
Earthquake In Gujarat: गुजरात के कच्छ जिले में गुरुवार दोपहर उस समय लोगों में दहशत फैल गई, जब महज तीन मिनट के भीतर लगातार दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। अचानक धरती हिलने से कई लोग अपने घरों, दुकानों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि शुरुआती जानकारी के अनुसार इस घटना में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। भूकंप की तीव्रता बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन लगातार दो झटके महसूस होने के कारण लोगों में डर का माहौल बन गया। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और फिलहाल किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है.
तीन मिनट के भीतर आए दो झटके
भूकंप का पहला झटका दोपहर 2:20 बजे महसूस किया गया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 दर्ज की गई। इसके कुछ ही मिनट बाद 2:23 बजे दूसरा झटका आया, जिसकी तीव्रता 3.2 मापी गई। लगातार दो बार धरती हिलने से लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग एहतियात के तौर पर खुले स्थानों की ओर चले गए।
कहां था भूकंप का केंद्र?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले भूकंप का केंद्र खावड़ा से लगभग 32 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित था। वहीं दूसरे झटके का केंद्र धोलावीरा से करीब 32 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर में बताया गया। दोनों स्थान गुजरात के कच्छ जिले में आते हैं, जो देश के सबसे अधिक भूकंपीय संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है।
घरों से बाहर निकले लोग
भूकंप के झटके महसूस होते ही कई इलाकों में लोग घबराकर अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कुछ लोगों ने बताया कि पहले हल्का कंपन महसूस हुआ, लेकिन दूसरे झटके के बाद डर और बढ़ गया। कई परिवार कुछ समय तक खुले मैदानों और सड़कों पर ही खड़े रहे। हालांकि कुछ ही देर बाद स्थिति सामान्य होने लगी और लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे।
फिलहाल नहीं हुई किसी नुकसान की पुष्टि
प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी भी तरह की जनहानि या बड़े संपत्ति नुकसान की सूचना नहीं मिली है। कहीं से इमारत गिरने या गंभीर क्षति की जानकारी भी सामने नहीं आई है। एहतियात के तौर पर प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि कहीं से कोई नुकसान की सूचना मिलती है तो संबंधित विभाग तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करेगा।
क्यों संवेदनशील है कच्छ क्षेत्र?
भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार, गुजरात का कच्छ क्षेत्र देश के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। यह इलाका भूकंपीय क्षेत्र (Seismic Zone-V) में आता है, जिसे भारत में सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं।
2001 का भुज भूकंप आज भी याद
कच्छ का नाम सुनते ही वर्ष 2001 के विनाशकारी भुज भूकंप की याद ताजा हो जाती है। 26 जनवरी 2001 को आए इस भीषण भूकंप ने हजारों लोगों की जान ले ली थी और लाखों मकानों को नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद से इस पूरे क्षेत्र में भूकंप निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे भूकंप इस क्षेत्र में असामान्य नहीं हैं, लेकिन लगातार निगरानी बेहद जरूरी है।
भूकंप आने पर क्या करें?
आपदा प्रबंधन एजेंसियां भूकंप के दौरान घबराने के बजाय सतर्क रहने की सलाह देती हैं। यदि आप किसी इमारत के अंदर हैं तो मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे शरण लें और लिफ्ट का इस्तेमाल न करें। यदि खुले स्थान पर हैं तो बिजली के खंभों, पेड़ों और पुरानी इमारतों से दूर रहें। भूकंप रुकने के बाद ही सुरक्षित स्थान की ओर जाएं और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
प्रशासन ने लोगों से की अपील
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभाग अलर्ट मोड पर हैं। इसके साथ ही लोगों से कहा गया है कि यदि किसी भवन में दरार या अन्य नुकसान दिखाई दे तो तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दें।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार, 3.2 और 3.6 तीव्रता के भूकंप सामान्यतः हल्के माने जाते हैं। ऐसे झटकों से आमतौर पर बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं होता, लेकिन यदि ये आबादी वाले क्षेत्रों में महसूस हों तो लोगों में घबराहट होना स्वाभाविक है। विशेषज्ञ लगातार निगरानी और भूकंपरोधी निर्माण को सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय मानते हैं।
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