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Delhi SIR 2026: दिल्ली एसआईआर वोटर लिस्ट की जांच में बड़े नामों की हुई एंट्री, आडवाणी-जयशंकर समेत कई को नोटिस
Delhi SIR 2026: दिल्ली एसआईआर वोटर लिस्ट की जांच में बड़े नामों की हुई एंट्री
Delhi SIR 2026: दिल्ली एसआईआर वोटर लिस्ट की जांच में बड़े नामों की हुई एंट्री

Delhi SIR 2026: दिल्ली में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया के दौरान मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन को लेकर कई नाम सामने आए हैं। जिनमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, चुनाव आयुक्त एसएस संधू, कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और कुछ अन्य प्रमुख लोगों को रिकॉर्ड में सामने आई अलग-अलग विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति को नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अंतिम फैसला नहीं है।

SIR में क्यों भेजे जा रहे हैं नोटिस?

SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची (SIR Voter List 2026) में दर्ज जानकारी का विस्तृत सत्यापन करना है। इसके तहत मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड की पुराने चुनावी रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों से तुलना की जा रही है। इस दौरान नाम की स्पेलिंग में अंतर, पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होना या जानकारी में किसी तरह की विसंगति मिलने पर संबंधित मतदाता को नोटिस भेजा जा सकता है।

दिल्ली में जारी प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में ऐसी कमियां या अंतर सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नई ड्राफ्ट मतदाता सूची में 47,56,722 नामों को विवरण में कमी या विसंगति के कारण अलग किया गया है। इनमें से करीब 33 लाख मामलों में विशेष नोटिस जारी किए गए हैं और संबंधित लोगों को अपनी जानकारी सुधारने का अवसर दिया गया है।

लालकृष्ण आडवाणी और परिवार के नाम भी सूची में

SIR नोटिस से जुड़े नामों में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी और बहू गीतिका को नोटिस भेजे गए हैं। इनके नाम 2002 की पिछली SIR मतदाता सूची के रिकॉर्ड से सही तरीके से मैप नहीं हो पाए थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि आडवाणी परिवार के एक अन्य सदस्य जयंत आडवाणी की मैपिंग प्रक्रिया पूरी हो गई थी। इससे स्पष्ट है कि नोटिस का आधार परिवार के सभी सदस्यों के लिए एक जैसा नहीं था।

एसएस संधू के नाम में स्पेलिंग का अंतर

नोटिस सूची में चुनाव आयुक्त एसएस संधू का नाम भी बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके मामले में मतदाता रिकॉर्ड में दर्ज नाम और उपलब्ध दूसरे रिकॉर्ड के बीच स्पेलिंग में अंतर सामने आया। ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति से रिकॉर्ड में मौजूद अंतर को स्पष्ट करने के लिए जानकारी या दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

एस जयशंकर और पत्नी का नाम भी शामिल

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी केएस जयशंकर के नाम भी नोटिस सूची में बताए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के नाम मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन के दौरान सामने आए।

SIR में पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। ऐसे में रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर नोटिस भेजकर संबंधित मतदाता को स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया जाता है।

कपिल सिब्बल और विक्रम मिसरी को किस वजह से नोटिस?

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल तथा विदेश सचिव विक्रम मिसरी का नाम भी इस सूची में बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के मामलों में मौजूदा जानकारी का पिछली SIR सूची के रिकॉर्ड से सीधा मिलान नहीं हो पाया।

वहीं, इन मामलों में मुख्य सवाल रिकॉर्ड की मैपिंग और सत्यापन से जुड़ा है। नोटिस के जरिए संबंधित व्यक्ति से आवश्यक जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा जा सकता है।

केजरीवाल परिवार और अन्य नाम भी

SIR से संबंधित नोटिस सूची में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, केजरीवाल के मामले में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा रिकॉर्ड को पिछली SIR प्रक्रिया से जोड़ने में अंतर सामने आया। इसके अलावा उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल, माता-पिता और बेटे के नाम भी नोटिस से जुड़ी सूची में बताए गए हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी रिपोर्ट में सामने आया है।

नोटिस मिलने का मतलब क्या है?

SIR के दौरान नोटिस मिलना यह नहीं बताता कि संबंधित व्यक्ति का नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटा दिया गया है। नोटिस का उद्देश्य रिकॉर्ड में सामने आए अंतर या कमी को स्पष्ट करना और जरूरी सत्यापन पूरा करना है।

मतदाता को उपलब्ध प्रक्रिया के तहत संबंधित दस्तावेज देकर अपनी जानकारी स्पष्ट करने और रिकॉर्ड में सुधार कराने का अवसर मिलता है। इसलिए SIR नोटिस को अंतिम नाम कटने की कार्रवाई के बजाय सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा समझना जरूरी है।

दिल्ली SIR में क्या हो रहा है?

दिल्ली में SIR के तहत मतदाता सूची की जांच के दौरान पुराने चुनावी रिकॉर्ड और मौजूदा जानकारी का मिलान किया जा रहा है। नाम, उम्र, पारिवारिक विवरण, पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग और अन्य जानकारियों में अंतर मिलने पर मामले को सत्यापन के लिए चिन्हित किया जा रहा है।

इस प्रक्रिया में आम मतदाताओं के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के नाम भी सामने आने की खबर है। चुनावी रिकॉर्ड में किसी तरह की विसंगति मिलने पर नोटिस भेजना इसी सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम स्थिति संबंधित व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज और चुनावी अधिकारियों की जांच के बाद स्पष्ट होगी।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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