
Jantar Mantar Protest: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज गुरुवार को देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। जंतर-मंतर पर पेपर लीक मामले पर केजरीवाल ने भी कार्यक्रम में पहुंचकर छात्रों से संवाद किया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों और मूल्यांकन प्रणाली की खामियों ने लाखों छात्रों के भविष्य के लिए गंभीर संकट है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपील की है और साथ ही यह भी कहा है कि अगर भारत सरकार (Government of India) वास्तव में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव चाहती है तो शिक्षा सुधारक और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक (Scientist Sonam Wangchuk) को देश का शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए।
वहीं, केजरीवाल ने यह भी कहा कि आज देश का युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित है, लेकिन सरकार उसकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही। ऐसे में आइए इस मामले से जुड़ी हर एक अपडेट के बारे में यहां विस्तार से जानते हैं ?
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले कुछ सालों में कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक (Question Paper Leak) होने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी दिखाई देती है।
उन्होंने यह भी दावा किया है कि नीट परीक्षा के पेपर लीक (NEET Exam Paper Leak) मामले के बाद कई छात्रों ने मानसिक तनाव का सामना किया और सरकार ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई भरोसेमंद कदम नहीं उठाया। उनके अनुसार, छात्रों का विश्वास बहाल करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होनी चाहिए।
सीबीएसई मूल्यांकन प्रणाली पर भी जताई चिंता
केजरीवाल ने केवल पेपर लीक (Paper Leak) का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि परीक्षा कॉपियों के मूल्यांकन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया में भी कई शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन जिन एजेंसियों पर आरोप लगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह नहीं बनेगी, तब तक छात्रों का भरोसा मजबूत नहीं हो पाएगा। सरकार को इस दिशा में ठोस सुधार करने की जरूरत है।
सरकार पर लगाया अहंकार का आरोप
अपने संबोधन में अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर युवाओं की आवाज अनसुनी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता और छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय अहंकार में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते युवाओं की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले चुनावों में यही युवा अपना फैसला सुनाएंगे। उनका कहना था कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
‘सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए’
केजरीवाल ने कहा कि सोनम वांगचुक लंबे समय से शिक्षा सुधार, नवाचार और छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, यदि उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाए तो देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह उम्मीद नहीं है कि केंद्र सरकार (Central Government) ऐसा फैसला लेगी, क्योंकि इससे शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए विशेषज्ञों को जिम्मेदारी देना समय की मांग है।

अन्ना आंदोलन का भी किया जिक्र
जंतर-मंतर से बोलते हुए अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन (Anna Hazare Movement) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसी स्थान से शुरू हुए आंदोलन ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाया था। उन्होंने कहा कि इतिहास कई बार खुद को दोहराता है और यदि सरकार जनता तथा युवाओं की आवाज नहीं सुनेगी तो भविष्य में राजनीतिक परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया बताया है।
सौरभ भारद्वाज ने भी सरकार को घेरा
AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा मंत्री बदल देने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जरूरत इस बात की है कि शिक्षा क्षेत्र को ऐसे व्यक्ति के हाथों में सौंपा जाए, जिसे शिक्षा सुधार का व्यावहारिक अनुभव हो।
उन्होंने कहा कि यदि सोनम वांगचुक जैसे वैज्ञानिक और शिक्षा सुधारक को शिक्षा मंत्री बनाया जाता है तो यह देश ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए भी सकारात्मक संदेश होगा।
सोनम वांगचुक की भूमिका की सराहना
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कई लोग सोनम वांगचुक को सामाजिक बदलाव का प्रतीक मानते हैं। उनके अनुसार, वांगचुक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे व्यक्तित्व को शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी देने से शिक्षा क्षेत्र में नई सोच और नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है।
20 जुलाई के मार्च में शामिल होने की अपील
सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि आम आदमी पार्टी 20 जुलाई को संसद की ओर प्रस्तावित मार्च का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों, युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का आंदोलन है।
उन्होंने सभी विपक्षी दलों, छात्र संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की। भारद्वाज ने यह भी कहा है कि राज्यसभा सांसद संजय सिंह इस कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि पार्टी के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगे।
शिक्षा व्यवस्था पर फिर तेज हुई राजनीतिक बहस
अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं के इन बयानों के बाद शिक्षा व्यवस्था (Education System), परीक्षा प्रणाली और शिक्षा मंत्रालय को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
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