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UP Politics News: यूपी में बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट प्लान हुआ एक्टिव, 2027 में अखिलेश के PDA को रोकने की बड़ी तैयारी
UP Politics News: यूपी में बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट प्लान हुआ एक्टिव
UP Politics News: यूपी में बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट प्लान हुआ एक्टिव

UP Politics News: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Election 2027) से पहले बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए खास रणनीति बना रही है। बीजेपी उन करीब 18,900 बूथों पर विशेष ध्यान देगी, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे जीत मिली थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी पिछड़ गई। बीजेपी के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े 16 से 22 सितंबर तक राज्य का दौरा करेंगे। इस दौरान कमजोर बूथों की समीक्षा कर उन्हें दोबारा जीतने की योजना तैयार की जाएगी। पार्टी का लक्ष्य अखिलेश यादव के PDA समीकरण का मुकाबला करना है। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरी खबर

2027 चुनाव से पहले बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट प्लान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी रणनीति के तहत बूथ मैनेजमेंट पर जोर बढ़ा दिया है। पार्टी का मकसद उन इलाकों में दोबारा मजबूत पकड़ बनाना है, जहां पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान वोटों का समीकरण उसके खिलाफ चला गया था।

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में करीब 18,900 ऐसे बूथ हैं, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत मिली थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी इन बूथों पर पीछे रह गई। बीजेपी अब इन बूथों की समीक्षा कर वहां की स्थानीय समस्याओं और बदले हुए चुनावी समीकरण को समझने की कोशिश कर रही है।

विनोद तावड़े करेंगे बूथों की समीक्षा

उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रभारी विनोद तावड़े 16 सितंबर से 22 सितंबर तक राज्य के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह पार्टी के कमजोर बूथों की समीक्षा करेंगे। बीजेपी की कोशिश है कि इन बूथों पर संगठन को मजबूत किया जाए और स्थानीय स्तर पर मतदाताओं से जुड़ाव बढ़ाया जाए।

पार्टी बूथ स्तर पर यह समझने का प्रयास कर रही है कि किन कारणों से 2022 में उसके पक्ष में रहा वोट 2024 में दूसरी पार्टियों की ओर चला गया। इसके आधार पर आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए नई रणनीति तैयार की जाएगी।

ग्रामीण इलाकों में बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान

बता दें 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी का प्रदर्शन 2019 के मुकाबले कमजोर रहा था। साल 2019 में पार्टी ने राज्य की 62 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि 2024 में उसे 33 सीटों पर सफलता मिली। इसके उलट समाजवादी पार्टी ने 2019 की पांच सीटों के मुकाबले 2024 में 37 सीटें जीतीं।

रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी को बूथ स्तर पर सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण इलाकों में हुआ। जिन बूथों पर पार्टी 2024 में पिछड़ी, उनमें करीब 80 फीसदी बूथ ग्रामीण क्षेत्रों में बताए गए हैं। अवध और पूर्वांचल में बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सामने आई। ग्रामीण मतदाताओं के बीच स्थानीय समस्याएं, रोजगार, किसानों से जुड़े मुद्दे और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण रहे।

अवध और पूर्वांचल में बीजेपी की स्थिति

2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक, अवध क्षेत्र की 154 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 101 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं पूर्वांचल की 102 सीटों में से पार्टी 53 सीटें जीतने में सफल रही थी।

2024 के लोकसभा चुनाव में इन क्षेत्रों के कई बूथों पर बीजेपी को नुकसान हुआ। जिसमें अमेठी, फैजाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर जैसे इलाकों में पार्टी के प्रदर्शन में बदलाव देखने को मिला।

पूर्वांचल में जौनपुर, गाजीपुर, मछलीशहर, चंदौली और ग्रामीण प्रयागराज के कई बूथों पर भी बीजेपी के सामने चुनौती रही। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन क्षेत्रों में गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी की ओर गया।

पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में भी समीक्षा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड की 128 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 2022 में 87 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी 65 विधानसभा सीटों पर आगे रही।

बुंदेलखंड में 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 19 में से 14 सीटें जीती थीं। लोकसभा चुनाव में पार्टी नौ विधानसभा सीटों पर बढ़त बना सकी। इन क्षेत्रों में भी बूथ स्तर पर संगठन की समीक्षा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी की रणनीति केवल कमजोर बूथों तक सीमित नहीं है। पार्टी उन बूथों पर भी अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है, जहां उसका प्रदर्शन पहले से मजबूत रहा है।

अखिलेश यादव के PDA का मुकाबला कैसे करेगी बीजेपी?

2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण ने बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सपा के इस अभियान का असर कुछ गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं पर भी पड़ा। जिसमें कुर्मी, कुशवाहा और अन्य ओबीसी समुदायों के वोटों का एक हिस्सा सपा गठबंधन की ओर जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के कारण गैर-जाटव दलित वोटों का एक हिस्सा भी सपा गठबंधन की तरफ गया।

बीजेपी अब इन सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की तैयारी कर रही है। पार्टी के सामने चुनौती है कि वह अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपना समर्थन दोबारा मजबूत करे।

स्थानीय मुद्दों पर भी रहेगा फोकस

बीजेपी की बूथ समीक्षा में केवल चुनावी आंकड़ों पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा। स्थानीय स्तर पर मतदाताओं की नाराजगी, विकास से जुड़े मुद्दे, संगठन की सक्रियता और पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए बूथ मैनेजमेंट एक बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है। वहीं, समाजवादी पार्टी अपने PDA समीकरण को और मजबूत करने की कोशिश करेगी। ऐसे में यूपी की चुनावी लड़ाई में बूथ स्तर की रणनीति और सामाजिक समीकरण दोनों अहम भूमिका निभाएंगे।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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