
S. Jaishankar Meets UN Chief: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात कर कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में पश्चिम एशिया, यूक्रेन, सूडान समेत दुनिया के कई संवेदनशील क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति, अंतरराष्ट्रीय शांति, बहुपक्षीय सहयोग और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रहे। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है। बढ़ते संघर्ष, मानवीय संकट और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने पर दोनों नेताओं ने विशेष जोर दिया।
वैश्विक घटनाक्रमों पर हुई व्यापक चर्चा
बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ वैश्विक घटनाक्रमों पर सार्थक और रचनात्मक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत और संयुक्त राष्ट्र की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय शांति, सतत विकास और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में इस सहयोग को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान पर भी चर्चा
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में जारी तनाव, यूक्रेन संघर्ष और सूडान की मानवीय स्थिति जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि इन संकटों का शांतिपूर्ण समाधान संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही संभव है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
भारत ने शुरू किया UNSC चुनाव अभियान
इस महत्वपूर्ण मुलाकात से पहले भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2028-29 कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्य बनने की अपनी उम्मीदवारी का आधिकारिक अभियान भी शुरू किया। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अभूतपूर्व चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे दौर में सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी जिम्मेदार विदेश नीति, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक अनुभव के आधार पर सुरक्षा परिषद में सकारात्मक योगदान देना चाहता है।
दुनिया के सामने भारत की नई सोच
कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने भारत का वैश्विक दृष्टिकोण “SHANTI” भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि SHANTI का पूरा अर्थ है:-
- Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity यानी नियमों, विश्वास और ईमानदारी के आधार पर समग्र विकास सुनिश्चित करना।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में शांति, विकास और समृद्धि एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। यदि वैश्विक व्यवस्था नियम-आधारित होगी और सभी देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करेंगे, तभी दुनिया में स्थायी शांति और संतुलित विकास संभव होगा।
भारत के अनुभव का किया उल्लेख
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत केवल अपनी नीतियों के आधार पर ही नहीं, बल्कि अपने लंबे अनुभव और वैश्विक योगदान के आधार पर भी दुनिया का विश्वास जीतना चाहता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारत की सक्रिय भागीदारी, विकासशील देशों के साथ सहयोग और वैश्विक मानवीय सहायता कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हमेशा जिम्मेदार वैश्विक साझेदार की भूमिका निभाता रहा है।
सदस्य देशों से समर्थन की अपील
एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि भारत सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना जाता है, तो परिषद के निर्णयों में अधिक संतुलन, व्यापक परामर्श और विकासशील देशों की आवाज को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत हमेशा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षीय सहयोग का समर्थक रहा है।
आठ बार सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है भारत
भारत इससे पहले आठ बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। सबसे हालिया कार्यकाल 2021-22 का था, जिसके दौरान भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, शांति स्थापना और विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और उसके विस्तार की मांग करता रहा है, ताकि वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक देशों को प्रतिनिधित्व मिल सके।
संयुक्त राष्ट्र सुधार पर भारत का रुख
भारत का मानना है कि वर्तमान सुरक्षा परिषद की संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर आधारित है। आज दुनिया बदल चुकी है और विकासशील देशों की भूमिका पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इसलिए सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी तथा अस्थायी दोनों श्रेणियों में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरूरत है। भारत लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।
ब्रसेल्स जाएंगे जयशंकर
संयुक्त राष्ट्र में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ब्रसेल्स रवाना होंगे। वहां वे भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की तीसरी बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी यूरोपीय संघ और बेल्जियम के वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, डिजिटल सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं।
भारत की सक्रिय कूटनीति
हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी कूटनीतिक सक्रियता को लगातार बढ़ाया है। जी-20 की अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज उठाने, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और विकासशील देशों के हितों की पैरवी जैसे मुद्दों पर भारत की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन मिला है। संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर की यह मुलाकात भी इसी सक्रिय कूटनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
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