और विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री के पास जा रहे हैं तो इसे सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए। बीजेपी की ओर से इस मुलाकात को लेकर किसी संभावित राजनीतिक समीकरण की पुष्टि नहीं की गई है।

क्या NCP(SCP) NDA के करीब जा रही है?

यही सवाल फिलहाल राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा में है। NCP में विभाजन के बाद अजित पवार के नेतृत्व वाला गुट महाराष्ट्र में बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ सत्ता में है। दूसरी ओर शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP(SCP) विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में शरद पवार, सुप्रिया सुले और अब पार्टी के सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात को कुछ राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि NCP(SCP) NDA में शामिल होने जा रही है या विपक्षी गठबंधन से अलग होने वाली है। सिर्फ प्रधानमंत्री से मुलाकात को गठबंधन बदलने का संकेत मानना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

महाराष्ट्र के लिए क्या मायने रखती है मुलाकात?

इस बैठक का एक सीधा पहलू महाराष्ट्र के विकास से जुड़ा हुआ है। राज्य के अलग-अलग इलाकों से आने वाले सांसदों ने पानी, रेलवे, एयरपोर्ट, किसान और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दे प्रधानमंत्री के सामने रखे। अगर इन मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से सकारात्मक कार्रवाई होती है तो इसका सीधा लाभ संबंधित क्षेत्रों को मिल सकता है। खासकर बीड के लिए पानी का मुद्दा काफी महत्वपूर्ण है। इसी तरह नासिक-पुणे रेलवे कनेक्टिविटी और नवी मुंबई एयरपोर्ट का नामकरण भी महाराष्ट्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। इस लिहाज से सांसदों की मुलाकात को केवल राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय उनके क्षेत्रीय मुद्दों के संदर्भ में भी समझना जरूरी है।

परिसीमन पर आगे क्या होगा?

परिसीमन को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से संभावित प्रस्तावों और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा के बीच आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। NCP(SCP) का आधिकारिक रुख सामने आने के बाद ही यह पता चलेगा कि पार्टी किसी प्रस्ताव का समर्थन करती है, विरोध करती है या उसमें किसी तरह के संशोधन की मांग रखती है। फिलहाल पार्टी की ओर से सामूहिक रूप से प्रधानमंत्री से मुलाकात का उद्देश्य महाराष्ट्र के मुद्दों को उठाना बताया गया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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