
G7 Summit 2026: फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G-7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने भरोसे, समानता और साझेदारी का मजबूत संदेश दिया है। बताया जा रहा है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मंच साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य की वैश्विक साझेदारियां तभी सफल होंगी, जब वे सम्मान और समानता की नींव पर आधारित हों।
पीएम मोदी का यह संबोधन उस समय आया है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों, युद्धों और आर्थिक अस्थिरता से गुजर रही है। ऐसे माहौल में भारत ने एक बार फिर “वसुधैव कुटुंबकम” की अपनी सोच को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा।
‘दाता-दानी’ की सोच से आगे बढ़ने की जरूरत
G-7 के आउटरीच सेशन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अब दुनिया को “दाता और लाभार्थी” यानी donor-recipient की पुरानी सोच से आगे बढ़ना होगा। जिससे देशों के बीच रिश्ते मदद देने और लेने तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि समान भागीदारी और आपसी सम्मान पर आधारित होने चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि साझेदारी का अर्थ निर्भरता नहीं बल्कि सम्मान है। दुनिया को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जहां सभी देश बराबरी के साथ आगे बढ़ सकें और विकास की यात्रा में एक-दूसरे के सहयोगी बनें।
‘दुनिया में संसाधनों की नहीं, भरोसे की कमी’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं ज्यादा आपस में जुड़ी हुई है। जिनमें तकनीक, व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन ने देशों को एक-दूसरे पर निर्भर बनाया है, लेकिन इसके बावजूद सबसे बड़ी चुनौती विश्वास की कमी है। उन्होंने कहा, “आज दुनिया में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि भरोसे की कमी है। आपसी विश्वास ही सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है और भविष्य की साझेदारियां इसी भरोसे पर टिकी होंगी।” पीएम मोदी के इस बयान को वैश्विक राजनीति के मौजूदा माहौल में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्लोबल साउथ की उम्मीदों का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को दुनिया से सिर्फ सहायता नहीं, बल्कि सम्मानजनक साझेदारी की उम्मीद है। इन देशों को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें उनकी भागीदारी बराबरी की हो और उनकी आवाज को महत्व दिया जाए।उन्होंने कहा कि भारत हमेशा ऐसे मॉडल का समर्थन करता है, जिसमें देशों को आत्मनिर्भर बनने में मदद की जाए। असली साझेदारी वही है, जो दूसरे देशों को अपनी क्षमता विकसित करने और खुद आगे बढ़ने के लिए सक्षम बनाए।
भारत की विकास साझेदारियों का दिया उदाहरण
पीएम मोदी का कहना है भारत की विकास साझेदारियां हमेशा क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर केंद्रित रही हैं। भारत ने कई देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, तकनीक और प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि भारत की सोच केवल सहायता देने की नहीं, बल्कि साझेदार देशों को मजबूत बनाने की रही है। यही कारण है कि भारत की विकास नीतियां आज दुनिया के कई देशों के लिए एक मॉडल बन रही हैं।
Shared my thoughts at the Outreach Session on ‘Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity’ at the G7 Summit in Evian. In a world that is getting more interconnected and interdependent than ever before, this subject becomes all the more vital. But,… pic.twitter.com/NjNddWGtFF
— Narendra Modi (@narendramodi) June 16, 2026
मानवता सबसे पहले की नीति पर कायम भारत
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा “मानवता सबसे पहले” के सिद्धांत को अपनाया है। यह सोच भारत की कई वैश्विक पहलों में साफ दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भारत के नेतृत्व में शुरू की गई कई अंतरराष्ट्रीय पहलें, जैसे इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन LiFE और “एक पेड़ मां के नाम” अभियान इसी भावना को आगे बढ़ाते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत सतत और समावेशी वैश्विक विकास को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
Shared my thoughts at the Outreach Session on ‘Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity’ at the G7 Summit in Evian. In a world that is getting more interconnected and interdependent than ever before, this subject becomes all the more vital. But,… pic.twitter.com/NjNddWGtFF
— Narendra Modi (@narendramodi) June 16, 2026
ट्रंप के साथ दिखी खास केमिस्ट्री
G-7 समिट की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात भी चर्चा का विषय रही। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और करीब 50 सेकेंड तक बातचीत की। इसके बाद दोनों नेता अगले सत्र के लिए एक साथ बैठे। उनकी यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि मोदी और ट्रंप की यह मुलाकात आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकती है।
कई वैश्विक नेता रहे मौजूद
G-7 के आउटरीच सेशन में दुनिया के कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। इनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर शामिल रहे। इस दौरान नई वैश्विक साझेदारियों, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा हुई।
क्या है G-7?
G-7 दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ भी इस समूह का हिस्सा है।
यह मंच वैश्विक अर्थव्यवस्था, वित्तीय स्थिरता, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे मुद्दों पर चर्चा और सहयोग के लिए जाना जाता है।
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