
Bihar News: बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जिससे बाढ़ का असर अब 15 जिलों में दिखाई दे रहा है, जहां 47.33 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित बताए गए हैं।
वहीं, कई इलाकों में तटबंध टूटने और कटाव की घटनाएं सामने आने के बाद प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर और सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरी खबर
कई जिलों में बाढ़ का गंभीर असर
अधिकारियों के अनुसार, बिहार के 15 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं। इनमें भागलपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, कटिहार, पूर्णिया और बक्सर में बाढ़ का असर सबसे ज्यादा बताया गया है।
ऐसे में लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण नदी किनारे बसे इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कई जगहों पर सड़कों और निचले इलाकों में पानी फैल गया है। प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।
भागलपुर में कई जगह तटबंध टूटे
भागलपुर जिले में अलग-अलग स्थानों पर तटबंध टूटने की करीब चार घटनाएं सामने आई हैं। कुछ जगहों पर मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है, जबकि अन्य स्थानों पर राहत और मरम्मत का काम जारी है।
गोपालपुर प्रखंड में ब्रह्मोत्तर बांध टूटने के बाद जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम और स्थानीय लोगों ने मिलकर रातभर अभियान चलाया। इसके बाद बांध की मरम्मत कर पानी के बहाव को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।
वहीं, रंगरा प्रखंड के धोबनिया जमींदारी बांध में शुक्रवार सुबह करीब साढ़े चार बजे लगभग 20 फुट का कटाव हो गया। इसके कारण बाढ़ का पानी सड़क के किनारे फैल गया और आसपास के इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं।
गंगा का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से ऊपर
बिहार के उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों को नदियों और तटबंधों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गंगा, पुनपुन, गंडक समेत अन्य नदियों के किनारे तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी रखने को कहा है। उन्होंने बताया कि पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर वर्ष 2016 के अब तक के सर्वाधिक रिकॉर्ड को पार कर चुका है। जलस्तर में बढ़ोतरी के पीछे सोन और घाघरा नदी में बढ़ा पानी भी एक वजह बताया गया है। हालांकि घाघरा नदी का जलस्तर स्थिर होने और सोन नदी का जलस्तर कम होने की जानकारी दी गई है।
कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
बिहार में गंगा के साथ-साथ कई सहायक नदियों का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। जानकारी के मुताबिक गंडक नदी डुमरिया घाट, कोसी नदी बलतरा और कुर्सेला, बूढ़ी गंडक खगड़िया, गंगा दीघा, गांधी घाट, हथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
इसके अलावा पुनपुन नदी श्रीपालपुर, बागमती नदी बेनीबाद तथा घाघरा नदी दरौली और गंगपुर सिसवन में खतरे के निशान से ऊपर बताई गई है। नदियों के लगातार ऊंचे जलस्तर के कारण प्रशासन की चिंता बढ़ी हुई है।
सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश
बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार, सितंबर में अब तक राज्य में 90 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य से करीब 20 प्रतिशत अधिक है। ज्यादा बारिश और नदियों में बढ़ते जलस्तर का सीधा असर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर पड़ा है।
अधिकारियों का कहना है कि जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी नई स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
1,194 सामुदायिक रसोई और 15 राहत शिविर
बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग जिलों में 1,194 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा 15 राहत शिविर भी चलाए जा रहे हैं।
इन राहत शिविरों में करीब 11,255 बाढ़ पीड़ितों के रहने, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं पहुंचाने का काम भी जारी है। फिलहाल बिहार में बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है। नदियों के जलस्तर, तटबंधों और कटाव वाले इलाकों की निगरानी बढ़ा दी गई है। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव बाढ़ की स्थिति के लिए अहम रहेगा।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






