
Ranchi Students Protest: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राज्य की राजधानी रांची में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC-CGL (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा) में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र सोमवार को आंदोलन के 16वें दिन भी धरने पर डटे रहे। इस बीच आंदोलन को समाप्त कराने के लिए सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का दौर जारी है। आज दोपहर 12 बजे छात्रों के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सरकार द्वारा गठित समिति के साथ महत्वपूर्ण बैठक होनी है। दोनों पक्षों के बीच होने वाली यह वार्ता निर्णायक मानी जा रही है। छात्रों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे विधानसभा घेराव सहित आंदोलन को और तेज करेंगे।
आज होगी अहम बैठक
छात्रों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल सात सदस्य सरकार की समिति के साथ बैठक करेंगे। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी मुख्य मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शनकारी छात्र विपिन कुमार ने कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल सरकार के सामने सभी मांगों को मजबूती से रखेगा। उन्होंने कहा कि छात्र किसी समझौते के लिए नहीं बल्कि न्याय की मांग को लेकर बातचीत कर रहे हैं। उनके अनुसार, जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की कई प्रमुख मांगें हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मांग 14वीं JPSC परीक्षा और JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच कराना है। छात्रों का कहना है कि जिन परीक्षाओं में धांधली या अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, उन्हें रद्द किया जाए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से दोबारा कराई जाए।
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:-
- 14वीं JPSC परीक्षा की CBI जांच
- JSSC-CGL परीक्षा की CBI जांच
- कथित अनियमितताओं वाली परीक्षाओं को रद्द किया जाए
- दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई
- भविष्य की परीक्षाओं के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए
छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा का नहीं बल्कि राज्य की पूरी भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने की लड़ाई है।
16 दिनों से जारी है आंदोलन
रांची में छात्रों का धरना पिछले 16 दिनों से लगातार जारी है। बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं। राज्य के विभिन्न जिलों से आए छात्र भी आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। कई छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। प्रदर्शन स्थल पर छात्र शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं और सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सरकार का क्या है रुख?
झारखंड सरकार ने आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए छात्रों से लगातार संवाद बनाए रखा है। सरकार ने वार्ता के लिए एक समिति का गठन किया है, जो प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत कर रही है। सरकार का कहना है कि छात्रों की चिंताओं को सुना जाएगा और कानून के दायरे में रहकर उचित निर्णय लिया जाएगा। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से परीक्षाएं रद्द करने या CBI जांच की मांग स्वीकार करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
क्यों उठ रही है CBI जांच की मांग?
छात्रों का आरोप है कि कुछ भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों का अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। इसी कारण वे चाहते हैं कि किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। छात्रों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष होगी तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
JPSC और JSSC का महत्व
JPSC और JSSC झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती एजेंसियों में शामिल हैं। JPSC के माध्यम से राज्य प्रशासनिक सेवा सहित कई राजपत्रित पदों पर भर्ती होती है। वहीं JSSC विभिन्न विभागों में स्नातक स्तर और अन्य श्रेणियों की सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करता है। हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अनियमितता का आरोप हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित करता है।
छात्रों की चेतावनी
आंदोलनकारी छात्रों ने साफ कहा है कि यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन और व्यापक होगा। उन्होंने विधानसभा घेराव की चेतावनी भी दी है। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित करना है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा।
विपक्ष भी उठा चुका है मुद्दा
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्षी दल सरकार से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर चुके हैं। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि किसी भी शिकायत की अनदेखी नहीं की जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई होगी।
युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना किसी भी राज्य के लिए बेहद जरूरी है। यदि भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो युवाओं का भरोसा कमजोर होता है और सरकारी संस्थाओं की साख भी प्रभावित होती है। इसी कारण ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और समयबद्ध समाधान आवश्यक माना जाता है।
आज की बैठक पर टिकी हैं निगाहें
सरकार और छात्रों के बीच होने वाली आज की बैठक को पूरे आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। यदि दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचते हैं तो लंबे समय से चल रहा आंदोलन समाप्त हो सकता है। लेकिन यदि बातचीत बेनतीजा रहती है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना है। राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और हजारों अभ्यर्थियों की नजर इस बैठक के परिणाम पर बनी हुई है।
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