
Anti Paper Leak Bill: लोकसभा में एंटी पेपर लीक (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बता दें की केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए इसे “सिर्फ दिखावे का बिल” करार दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि जब पुराने कानून के तहत ही आरोपी आसानी से जमानत पा रहे हैं, तब केवल संशोधन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
सरकार ने बताया क्यों जरूरी है संशोधन
विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि 2009 में रेलवे भर्ती परीक्षा और 2012 में एम्स प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक जैसे मामलों ने परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने केंद्रीय स्तर पर परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के सुझावों पर गंभीरता से काम नहीं किया। इसके विपरीत मौजूदा सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का गठन किया और वर्ष 2024 में परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए कानून लागू किया। अब उसी कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संशोधन लाया गया है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देगी। उनका कहना था कि तकनीक, कड़ी निगरानी और सख्त कानूनी प्रावधानों के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।
गौरव गोगोई बोले- यह केवल संशोधन नहीं, सरकार की विफलता का प्रमाण
सरकार की दलीलों के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कई मुद्दों पर सवाल उठाए। जिसमें उन्होंने कहा कि यदि पहले से लागू कानून प्रभावी होता तो बार-बार संशोधन की जरूरत नहीं पड़ती। जिसके बाद गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार मूल समस्या को हल करने के बजाय केवल नया संशोधन लाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार यह विधेयक वास्तविक सुधार की बजाय राजनीतिक संदेश देने का प्रयास अधिक दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी प्रभावी निगरानी और सख्त क्रियान्वयन भी जरूरी है।
संजीव मुखिया और अन्य आरोपियों का किया जिक्र
दरअसल बहस के दौरान गौरव गोगोई ने नीट पेपर लीक मामले के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया और अन्य आरोपियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रमुख आरोपी जमानत पर बाहर हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कानून कितना प्रभावी साबित हुआ। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। उनके अनुसार इससे यह संदेश जाता है कि कानून का डर अपराधियों में पर्याप्त नहीं है।
गोगोई ने कहा कि सरकार को केवल नया संशोधन लाने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि पहले बनाए गए कानून का परिणाम क्या रहा।
NTA की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि एजेंसी में स्वीकृत पदों की संख्या सीमित थी, तो कार्रवाई के दौरान उससे अधिक लोगों को हटाने की बात कैसे सामने आई। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले में स्पष्ट जवाब देने की मांग की और कहा कि परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय किए बिना सुधार अधूरा रहेगा।
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का भी उठाया मुद्दा
गौरव गोगोई ने अपने भाषण में पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देशभर के हजारों छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई। गोगोई ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान लाठीचार्ज हुआ और कुछ जगहों पर पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और छात्रों की आवाज को दबाने की बजाय उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
छात्रों और समाज के समर्थन का किया जिक्र
भाषण के दौरान गौरव गोगोई ने कहा कि आंदोलन के दौरान देशभर से लोगों ने छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कई सामाजिक संगठनों, वकीलों और आम नागरिकों ने छात्रों के साथ खड़े होकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि परीक्षा में पारदर्शिता की मांग किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है।
सरकार और विपक्ष में लंबी चर्चा पर सहमति
एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के लिए शुरुआत में लोकसभा में छह घंटे का समय निर्धारित किया गया था। हालांकि विपक्ष ने इतने महत्वपूर्ण विषय पर अधिक समय देने की मांग की है। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। सदन की सहमति से चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया, ताकि सभी दल अपने विचार विस्तार से रख सकें।
क्या है इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य?
सरकार का कहना है कि संशोधन के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल, डिजिटल धोखाधड़ी और परीक्षा से जुड़े अपराधों पर सख्त नियंत्रण स्थापित करना है।
सरकार का दावा है कि इससे छात्रों का विश्वास मजबूत होगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून में बदलाव पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी प्रभावी निगरानी, जांच एजेंसियों की जवाबदेही और समय पर न्याय सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






