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भारत के लिए क्यों अहम हैं नेपाल के चुनाव? जानिए रणनीतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व
Current image: नेपाल में चुनाव

नेपाल में चुनाव: नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव सिर्फ काठमांडू की सत्ता तक सीमित मामला नहीं हैं, बल्कि इनका असर सीधे भारत की विदेश नीति, सुरक्षा रणनीति और क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ता है। बता दें कि भारत और नेपाल के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से बेहद गहरे रहे हैं।अब ऐसे में यह चुनाव नई सरकार के साथ दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय कर सकता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल है और गठबंधन सरकार की संभावना ज्यादा है। भारत की कोशिश है कि नेपाल में स्थिर और लोकतांत्रिक सरकार बने, जिससे दोनों देशों के संबंध मजबूत बने रहें।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये चुनाव

जानकारी के लिए बता दें कि नेपाल में पिछले साल जेन ज़ी आंदोलन के बाद राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई थी। भ्रष्टाचार और सुशासन की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद अंतरिम सरकार ने संसद भंग कर चुनाव की सिफारिश की राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह चुनाव पुरानी बनाम नई राजनीति की लड़ाई बन गया है। युवाओं का झुकाव नई पार्टियों की ओर देखा जा रहा है, जिससे पारंपरिक दलों की सीटें घट सकती हैं।

किसे मिल सकता है फायदा

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार सीपीएन-यूएमएल और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी मुख्य भूमिका में दिख सकते हैं। जिसमें सीपीएन-यूएमएल को मजबूत संगठन और गठबंधन अनुभव का फायदा मिल सकता है, जबकि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रही है। वहीं,कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि संसद में वामपंथी दलों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से घटकर 40-45 प्रतिशत तक आ सकती है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर भारत-नेपाल संबंधों पर भी पड़ सकता है।

भारत के लिए क्या मायने

भारत की विदेश नीति में पड़ोसी पहले सिद्धांत प्रमुख है। जिसमें नेपाल के साथ भारत की 1,700 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा है, जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से जुड़ी है। खुली सीमा, सांस्कृतिक संबंध और आर्थिक साझेदारी के कारण नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती लंबे समय से होती रही है। लेकिन अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाल ने असहमति जताई और भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई। यदि नई सरकार सहयोगी रुख अपनाती है, तो इस मुद्दे पर समाधान निकल सकता है।

चीन फैक्टर कितना अहम

नेपाल की रणनीतिक स्थिति उसे भारत और चीन के बीच महत्वपूर्ण बनाती है। बता दें कि 2017 में पुष्प कमल दहाल की सरकार के दौरान नेपाल चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना में शामिल हुआ था। बाद में केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में बीआरआई के कार्यान्वयन ढांचे पर हस्ताक्षर हुए। भारत चीन के साथ नेपाल के संबंधों का विरोध नहीं करता, लेकिन वह अपनी सुरक्षा और सीमा संबंधी हितों को लेकर सतर्क रहता है। खासकर लिपुलेख और कालापानी जैसे सीमा विवादों पर भारत संवेदनशील है।

क्या बदलेगी भारत की नीति

विदेश नीति के एक्सपर्ट्स का कहना है कि चुनाव के बाद भारत अपनी नेपाल नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा। भारत की प्राथमिकता स्थिर और लोकतांत्रिक नेपाल है। भारत आधिकारिक रूप से नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचता है। लेकिन रणनीतिक और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हर राजनीतिक बदलाव पर नजर रखती है। यदि कमजोर गठबंधन सरकार बनती है, तो नीति निर्माण में अस्थिरता बनी रह सकती है, जिससे भारत-नेपाल संबंधों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकते हैं।

युवाओं की भूमिका

जेन ज़ी आंदोलन के बाद नेपाल की राजनीति में युवाओं की भूमिका बढ़ी है। सोशल मीडिया प्रतिबंधों के बावजूद हजारों युवा सड़कों पर उतरे थे। इन प्रदर्शनों में 19 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। वे पारदर्शिता, रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग कर रहे हैं।

क्या फिर बनेगी गठबंधन सरकार

नेपाल में 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद से अब तक 15 बार सरकार बदल चुकी है। लगातार बदलती सरकारों के कारण नीति स्थिरता प्रभावित हुई है। अगर इस बार भी त्रिशंकु संसद बनती है, तो गठबंधन की मजबूरी रहेगी। इससे विदेश नीति और विकास परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है।

भारत की रणनीतिक प्राथमिकताएं

  • सीमा सुरक्षा और आव्रजन प्रबंधन।
  • चीन के बढ़ते प्रभाव पर संतुलन।
  • आर्थिक और बुनियादी ढांचा सहयोग। जिसमें भारत नेपाल में सड़क, रेल, ऊर्जा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। भारत चाहता है कि नेपाल किसी “कर्ज जाल” की स्थिति में न फंसे।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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