Skip to main content Scroll Top
NEET Protest: जंतर-मंतर प्रदर्शन पर SC का बड़ा फैसला, छात्रों की याचिका हुई खारिज, 2873 नए केस का रास्ता साफ

NEET Protest: जंतर-मंतर प्रदर्शन पर SC का बड़ा फैसला

NEET Protest: नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई जगहों पर हुए छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। बता दें अदालत ने छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साफ कहा है कि इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। हालांकि, गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नए सिरे से FIR दर्ज करने की अनुमति दी गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला छात्रों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अदालत ने केंद्र सरकार को आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने राज्यों में दर्ज अन्य FIR को लेकर भी अहम टिप्पणी की है। ऐसे में आइए जानते हैं खबर को लेकर यहां पूरी जानकारी

छात्रों पर दर्ज FIR होंगी रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर अपने विशेष अधिकार यानी अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया। अदालत ने देशभर में दर्ज उन FIR को रद्द करने का आदेश दिया, जो इन विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी थीं।

CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर किसी अन्य राज्य में भी इन्हीं घटनाओं को लेकर FIR दर्ज है, तो उन मामलों में आगे जांच नहीं की जानी चाहिए। अदालत के सामने दिल्ली, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से जुड़े मामलों की जानकारी रखी गई थी। इस फैसले के बाद उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जिनके खिलाफ नीट परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी।

जंतर-मंतर पर हुआ था बड़ा छात्र प्रदर्शन

नीट प्रश्नपत्र लीक (NEET Paper Leak 2026) के खिलाफ बड़ी संख्या में छात्रों ने 20 से 25 जुलाई के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन किया था। इस दौरान हजारों छात्र सड़कों पर उतरे और परीक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस की ओर से कुल 13 FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जिसमें छात्रों का कहना था कि वे परीक्षा में पारदर्शिता और पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन मामलों में आरोपी बनाए गए छात्रों को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

2873 प्रदर्शनकारियों पर नए केस की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी है। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों के खिलाफ नए सिरे से FIR दर्ज करने की अनुमति दी है। इसका मतलब यह है कि अदालत ने सभी प्रदर्शनकारियों को पूरी तरह से कानूनी कार्रवाई से मुक्त नहीं किया है। जिन लोगों का गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके मामलों की अलग से जांच की जा सकती है।

बता दें इस फैसले से एक तरफ जहां सामान्य छात्रों को राहत मिली है, वहीं गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता खुला रखा गया है।

आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने नीट विवाद से जुड़े एक अन्य गंभीर पहलू पर भी ध्यान दिया। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए।

परीक्षा से जुड़े दबाव और विवाद के बीच छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। अदालत के इस निर्देश को प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

CJI सूर्यकांत ने राज्यों को लेकर क्या कहा?

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर अलग-अलग राज्यों में इन्हीं मामलों को लेकर अतिरिक्त FIR दर्ज हैं, तो उन पर आगे की जांच नहीं की जानी चाहिए। अदालत के सामने दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल में दर्ज मामलों की जानकारी भी रखी गई थी।

अदालत के आदेश का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों को केवल प्रदर्शन का हिस्सा होने के कारण अनावश्यक कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही, केंद्र की ओर से भी यह कहा गया कि छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अपने आप में अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

CJP ने वापस लिया दिल्ली मार्च का ऐलान

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च को वापस लेने का फैसला किया है। संगठन की ओर से अदालत को इसकी जानकारी दी गई।

CJP के प्रवक्ता और को-कंवीनर सौरव दास ने कहा कि केंद्र सरकार से मिले सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश को देखते हुए मार्च वापस लेने का फैसला किया गया है। सुनवाई के दौरान सौरव दास ने अदालत के सामने कहा कि केंद्र सरकार के भरोसे, न्यायपालिका की गरिमा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए मार्च का ऐलान वापस लेना उचित है।

छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे नीट प्रदर्शन में शामिल बड़ी संख्या में छात्रों को कानूनी राहत मिलेगी। FIR रद्द होने के बाद छात्रों को इन मामलों में आगे की जांच और कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

वहीं, गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों के खिलाफ नए केस दर्ज करने की अनुमति देकर अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में गंभीर अपराधों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नीट आंदोलन से जुड़े छात्रों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही सरकार और पुलिस को अदालत के निर्देशों के मुताबिक आगे की कार्रवाई करने का रास्ता भी साफ हो गया है।

ये भी पढ़ें: India GDP Growth: भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8% पहुंची, PM मोदी ने X पर जताई खुशी, कहा- देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही

Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

Related Posts

लेटेस्ट ➤

Advertising Banner
305x250