
Meghalaya Politics: ममता बनर्जी को एक ओर बड़ा झटका लगने जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से मेघालय की राजनीति में बड़े सियासी फेरबदल देखने को मिल रहे हैं। दरअसल, राज्य में भारतीय जनता पार्टी यानी BJP अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की तैयारी में जुटी हुई है। बताया जा रहा है कि यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी यानी UDP के 12 में से 9 विधायक और तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के सभी 4 विधायक भी जल्द ही BJP में शामिल हो सकते हैं। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो मेघालय की राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है। क्योंकि 60 सदस्यों वाली मेघालय विधानसभा में BJP के विधायकों की संख्या 2 से बढ़कर 15 हो सकती है। हालांकि, अभी तक किसी भी विधायक के BJP में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
UDP में लंबे समय से चल रही है खींचतान
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मेघालय की मौजूदा राजनीति में UDP एक अहम क्षेत्रीय पार्टी है और वह NPP की अगुवाई वाली मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस सरकार (Meghalaya Democratic Alliance Government) की सहयोगी है। पिछले कुछ समय से UDP के अंदर मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। सितंबर 2025 में हुए कैबिनेट फेरबदल (Cabinet Reshuffle) के बाद पार्टी में असंतोष की चर्चा और तेज हो गई थी।
वहीं, पर्यटन मंत्री पॉल लिंगदोह की जगह पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह को कैबिनेट में शामिल किए जाने के बाद पार्टी के अंदर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं। अब UDP के कई विधायकों के BJP के संपर्क में होने की खबर जब से सामने आई है, तब से राज्य की सियासत माहौल को और गर्म कर दिया है। हालांकि UDP की तरफ से संभावित टूट को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई है।
BJP ने विधायकों से बातचीत की बात मानी
देखा जाए तो इस पूरे मामले में BJP की ओर से भी कई तरह के महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। मेघालय BJP के एक वरिष्ठ नेता ने माना है कि पार्टी के कुछ नेताओं की UDP विधायकों के साथ बातचीत हुई है। शुरुआत में राज्य स्तर के BJP नेताओं ने संपर्क किया था, लेकिन अब बातचीत केंद्रीय नेतृत्व के स्तर तक पहुंच गई है। इस बीच करीब दो सप्ताह पहले UDP के 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) से मुलाकात की थी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शिक्षा मंत्री लाहकमेन रिम्बुई ने किया था। बैठक में मेघालय और पूर्वोत्तर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें इनर लाइन परमिट यानी ILP, स्थानीय निवासियों की सुरक्षा से जुड़े कानून और खासी-गारो भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने जैसे मुद्दे शामिल थे। यही मुलाकात अब राज्य की राजनीति में खास चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, बैठक को सीधे BJP में शामिल होने से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी।
TMC के लिए क्यों बड़ा झटका हो सकता है?
अगर TMC के सभी 4 विधायक BJP में शामिल होते हैं, तो यह पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के लिए मेघालय में बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा का नाम भी संभावित रूप से चर्चा में है। मुकुल संगमा मेघालय की राजनीति (Mukul Sangma and Meghalaya Politics) में एक बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में अगर वह और TMC के अन्य विधायक BJP के साथ जाते हैं, तो इसका असर सिर्फ विधानसभा के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य में विपक्षी राजनीति का पूरा समीकरण बदल सकता है।
2 से 15 विधायक हो सकती है BJP की ताकत
वर्तमान में मेघालय विधानसभा (Meghalaya Legislative Assembly) में BJP के 2 विधायक हैं। UDP के 9 और TMC के 4 विधायक अगर BJP में शामिल होते हैं, तो पार्टी की संख्या 15 तक पहुंच सकती है। यानी BJP कुछ ही समय में विधानसभा में अपनी मौजूदा ताकत के मुकाबले कई गुना मजबूत हो जाएगी।
हालांकि, इस तरह के दल-बदल में दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विधायकों को अयोग्यता से बचने के लिए कानून में निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। इसलिए केवल विधायकों का पार्टी बदलना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उनके समूह के विलय और विधानसभा में इसकी कानूनी स्थिति भी अहम साबित होगी।
2028 के चुनाव पर BJP की नजर
मेघालय में अगला विधानसभा चुनाव 2028 (Assembly Elections 2028) में होना है। ऐसे में BJP की नजर अभी से राज्य के राजनीतिक समीकरण पर है। पार्टी लंबे समय से पूर्वोत्तर में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है और मेघालय में भी भविष्य में अपने नेतृत्व वाली सरकार बनाने का लक्ष्य जाहिर कर चुकी है।
फिलहाल NPP के पास 33 विधायक हैं और वह विधानसभा में मजबूत स्थिति में है। अगर BJP को UDP और TMC के विधायकों का साथ मिलता है, तो 2028 के चुनाव से पहले पार्टी का संगठन और विधानसभा में उसकी राजनीतिक मौजूदगी दोनों मजबूत हो सकती हैं। हालांकि, BJP के सामने चुनौतियां भी कम नहीं होंगी। मेघालय की राजनीति (Politics of Meghalaya) में स्थानीय पहचान, आदिवासी हित, भाषा और जमीन से जुड़े मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन मुद्दों पर क्षेत्रीय दलों और BJP के बीच कई बार अलग-अलग रुख देखने को मिला है। इसलिए संभावित दल-बदल के बाद BJP को इन विधायकों और अपने केंद्रीय नेतृत्व के रुख के बीच संतुलन बनाना होगा।
वहीं, मेघालय में BJP, UDP और TMC के बीच चल रही राजनीतिक हलचल (Political Turmoil) पर सभी की नजर है। यदि 9 UDP और 4 TMC विधायक वास्तव में BJP का दामन थामते हैं, तो यह सिर्फ मेघालय विधानसभा (Meghalaya Legislative Assembly) का आंकड़ा नहीं बदलेगा, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections 2028) से पहले राज्य की पूरी सियासी तस्वीर को नया मोड़ दे सकता है।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






