
Meta Teen Safety Rules: बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेटा ने एक बेहद ही महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दरअसल, भारत जैसे विशाल देश में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल बनता जा रहा है, लेकिन इस परेशानी से निपटने के लिए Meta ने बड़ा कदम उठाया है। बता दें कि Facebook और Instagram पर 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए अब से नए नियम लागू होंगे।
मेटा के इन नए नियमों में बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम, रात में सोशल मीडिया इस्तेमाल और नोटिफिकेशन को लेकर कड़े नियमों शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि यह सख्ती अमेरिका के कई राज्यों के साथ हुए एक समझौते को एक जज की मंजूरी मिलने के बाद ही लागू कर पाएंगे।
18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया के नए मियम
मिली जानकारी के अनुसार, मेटा के नए नियमों के तहत 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल की डिफॉल्ट सीमा तय की जाएगी। इसके मुताबिक रोजाना अधिकतम दो घंटे का स्क्रीन टाइम निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक Facebook और Instagram के इस्तेमाल पर रोक रहेगी।
वहीं, सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक नोटिफिकेशन म्यूट रखने की व्यवस्था भी की जाएगी। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सोशल मीडिया की लगातार मौजूदगी से दूर रखना और उनके स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना है, ताकि वह अपनी सेहत के साथ-साथ अपने भविष्य को भी सुधार सकें।
उम्र छिपाकर सोशल मीडिया इस्तेमाल करना होगा मुश्किल
यह भी बताया जा रहा है कि मेटा अब ऐसी तकनीक को और बेहतर करने पर काम करेगा, जिससे 13 से 17 साल के किशोर यूजर्स की पहचान आसानी से की जा सके। देखा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई बार बच्चे अपनी वास्तविक उम्र को छुपाकर अधिक उम्र दर्ज करके अकाउंट बना लेते हैं। ऐसे मामलों को रोकना मेटा के लिए बड़ी चुनौती रही है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि मेटा की नई तकनीक के जरिए कंपनी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कोई यूजर वास्तव में टीनएजर है या नहीं। अगर किसी यूजर की उम्र उसके बताए गए विवरण से अलग दिखाई देती है, तो उसके अकाउंट पर टीनएजर्स के लिए बनाए गए सुरक्षा नियम लागू किए जा सकते हैं।
सोशल मीडिया की बुरी लत पर लंबे समय से है विवाद
मेटा के खिलाफ अमेरिका में बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद (Legal Dispute) चल रहा था। अभिभावकों और कई राज्यों की ओर से यह चिंता जताई जाती रही है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, नींद और रोजमर्रा की जिंदगी पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
आरोपों में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का डिजाइन कुछ इस तरह से किया गया है कि युवा यूजर्स (Young Users) ज्यादा से ज्यादा समय तक ऐप पर बने रहें। लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, ऑटोप्ले वीडियो और एल्गोरिदम आधारित फीड बच्चों को बार-बार ऐप खोलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
इसी पृष्ठभूमि में मेटा और अमेरिकी राज्यों के बीच हुए समझौते में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसका सीधा असर Facebook और Instagram के टीनएज यूजर्स पर देखने को मिलेगा।
किशोरों को मिलेंगे ज्यादा विकल्प
नए फ्रेमवर्क (New Frameworks) के तहत सिर्फ स्क्रीन टाइम कम करने पर ही जोर नहीं दिया गया है। किशोर यूजर्स को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के तरीके पर ज्यादा नियंत्रण देने की भी योजना है। उन्हें बिना एल्गोरिदम वाला फीड (Non-Algorithmic Feed) चुनने का विकल्प दिया जाएगा। इसके अलावा वे वीडियो के ऑटोप्ले फीचर को बंद (Turn off the Autoplay feature) कर सकेंगे।
सोशल मीडिया पर मिलने वाले ‘लाइक’ भी बच्चों के अनुभव को प्रभावित करते हैं। इसलिए किशोर यूजर्स के लिए लाइक की संख्या को डिफॉल्ट रूप से छिपाने का विकल्प भी शामिल किया गया है। इससे सोशल मीडिया पर लोकप्रियता की होड़ और लगातार प्रतिक्रिया पाने के दबाव को कम करने की कोशिश की जाएगी।
पैरेंटल कंट्रोल और अनचाहे संपर्क पर भी सख्ती
मेटा अपने पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स (Parental Control Features) को भी मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य माता-पिता को बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर ज्यादा नियंत्रण देना है। माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम (Screen Time) और ऑनलाइन गतिविधियों को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगे। इसके साथ ही वयस्कों की ओर से किशोरों से होने वाले अनचाहे संपर्क को रोकने के लिए भी सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाएगा।
Meta ने TikTok और YouTube से भी की अपील
वहीं, मेटा के चीफ लीगल ऑफिसर CJ Mahoney ने साफ तौर पर कहा है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सिर्फ एक कंपनी के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। टीनएजर्स एक ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहते। वे Facebook और Instagram के साथ TikTok और YouTube जैसे दूसरे प्लेटफॉर्म भी इस्तेमाल करते हैं।
इसी वजह से मेटा ने TikTok और YouTube से भी इसी तरह के सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है। कंपनी का मानना है कि अगर पूरी सोशल मीडिया इंडस्ट्री (Social Media Industry) बच्चों की सुरक्षा के लिए समान मानकों को अपनाती है, तभी इन नियमों का असर ज्यादा प्रभावी होगा।
नियमों की निगरानी भी होगी
देखा जाए तो मेटा के लिए सिर्फ नए नियम बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें पालन की निगरानी भी सख्ती से की जाएगी। इसके लिए एक स्वतंत्र रिसर्च फाउंडेशन (Independent Research Foundation) और ऑडिटर की व्यवस्था की जानी चाहिए। ताकि यह पता चल सके कि कंपनी नए सुरक्षा उपायों को सही तरीके से लागू कर रही है या नहीं।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






