
Amit Shah launched NAFEX Portal: देश में किसानों की आय बढ़ाने और साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को सशक्त बनाने के लिए भारत सरकार के द्वारा कई जरूरी कदम उठाए जाते हैं। इसी क्रम में सरकार ने दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ‘नया डिजिटल पोर्टल’ को आज से लॉन्च कर दिया है, जिससे किसान की फसल का एक भी हिस्सा व्यापारियों या बिचौलियों के जरिए नहीं, बल्कि सीधे किसानों से खरीदा जाएगा।
अगर किसानों को उनकी उपज का पूरा लाभ सही तरह से मिलेगा तो वे अधिक क्षेत्र में दलहन और तिलहन की खेती करेंगे, जिससे देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। ऐसे में आइए यहां जानते हैं कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी हर एक जानकारी
नए ई-आक्शन पोर्टल ‘नाफेक्स डॉट इन’ (NAFEX) का शुभारंभ
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार की यह पहल केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नाफेड के नए ई-आक्शन पोर्टल ‘नाफेक्स डॉट इन’ (NAFEX) के द्वारा शुभारंभ की। इसके साथ ही आज से ही ‘दृष्टि’, ईआरपी (Enterprise Resource Planning) और ‘नाफेड कल्याण’ जैसी नई पहलें भी शुरू की गईं। इनका मकसद खरीद, भंडारण, नीलामी और भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाना है।
2 साल में पूरी तरह बदल जाएगी खरीद व्यवस्था
अमित शाह ने आज के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अगले 2 सालों के अंदर ऐसी व्यवस्था तैयार कर ली जाएगी, जिसमें राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) दलहन की खरीद सीधे किसानों से करेंगे। इससे खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी और किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य सीधे मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए खरीद व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना रही है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
भारत में पिछले कुछ वर्षों में दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद देश अभी भी आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है। इस पोर्टल को शुरू करने की सबसे बड़ी वजह किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ न मिल पाना है। अक्सर खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों की भागीदारी बढ़ जाती है, जिसके कारण किसानों को उचित कीमत नहीं मिलती। नतीजतन कई किसान दलहन और तिलहन की खेती (Cultivation of Pulses and oilseeds) से दूरी बनाने लगते हैं। यही कारण है कि भारत को हर साल बड़ी मात्रा में आयात करना पड़ता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश को प्रतिवर्ष लगभग 60 से 70 लाख टन दलहन और करीब 1.6 करोड़ टन खाद्य तेलों का (Import of Edible oils) आयात करना पड़ता है। इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आती हैं।
आज नई दिल्ली में NAFED के https://t.co/b21apJC2BW और DRISHTI, ERP पोर्टल का शुभारंभ किया। खेत से लेकर किसान के खाते तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने, बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर किसानों को उनकी उपज का पूरा मुनाफा दिलाने और दलहन के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने में ये… pic.twitter.com/QOTJyfiQcp
— Amit Shah (@AmitShah) June 23, 2026
किसानों के खाते में सीधे पहुंचेगा भुगतान
अमित शाह ने कहा कि कृषि क्षेत्र (Agricultural Sector) की नई व्यवस्था में खरीद सीधे किसानों से होगी और भुगतान भी सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा। इससे किसानों को समय पर पैसा मिलेगा और किसी भी प्रकार की कटौती या अनियमितता की संभावना खत्म हो जाएगी।उन्होंने यह भी कहा कि नाफेड और एनसीसीएफ (NAFED and NCCF) ने इस दिशा में जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार कर लिया है। अब इस व्यवस्था को गांव स्तर तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है ताकि देश के अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
नाफेक्स पोर्टल से होगी पूरी नीलामी प्रक्रिया
अब तक नाफेड अपनी खरीदी गई उपज की नीलामी के लिए निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म (Private Digital Platform) का उपयोग करता था। लेकिन नए नाफेक्स पोर्टल के शुरू होने के बाद पूरी नीलामी प्रक्रिया नाफेड के अपने प्लेटफॉर्म पर ही संपन्न होगी। इससे फसल की खरीद और बिक्री से जुड़े सभी आंकड़े एक ही सिस्टम में उपलब्ध रहेंगे, ताकि पारदर्शिता में बढ़ोत्तरी हो सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम हो। साथ ही किसानों और खरीदारों दोनों को अधिक भरोसेमंद और व्यवस्थित प्लेटफॉर्म मिलेगा।
‘दृष्टि’ और ईआरपी से बढ़ेगी निगरानी
सरकार ने ‘दृष्टि’ और ईआरपी प्लेटफॉर्म (ERP Platform) भी शुरू किए हैं। इनकी मदद से खरीद, भंडारण और बिक्री से जुड़े सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेंगे। इन प्लेटफॉर्मों के जरिए स्टॉक की निगरानी आसान होगी, भंडारण प्रबंधन बेहतर होगा और पूरी प्रक्रिया पर रियल टाइम नजर रखना आसान हो जाएगा। इससे अनियमितताओं को रोकने में मदद मिलेगी और संस्थानों की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।
उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस
मोदी सरकार (Modi Government) का लक्ष्य केवल खरीद बढ़ाना नहीं है, बल्कि दलहन और तिलहन उत्पादन को भी बढ़ावा देना है। यदि किसानों को फसल का बेहतर दाम मिलेगा तो वे इन फसलों की खेती का रकबा बढ़ाएंगे। इससे देश में उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता कम होगी और खाद्य तेलों एवं दलहन की उपलब्धता में सुधार आएगा। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
नाफेड की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार
अमित शाह ने नाफेड (NAFED) की आर्थिक स्थिति में आए बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में नाफेड गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में संस्था ने उल्लेखनीय प्रगति की है। आज के समय में NAFED का कारोबार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और यह देश के 74 लाख से अधिक किसानों से जुड़ा हुआ है। सरकार ने अगले दो वर्षों में इसका कारोबार बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
किसानों के बच्चों को मिलेगी छात्रवृत्ति
किसानों के कल्याण के लिए ‘नाफेड कल्याण’ (NAFED Kalyan) योजना के तहत बच्चों को छात्रवृत्ति वितरण कर इस योजना का भी लोकार्पण किया। बताया जा रहा है कि इसके तहत नाफेड अपने मुनाफे का एक हिस्सा किसानों के बच्चों की उच्च शिक्षा और करियर बनाने के लिए छात्रवृत्ति पर खर्च करेगा। इससे देश के किसान परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई रफ्तार भी मिलेगी।
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