
Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति (Vladimir Putin) इस साल सितंबर 2026 में भारत दौरे पर आएंगे। बताया जा रहा है की वह नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। जिसमें रूस की ओर से इस दौरे की पुष्टि की गई है। साथ ही, BRICS समिट का आयोजन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में किया जाएगा।
जानकारी के लिए बता दें की यह दौरा कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। जिसमें एक तरफ दुनिया पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट संकट, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक दबाव का सामना कर रही है, वहीं दूसरी तरफ BRICS देशों की यह बैठक वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति का भारत आना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा संदेश माना जा रहा है।
एक साल में दूसरी बार भारत आएंगे पुतिन
ऐसे में राष्ट्रपति पुतिन का यह एक साल के भीतर दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले वह दिसंबर 2025 में भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए थे। उस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और व्यापार से जुड़े कई अहम समझौतों पर चर्चा हुई थी। अब सितंबर 2026 में होने वाले BRICS सम्मेलन में उनकी मौजूदगी दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को और आगे बढ़ाने वाली मानी जा रही है। जिसमें माना जा रहा है कि सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति पुतिन के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है।
BRICS सम्मेलन पर दुनिया की नजर
दरअसल इस बार भारत BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दुनिया इस समय कई बड़े संकटों से जूझ रही है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता, रूस-यूक्रेन युद्ध का असर और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती जैसे मुद्दों पर BRICS देशों की रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। BRICS पहले केवल पांच देशों का समूह था, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। लेकिन अब इसमें नए सदस्य देशों को भी शामिल किया गया है। मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के जुड़ने से इस संगठन का प्रभाव तेजी से बढ़ा है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि BRICS अब केवल आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिमी देशों के प्रभाव को संतुलित करने वाला बड़ा वैश्विक समूह बनता जा रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा?
राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा भारत की विदेश नीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिसमें भारत इस समय अमेरिका, रूस, यूरोप और पश्चिम एशिया के देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। रूस लंबे समय से भारत का रणनीतिक साझेदार रहा है। रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी जरूरतें रूस से पूरी होती रही हैं। इसके अलावा ऊर्जा, परमाणु सहयोग और व्यापार में भी दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि BRICS सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच रक्षा उपकरणों की सप्लाई, ऊर्जा सुरक्षा, तेल व्यापार और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। इसके अलावा भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने और नई आर्थिक साझेदारी पर भी चर्चा होने की संभावना है।
लावरोव ने दिए थे मजबूत रिश्तों के संकेत
बता दें की हाल ही में रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov भी भारत आए थे। जिसमें उन्होंने BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और भारत-रूस संबंधों को “खास रणनीतिक साझेदारी” बताया था। लावरोव ने कहा था कि दोनों देश कई वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं और आने वाले समय में यह सहयोग और मजबूत होगा। उनके बयान को पुतिन के भारत दौरे की तैयारी के तौर पर भी देखा गया था।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच बढ़ी BRICS की अहमियत
इस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। तेल सप्लाई और ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में BRICS देशों की भूमिका और भी अहम हो गई है। BRICS में अब कई तेल उत्पादक देश शामिल हो चुके हैं। इससे यह समूह वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी ताकत बन सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में BRICS देश डॉलर पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक आर्थिक ढांचे पर भी चर्चा कर सकते हैं। भारत के लिए यह मौका वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का भी माना जा रहा है। नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन भारत की कूटनीतिक ताकत दिखाने का बड़ा अवसर होगा।
वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
दरअसल पिछले कुछ सालों में भारत ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। G20 की सफल मेजबानी के बाद अब BRICS सम्मेलन का आयोजन भारत की वैश्विक छवि को और मजबूत कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दुनिया की बड़ी शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। रूस और अमेरिका दोनों के साथ मजबूत संबंध रखना भारत की विदेश नीति की बड़ी रणनीति मानी जाती है। राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा इसी रणनीति को और मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी जाएगा कि भारत वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र और प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभर रहा है।
क्या निकल सकते हैं बड़े फैसले?
BRICS सम्मेलन के दौरान कई अहम वैश्विक मुद्दों पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इसमें वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने और नई विकास परियोजनाओं को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस सम्मेलन के बाद BRICS की वैश्विक भूमिका और मजबूत हो सकती है। वहीं भारत और रूस के रिश्तों को भी नई दिशा मिल सकती है।
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