
Hormuz Strait Crisis: मध्य पूर्व में एक बार फिर से तनाव बढ़ता दिख रहा है। बता दें दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं। बताया जा रहा है, ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने घोषणा की है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर दोबारा रोक लगा दी है। वहीं, अमेरिका ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि समुद्री मार्ग अभी भी खुला है और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है।
जानकारी के लिए बता दें की ईरान के इस ऐलान के बाद वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। अब अगर इसका असर लम्बे समय तक रहता है, तो तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरा मामला
ईरान ने क्यों लगाई रोक?
ईरान की सैन्य कमान के अनुसार, अमेरिका ने हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया है। इसके अलावा, दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी न होना और लगातार युद्धविराम का उल्लंघन भी इस फैसले की बड़ी वजह बताया गया है।
ईरानी सेना ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर प्रतिबंध लगाना सिर्फ पहला कदम है। अगर हालात नहीं सुधरे तो आगे और भी कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका ने कहा- होर्मुज स्ट्रेट खुला है
दरअसल अमेरिका ने ईरान के दावे को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौते के तहत संघर्ष-विराम जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि होर्मुज स्ट्रेट समुद्री यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि समुद्री व्यापार फिलहाल सामान्य रूप से जारी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
लेबनान में इजरायली हमलों से बढ़ा तनाव
इस पूरे विवाद के बीच दक्षिणी लेबनान में इजरायल के हमले भी जारी हैं। ताजा हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत की खबर है, जिनमें दो बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।
इन हमलों के बाद ईरान ने इजरायल पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अगर इजरायल अपने सैन्य अभियान नहीं रोकता, तो क्षेत्र में शांति स्थापित करना मुश्किल होगा।
समझौते पर मंडराने लगा संकट
आपकी जानकारी के लिए बता दें की कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि क्षेत्र में तनाव कम होगा और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल दिया जाएगा। लेकिन अब ईरान द्वारा फिर से प्रतिबंध लगाने के ऐलान ने इस समझौते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़ते हैं तो यह समझौता ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा।
पाकिस्तान के गृह मंत्री पहुंचे तेहरान
ऐसे में इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान पहुंचे हैं। वहां उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की है। वहीं, माना जा रहा है कि यह यात्रा अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के लिहाज से काफी अहम है। सूत्रों के मुताबिक, मोहसिन नकवी पहले भी कई बार ईरान का दौरा कर चुके हैं और दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने की कोशिशों में भूमिका निभाते रहे हैं।
ईरान बोला- हमने अपने सभी वादे निभाए
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान ने समझौते के तहत अपने सभी वादों को पूरा किया है। अब अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह इजरायल पर दबाव बनाए और लेबनान में हो रहे हमलों को रुकवाए।
ईरान ने यह भी कहा कि वह स्विट्जरलैंड में होने वाली अगली वार्ता में अमेरिका से यह स्पष्ट जवाब मांगेगा कि वह अपने वादों को कैसे लागू करेगा। यदि दूसरी तरफ से वादों का पालन नहीं किया गया, तो समझौते का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है। फिलहाल ईरान और अमेरिका के दावों के बीच सस्पेंस बना हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह विवाद शांत होगा या फिर मध्य पूर्व एक नए संकट की ओर बढ़ेगा।
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