
Rajnath Singh RSS Statement: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों का तीखा जवाब दिया है। जिसमें उन्होंने कहा कि जिस तरह मां के प्यार, गुरु के संस्कार, गंगा के प्रवाह और सूर्य के प्रकाश के लिए किसी लाइसेंस या सरकारी मान्यता की जरूरत नहीं होती है, उसी तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी एक ऐसा संगठन है जिसे किसी प्रमाणपत्र या वैधता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ अपने स्थापना काल से ही राष्ट्रसेवा की भावना के साथ काम करता आया है और यही उसकी सबसे बड़ी पहचान है।
जानकारी के लिए बता दें राजनाथ सिंह ने यह बयान दिल्ली में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस के उन सवालों का जवाब दिया, जिनमें RSS के रजिस्ट्रेशन, कानूनी स्थिति और फंडिंग को लेकर चर्चा की गई थी।
RSS को बताया दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन
कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हमेशा “राष्ट्र प्रथम, सदैव प्रथम” की सोच को अपनाया है। यही कारण है कि आज RSS दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है। साथ ही इस संघ ने सालों से समाज सेवा, आपदा राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण जैसे कई क्षेत्रों में लगातार काम किया है। यही वजह है कि करोड़ों स्वयंसेवक आज भी बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के समाज के लिए कार्य कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी संगठन की पहचान उसके दस्तावेजों से नहीं बल्कि उसके कार्यों से होती है। यदि कोई संस्था लगातार समाज और देश के लिए सकारात्मक योगदान दे रही है, तो वही उसकी सबसे बड़ी वैधता है।
‘मां के प्यार का लाइसेंस नहीं होता’
अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने कई उदाहरण देते हुए कांग्रेस के सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “मां के प्यार का कोई लाइसेंस नहीं होता। गुरु के संस्कार किसी सरकारी मुहर के मोहताज नहीं होते। मां गंगा को बहने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती और सूर्य को प्रकाश देने के लिए किसी रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं पड़ती।” उन्होंने आगे कहा कि ठीक इसी प्रकार RSS भी एक सभ्यतागत (Civilisational) शक्ति है, जो केवल राष्ट्रसेवा के उद्देश्य से कार्य करती है। इसलिए उसे किसी बाहरी प्रमाणपत्र से अपनी पहचान साबित करने की आवश्यकता नहीं है।
संविधान देता है संगठन बनाने का अधिकार
राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पूछा था कि RSS का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं है। इस पर उन्होंने कहा कि संविधान हर नागरिक को संगठन बनाने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने कहा कि हर संस्था का स्वरूप अलग हो सकता है और केवल रजिस्ट्रेशन को आधार बनाकर किसी संगठन की राष्ट्रसेवा पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी संगठन के दशकों पुराने योगदान को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
‘सेवा धर्मः परमः श्रेयः’ की भावना से काम करता है संघ
राजनाथ सिंह ने कहा कि RSS हमेशा “सेवा धर्मः परमः श्रेयः” के सिद्धांत पर कार्य करता आया है। उन्होंने कहा कि देश में जब भी प्राकृतिक आपदा आई, महामारी फैली या किसी संकट की स्थिति बनी, तब RSS के स्वयंसेवकों ने राहत और सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यही संघ की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर सेवा करना RSS की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कांग्रेस ने क्यों उठाए थे सवाल?
दरअसल हाल ही में कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित एक खुला पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने पूछा था कि देश का सबसे बड़ा सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन होने के बावजूद RSS का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं है। प्रियंक खड़गे ने यह पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया था। जिसमें उन्होंने कई सवाल उठाए थे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे—
- RSS का कानूनी दर्जा क्या है?
- संगठन का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं कराया गया?
- फंडिंग का स्रोत क्या है?
- टैक्स अनुपालन (Tax Compliance) कैसे होता है?
- ऑडिट और वित्तीय पारदर्शिता की क्या व्यवस्था है?
- संगठन के पदाधिकारियों और खर्च का सार्वजनिक रिकॉर्ड क्यों उपलब्ध नहीं है?
Dear Shri Mohan Bhagwat ji,
— Priyank Kharge / ಪ್ರಿಯಾಂಕ್ ಖರ್ಗೆ (@PriyankKharge) June 15, 2026
My letter will reach you shortly. However, I thought it was important to draw your attention to this matter early.
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Firstly, congratulations to the RSS on completing 100 years.
An organisation that claims over 60,000 shakhas and crores of… pic.twitter.com/IZy4oeKdMp
NGO और ट्रस्ट का भी दिया था उदाहरण
प्रियंक खड़गे ने अपने पत्र में कहा था कि जब देश में कार्यरत NGO, ट्रस्ट, कंपनियां, श्रमिक संगठन, धार्मिक संस्थाएं और अन्य संगठन कानून के अनुसार पंजीकरण कराते हैं और नियमों का पालन करते हैं, तो RSS इससे अलग क्यों है। जिसके बाद उन्होंने मांग की थी कि इतने बड़े स्तर पर काम करने वाले संगठन को भी अपने वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक करनी चाहिए।
RSS के शताब्दी वर्ष के बीच तेज हुई बहस
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस समय अपनी स्थापना के 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। ऐसे समय में संगठन की भूमिका, इतिहास और कानूनी स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। एक ओर भाजपा और RSS से जुड़े नेता संगठन को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताते हैं, वहीं विपक्ष पारदर्शिता, फंडिंग और कानूनी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाता रहा है।
इसी राजनीतिक बहस के बीच राजनाथ सिंह का यह बयान सामने आया है, जिसने एक बार फिर RSS को लेकर सियासी चर्चा को तेज कर दिया है।
राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने के आसार
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में RSS को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच यह बहस और तेज हो सकती है। संगठन के शताब्दी वर्ष के दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और विपक्ष लगातार कई मुद्दों पर सवाल उठा रहा है। वहीं BJP का कहना है कि RSS ने दशकों से समाज सेवा और राष्ट्रहित में काम किया है, इसलिए उसकी पहचान उसके कार्यों से होती है, न कि किसी सरकारी प्रमाणपत्र से होती है।
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