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Jaspal Rana: निशानेबाजी के महानायक को अंतिम सलाम, आज वाराणसी में होगा जसपाल राणा का अंतिम संस्कार
Current image: प्रसिद्ध दिवंगत शूटर जसपाल राणा

Jaspal Rana: भारतीय निशानेबाजी जगत के लिए यह बेहद भावुक और दुखद दिन है। देश के दिग्गज शूटर, अर्जुन पुरस्कार विजेता और मशहूर कोच जसपाल राणा को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। उनका अंतिम संस्कार वाराणसी में पूरे राजकीय सम्मान और पारिवारिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा। उनके निधन की खबर से खेल जगत, उनके प्रशंसकों और हजारों खिलाड़ियों में शोक की लहर दौड़ गई है। जसपाल राणा केवल एक महान निशानेबाज ही नहीं थे, बल्कि वह एक ऐसे मार्गदर्शक भी थे जिन्होंने भारत को कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के शूटर दिए। उनके जाने से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसा नाम खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा पार्थिव शरीर

परिजनों के अनुसार, अंतिम संस्कार से पहले जसपाल राणा का पार्थिव शरीर उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। उनके चाहने वाले, खिलाड़ी, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगे। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और वाराणसी में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। परिवार, रिश्तेदारों और खेल जगत से जुड़े लोगों के लिए यह बेहद भावुक क्षण होगा।

अचानक बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के अनुसार, इस सप्ताह की शुरुआत में जसपाल राणा की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनके निधन की खबर सामने आते ही भारतीय खेल जगत स्तब्ध रह गया। सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

उत्तराखंड की धरती पर हुआ था जन्म

जसपाल राणा का जन्म उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हुआ था। उस समय उनके पिता नारायण सिंह राणा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में तैनात थे। बचपन से ही अनुशासन और मेहनत उनके जीवन का हिस्सा बन गई थी। उनकी शुरुआती पढ़ाई विभिन्न शहरों में हुई, जिनमें मसूरी और दिल्ली प्रमुख रहे। करीबी मित्रों के अनुसार, बचपन से ही उनमें कुछ अलग करने का जज्बा था। यही जज्बा आगे चलकर उन्हें भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल कर गया।

दिल्ली में मिली शूटिंग की दिशा

दिल्ली में पढ़ाई के दौरान जसपाल राणा का रुझान शूटिंग की ओर बढ़ा। उन्होंने पेशेवर प्रशिक्षण लेना शुरू किया और जल्द ही अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित कर दिया। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचाया। देखते ही देखते वह भारतीय निशानेबाजी के सबसे चमकदार सितारों में शामिल हो गए।

एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स में लहराया तिरंगा

1990 के दशक और उसके बाद के वर्षों में जसपाल राणा ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन किया। उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई स्वर्ण और अन्य पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। उस दौर में जब शूटिंग को आज जितनी लोकप्रियता नहीं मिली थी, तब जसपाल राणा ने अपने शानदार प्रदर्शन से इस खेल को नई पहचान दिलाई।

कोच बनकर तैयार किए नए सितारे

खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने भारतीय निशानेबाजी में नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का काम किया। उनके मार्गदर्शन में कई युवा खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की। उनके शिष्यों में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिन्होंने बाद में विश्व स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और पदक जीते।

गरीब बच्चों को मुफ्त में देते थे प्रशिक्षण

जसपाल राणा के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी और समाज के प्रति समर्पण था। उनके करीबी मित्र प्रदीप कवि ने बताया कि खेलों के प्रति उनका प्रेम बचपन से ही था। वर्ष 2012 के बाद उन्होंने युवाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया। देहरादून स्थित शूटिंग रेंज में वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निशुल्क प्रशिक्षण देते थे। उनका मानना था कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों या संपन्न परिवारों तक सीमित नहीं होती। वे अक्सर कहा करते थे कि अगर किसी बच्चे में प्रतिभा है तो उसे आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।

बेहद सरल और मिलनसार थे जसपाल

करीबी मित्र प्रदीप कवि, मोहन सिंह रावत और डॉ. विरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जसपाल राणा बेहद सरल और विनम्र स्वभाव के व्यक्ति थे। कुछ महीने पहले जब वह अपने गांव आए थे, तब भी उन्होंने लोगों से बेहद आत्मीयता के साथ मुलाकात की थी। गांव और अपने क्षेत्र से उनका विशेष लगाव हमेशा बना रहा। उनकी लोकप्रियता का कारण केवल उनकी उपलब्धियां नहीं थीं, बल्कि उनका व्यवहार भी था।

परिवार में खेल की समृद्ध परंपरा

जसपाल राणा अपने परिवार में सबसे बड़े थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा पूर्व खेल राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। उनके छोटे भाई सुभाष राणा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज रहे हैं और वर्तमान में कोच के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनकी बहन सुषमा राणा भी राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज रही हैं। खेल उनके परिवार की पहचान बन चुका है।

बेटी ने भी बढ़ाया परिवार का नाम

जसपाल राणा की बेटी देवांशी राणा भी निशानेबाजी में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं। उन्होंने विश्व कप प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और कांस्य पदक जीतकर परिवार और देश का नाम रोशन किया है। वहीं उनके बेटे युवराज राणा भी शूटिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

नेताओं और खेल जगत ने जताया शोक

जसपाल राणा के निधन पर उत्तराखंड और देशभर के नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। धनोल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुरारी लाल खंडवाल सहित कई जनप्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। खेल जगत से जुड़े खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें याद किया और उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।

भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति

विशेषज्ञों का मानना है कि जसपाल राणा का निधन केवल एक खिलाड़ी का जाना नहीं है, बल्कि भारतीय निशानेबाजी के एक पूरे युग का अंत है। उन्होंने एक खिलाड़ी, कोच, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत के रूप में जो योगदान दिया, उसे आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।

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Author

  • Sakshi Raj

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