
ईरान-भारत दोस्ती: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से गुजरने वाले भारतीय जहाज पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे, भले ही इस क्षेत्र में अमेरिका द्वारा किसी भी तरह की नाकेबंदी की जाए। ईरान के इस बयान से भारत को बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक राहत मिली है।
जानकारी के लिए बता दें कि भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान भारत को अपना “करीबी दोस्त” मानता है और वह भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। जिसमें उन्होंने भरोसा दिलाया कि मौजूदा हालात के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। जिसमें दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, उसके लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में ईरान का यह आश्वासन भारत के लिए काफी राहत देने वाला है।
भारत-ईरान के बीच मजबूत रिश्ते
ईरान ने साफ कहा है कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिन्हें वह अपना सच्चा मित्र मानता है। ईरान के विदेश मंत्री ने भी उन पांच देशों की सूची में भारत का नाम शामिल किया है, जिनके साथ तेहरान के संबंध बेहद मजबूत हैं। राजदूत फतहाली ने बताया कि भारत और ईरान के बीच इस मुद्दे पर लगातार बातचीत चल रही है। दोनों देश मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में भारतीय जहाजों की सुरक्षा बनी रहे।
अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इस्लामाबाद में हुई बातचीत के विफल होने पर ईरान ने कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए नहीं, बल्कि दबाव बनाने और अपनी शर्तें मनवाने के इरादे से आया था। ईरानी राजदूत ने कहा कि अगर अमेरिका अपनी “गैर-कानूनी मांगों” को छोड़ देता और ईरान के अधिकारों का सम्मान करता, तो बातचीत आगे बढ़ सकती थी। लेकिन अमेरिका का रुख सख्त और एकतरफा था, जिसके कारण वार्ता टूट गई।
बातचीत में इजरायल का हस्तक्षेप?
ईरान ने एक और बड़ा आरोप लगाया है कि इस्लामाबाद में चल रही बातचीत के दौरान इजरायल ने हस्तक्षेप किया। ईरान के अनुसार, जब बातचीत निर्णायक मोड़ पर थी, तब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को फोन किया। इस फोन कॉल के बाद अमेरिका का रुख बदल गया और उसका ध्यान इजरायल के हितों की ओर चला गया। ईरान का दावा है कि इसी वजह से करीब 21 घंटे तक चली बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई।
तेल की कीमतों पर पड़ सकता है असर
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है या इसे बंद किया जाता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ेगी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
भारत के लिए क्या है चुनौती?
अब ऐसे में ईरान ने भारत को भरोसा दिया है, लेकिन स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं कही जा सकती है। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहना होगा। अब ऐसे में भारत पहले भी ऐसे संकटों का सामना कर चुका है और उसने अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश की है। लेकिन होर्मुज जैसे अहम मार्ग पर किसी भी प्रकार का संकट भारत के लिए चिंता का विषय बना रहेगा।
अब आगे क्या होगा?
दरअसल हालात को देखते हुए यह साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। हालांकि बातचीत की संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन इसके लिए दोनों देशों को अपने रुख में लचीलापन दिखाना होगा। भारत इस पूरे मामले में संतुलन बनाकर चल रहा है। एक तरफ उसके अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ भी उसके ऐतिहासिक और आर्थिक रिश्ते मजबूत हैं।






