
Pakistan Double Game: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर पाकिस्तान की भूमिका एक बार फिर से चर्चा में है। बता दें पाकिस्तान लगातार खुद को दोनों देशों के बीच शांति स्थापित कराने वाला देश बताने की कोशिश कर रहा है। लेकिन दूसरी ओर ऐसी जानकारियां सामने आ रही हैं कि इस्लामाबाद इसी तनाव का फायदा उठाकर खाड़ी देशों को आधुनिक हथियार और सैन्य उपकरण बेचने में जुटा है। यही वजह है कि पाकिस्तान की रणनीति पर कई सवाल उठने लगे हैं।
खुफिया सूत्रों की जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान इस समय इराक और कुवैत को आधुनिक ‘लाइटनिंग-2’ लॉइटरिंग म्यूनिशन बेच रहा है। बता दें हाल ही में इस हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण भी किया गया है। अब यदि यह जानकारी सही साबित होती है, तो पाकिस्तान मध्य पूर्व में अपने रक्षा निर्यात को तेजी से बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
क्या है लाइटनिंग-2 लॉइटरिंग म्यूनिशन?
लाइटनिंग-2 एक आधुनिक लॉइटरिंग म्यूनिशन यानी ऐसा ड्रोन है जो लक्ष्य के आसपास कुछ समय तक मंडरा सकता है और सही अवसर मिलने पर सीधे हमला कर सकता है। इसे अक्सर “सुसाइड ड्रोन” भी कहा जाता है क्योंकि हमला करने के दौरान यह स्वयं भी नष्ट हो जाता है।
अधिकारीयों के मुताबिक, यह सिस्टम लगभग 300 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम बताया जा रहा है और करीब 300 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर सटीक हमला कर सकता है। आधुनिक युद्ध में ऐसे हथियारों का महत्व लगातार बढ़ रहा है क्योंकि इनका उपयोग दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन, सैन्य ठिकानों और रणनीतिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाने में किया जाता है।
खाड़ी देशों में बढ़ रहा पाकिस्तान का रक्षा निर्यात
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान केवल ड्रोन तक ही सीमित नहीं है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि उसने अज़रबैजान, कतर और यमन के साथ JF-17 लड़ाकू विमान के निर्यात से जुड़े समझौते भी लगभग तय कर लिए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दरअसल पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान ने रक्षा निर्यात को अपनी आर्थिक और रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। ऐसे में मध्य पूर्व के देशों के साथ बढ़ते रक्षा संबंध उसके लिए आर्थिक लाभ के साथ-साथ राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने का भी माध्यम बन सकते हैं।
JF-17 फाइटर जेट क्यों है खास?
JF-17 एक हल्का बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है जिसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर विकसित किया है। यह पाकिस्तान वायु सेना के सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों में शामिल है और उसकी वायु शक्ति की रीढ़ माना जाता है।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब JF-17 ब्लॉक-4 संस्करण पर काम कर रहा है, जिसमें आधुनिक रडार, बेहतर हथियार प्रणाली और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता जैसी नई तकनीकों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि इस परियोजना को लेकर पाकिस्तान की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मध्यस्थता का दावा और हथियारों की बिक्री
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद पाकिस्तान ने कई बार यह संकेत दिया है कि वह दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान का कहना रहा है कि वह क्षेत्र में शांति चाहता है और किसी भी बड़े संघर्ष से बचने के पक्ष में है, लेकिन अब सामने आ रही रिपोर्टों ने उसकी इस भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि एक तरफ पाकिस्तान शांति की बात करता है और दूसरी तरफ उसी क्षेत्र में हथियारों का निर्यात बढ़ाता है, तो उसकी नीति विरोधाभासी दिखाई देती है।
क्यों उठ रहे हैं पाकिस्तान पर सवाल?
ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान के ईरान, अमेरिका और चीन—तीनों के साथ अलग-अलग रणनीतिक संबंध हैं। यही कारण है कि उसकी विदेश नीति को लेकर अक्सर संदेह व्यक्त किया जाता है।
- ईरान के साथ पाकिस्तान की लंबी सीमा साझा होती है।
- अमेरिका लंबे समय तक पाकिस्तान का प्रमुख सुरक्षा सहयोगी रहा है।
- चीन पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार माना जाता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या पड़ सकता है असर?
अब यदि खाड़ी देशों में आधुनिक हथियारों और ड्रोन की आपूर्ति बढ़ती है, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण बदल सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व पहले से ही कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नए हथियारों की आपूर्ति से सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। हालांकि किसी भी देश का रक्षा निर्यात अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत किया जा सकता है। लेकिन यदि हथियारों की आपूर्ति ऐसे समय में बढ़ती है जब क्षेत्र पहले से तनाव में हो, तो इसका असर सुरक्षा संतुलन पर पड़ सकता है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
बता दें जिन दावों के आधार पर पाकिस्तान की इस कथित रणनीति की चर्चा हो रही है, वे मुख्य रूप से खुफिया सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। पाकिस्तान, इराक, कुवैत, कतर, अज़रबैजान या अन्य संबंधित देशों की ओर से इन सभी दावों की विस्तृत आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है। इसलिए इन जानकारियों को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। आने वाले दिनों में यदि संबंधित देशों की ओर से कोई आधिकारिक बयान या दस्तावेज सामने आते हैं, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






