
Shashank Singh: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में पंजाब किंग्स के लिए खेलने वाले ऑलराउंडर शशांक सिंह कानूनी विवाद में घिर गए हैं। भोपाल के रातीबड़ थाना पुलिस ने शशांक सिंह, उनके पिता और मध्य प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड IPS अधिकारी शैलेश सिंह, तथा परिवार के ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला उनके घर में काम करने वाले कुक विपेंद्र सिंह तोमर की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायत में मारपीट, गाली-गलौज, गलत तरीके से रोककर रखने (Wrongful Confinement) और मोबाइल छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता विपेंद्र सिंह तोमर, जो मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रहने वाले हैं, ने पुलिस को बताया कि उन्हें एक परिचित के माध्यम से भोपाल बुलाया गया था। उन्हें बताया गया था कि शैलेश सिंह के घर पर खाना बनाने का काम मिलेगा। इसके लिए हर महीने 15 हजार रुपये वेतन, रहने और खाने की सुविधा देने का वादा किया गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने में मदद की जाएगी। विपेंद्र के अनुसार, उन्होंने 25 जून को काम शुरू किया। लेकिन घर का माहौल देखकर वह असहज हो गए। उनका आरोप है कि वहां पहले से काम कर रहे कर्मचारियों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया जाता था और लगातार दबाव बनाया जाता था।
खाना पसंद नहीं आने पर विवाद बढ़ने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि खाना बनाने को लेकर विवाद हुआ। विपेंद्र का आरोप है कि जब उन्होंने नौकरी छोड़ने की इच्छा जताई, तब शैलेश सिंह, शशांक सिंह और ड्राइवर ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें गालियां दी गईं, उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया और उन्हें घर से बाहर जाने से रोका गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि मारपीट के बाद उन्हें धमकाया भी गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और पुलिस इनकी जांच कर रही है।
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
विपेंद्र सिंह की शिकायत के आधार पर भोपाल के रातीबड़ थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने शशांक सिंह, उनके पिता शैलेश सिंह और परिवार के ड्राइवर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में मारपीट, अभद्र भाषा का इस्तेमाल और समान मंशा से अपराध करने जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल जांच के बाद दर्ज हुआ मामला
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि घटना के बाद जब वह पुलिस स्टेशन पहुंचे तो शुरुआत में उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। बाद में उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया है। मामले में गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
पुलिस किन पहलुओं की जांच कर रही है?
जांच अधिकारी कई बिंदुओं पर जानकारी जुटा रहे हैं। इनमें शामिल हैं:-
- घटना के समय घर में कौन-कौन मौजूद था।
- शिकायतकर्ता के शरीर पर चोट के निशान और मेडिकल रिपोर्ट।
- मोबाइल फोन छीने जाने के आरोप।
- घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग।
- अन्य कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान।
पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
अभी तक शशांक सिंह की ओर से क्या कहा गया?
समाचार लिखे जाने तक शशांक सिंह या उनके परिवार की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस ने भी कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपों की सत्यता की जांच की जाएगी और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
कौन हैं शशांक सिंह?
शशांक सिंह घरेलू क्रिकेट के जाने-माने ऑलराउंडर हैं। उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में अपने दमदार प्रदर्शन से पहचान बनाई है। पंजाब किंग्स के लिए खेलते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं और टीम के भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उनके पिता शैलेश सिंह मध्य प्रदेश पुलिस में वरिष्ठ IPS अधिकारी रह चुके हैं और विशेष महानिदेशक (Special DG) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।
खेल जगत में चर्चा का विषय बना मामला
एक चर्चित क्रिकेटर और पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम सामने आने के कारण यह मामला खेल और प्रशासनिक दोनों हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एफआईआर दर्ज होना जांच प्रक्रिया की शुरुआत है। किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत में आरोप सिद्ध न हो जाएं।
आगे क्या?
अब पुलिस शिकायतकर्ता, आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज करेगी। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिलते हैं, तो जांच का निष्कर्ष अलग भी हो सकता है। इसलिए फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगी।
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