
Mukul Roy Death: पश्चिम बंगाल की राजनीति के एक बड़े और अनुभवी चेहरे, पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का रविवार देर रात निधन हो गया. वे 71 वर्ष के थे.उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने पिता के निधन की पुष्टि की. मुकुल रॉय ने रविवार रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली.
लंबे समय से बीमार चल रहे मुकुल रॉय की हालत हाल के दिनों में काफी नाजुक बनी हुई थी.अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई. उनके निधन की खबर सामने आते ही बंगाल के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई. नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया.
गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे मुकुल रॉय
मुकुल रॉय पिछले कई वर्षों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. साल 2023 में डॉक्टरों ने पुष्टि की थी कि वे पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया से पीड़ित हैं. इसके अलावा उनके दिमाग में हाइड्रोसेफलस (Hydrocephalus) की समस्या भी पाई गई थी, जिसके चलते उनकी ब्रेन सर्जरी कराई गई थी.
साल 2024 में भी उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. कभी सिर में चोट लगने के कारण, तो कभी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के चलते उनकी तबीयत बिगड़ती रही. हाल ही में जब उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब डॉक्टरों ने उनकी हालत को “क्रिटिकल” बताया था.
उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने मीडिया से बातचीत में कहा, “पापा पिछले काफी समय से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. हमने पूरी कोशिश की, लेकिन भगवान को कुछ और मंजूर था.”
राजनीतिक गलियारों में शोक, नेताओं की संवेदनाएं
मुकुल रॉय के निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई.तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने गहरा दुख व्यक्त किया.उन्होंने कहा,“बंगाल के राजनीतिक इतिहास का एक अहम दौर आज समाप्त हो गया. मुकुल रॉय एक अनुभवी और जमीनी नेता थे. उनके योगदान ने बंगाल की राजनीति के एक महत्वपूर्ण फेज़ को आकार दिया.”
वहीं, अभिषेक बनर्जी ने आगे कहा कि मुकुल रॉय की सार्वजनिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा. इसके अलावा, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी सोशल मीडिया और बयान जारी कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. कई नेताओं ने कहा कि विचारधाराओं से अलग हटकर मुकुल रॉय एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने हर पार्टी में रहते हुए संगठन को मजबूत किया.
छात्र राजनीति से रेल मंत्रालय तक, मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर
मुकुल रॉय का जन्म 17 अप्रैल 1954 को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा में हुआ था. उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति और यूथ कांग्रेस से शुरू हुआ. शुरुआती दौर में वे कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे और धीरे-धीरे संगठन में अपनी पकड़ मजबूत की. 1998 में उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई. मुकुल रॉय को ममता बनर्जी का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता था. पार्टी के शुरुआती दौर में संगठन खड़ा करने और रणनीति बनाने में उनकी बड़ी भूमिका रही.
टीएमसी के महासचिव से केंद्रीय मंत्री तक
तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद मुकुल रॉय पार्टी के महासचिव बने. वे लंबे समय तक पार्टी के रणनीतिकार रहे और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रही. 2006 में वे राज्यसभा सदस्य चुने गए. इसके बाद 2009 में यूपीए सरकार के दौरान उन्हें केंद्रीय रेल राज्य मंत्री बनाया गया. बाद में वे पूर्ण रेल मंत्री भी बने. रेल मंत्री के तौर पर मुकुल रॉय ने पूर्वी भारत के लिए कई रेल परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया.रेलवे में निवेश बढ़ाने और यात्री सुविधाओं में सुधार के लिए उन्होंने कई योजनाओं की शुरुआत की.
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा. टीएमसी में लंबे समय तक रहने के बाद उन्होंने एक समय पार्टी छोड़ी और भाजपा का दामन थामा.इसके बाद वे दोबारा तृणमूल कांग्रेस में लौट आए. उनके इस राजनीतिक सफर को लेकर कई बार सवाल उठे और आलोचनाएं भी हुईं.लेकिन समर्थकों का कहना था कि मुकुल रॉय एक जमीनी नेता थे और हमेशा अपने क्षेत्र और लोगों के लिए काम करते रहे.
वहीं,राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, “मुकुल रॉय ने बंगाल की राजनीति में संगठन और रणनीति की राजनीति को नई दिशा दी.वे पर्दे के पीछे रहकर बड़े फैसले लेने वाले नेताओं में गिने जाते थे.”
परिवार के लिए निजी क्षति
मुकुल रॉय का जाना उनके परिवार के लिए भी एक गहरा सदमा है. उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय खुद भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं. पिता के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. करीबी सूत्रों के मुताबिक, अंतिम दिनों में परिवार के लोग लगातार उनके साथ अस्पताल में मौजूद थे. डॉक्टरों की टीम पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन उम्र और गंभीर बीमारियों के चलते उनकी स्थिति संभाली नहीं जा सकी.
अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की तैयारी
मुकुल रॉय के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, ताकि पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें.इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किए जाने की संभावना है. टीएमसी नेतृत्व और राज्य सरकार की ओर से अंतिम संस्कार की तैयारियों में सहयोग किया जा रहा है. बड़ी संख्या में राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और समर्थकों के अंतिम संस्कार में शामिल होने की उम्मीद है.
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