
Southern Zonal Council Meeting: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने आज गुरुवार के दिन तमिलनाडु महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक हुई। बता दें इस बैठक में दक्षिण भारत के राज्यों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है। जिसमें सबसे ज्यादा जोर परिसीमन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, NEET, कावेरी जल विवाद, वित्तीय हिस्सेदारी और दक्षिणी राज्यों के विकास से जुड़े विषयों पर रहा। वहीं बैठक में राज्यों ने केंद्र के सामने अपनी प्राथमिकताएं रखते हुए क्षेत्र के आर्थिक योगदान के अनुरूप राजनीतिक और वित्तीय हिस्सेदारी की मांग की है। आइए यहां पढ़ें खबर को लकर पूरी जानकारी
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की बड़ी चिंता
बैठक में परिसीमन यानी (Delimitation) सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों में से एक रहा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C. Joseph Vijay) ने दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, मानव विकास और आर्थिक प्रगति के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है। ऐसे में जनसंख्या के आधार पर भविष्य में लोकसभा सीटों का पुनर्वितरण होने से इन राज्यों की राजनीतिक आवाज कमजोर नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि परिसीमन के बाद किसी राज्य की संसद में मौजूदा हिस्सेदारी के प्रतिशत में कमी न आए। दक्षिणी राज्यों की चिंता यह है कि अगर लोकसभा सीटों का आवंटन मुख्य रूप से नई जनसंख्या के आधार पर किया गया तो अपेक्षाकृत अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं और दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व अनुपातिक रूप से घट सकता है।
NEET में छूट की मांग
तमिलनाडु ने बैठक में NEET परीक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री विजय ने राज्य को NEET से छूट देने की मांग दोहराई। उनका प्रस्ताव है कि राज्य कोटे के तहत MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में प्रवेश 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर किया जाए।
तमिलनाडु सरकार लंबे समय से NEET व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर करती रही है। राज्य का तर्क है कि एक समान प्रवेश परीक्षा का दबाव ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों पर ज्यादा पड़ता है। इसी वजह से राज्य चाहता है कि मेडिकल दाखिले में 12वीं के प्रदर्शन को ज्यादा महत्व दिया जाए।
कर्नाटक ने उठाया परिसीमन और टैक्स शेयर का मुद्दा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता सामने रखी। उन्होंने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से दक्षिण के संसदीय प्रतिनिधित्व की सुरक्षा के लिए औपचारिक प्रस्ताव पारित करने की मांग की। शिवकुमार ने 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने और मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के ढांचे को बरकरार रखने का सुझाव दिया।
कर्नाटक ने केंद्र से अपने टैक्स शेयर में बढ़ोतरी की मांग भी रखी। राज्य का कहना है कि दक्षिणी राज्यों का देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है, इसलिए वित्तीय संसाधनों के बंटवारे में भी राज्यों के योगदान और जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कावेरी विवाद पर मेकेदातु परियोजना की चर्चा
बैठक में कावेरी जल विवाद भी अहम मुद्दा रहा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस परियोजना से सिर्फ कर्नाटक ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों को भी लाभ हो सकता है।
शिवकुमार ने तमिलनाडु से परियोजना के लिए सहयोग की अपील की। कर्नाटक लंबे समय से मेकेदातु में जलाशय बनाने की मांग करता रहा है, जबकि तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध करता रहा है। ऐसे में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केरल ने मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा उठाया
केरल की ओर से मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा भी उठाया गया। राज्य ने नए बांध के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का प्रस्ताव रखा और इसके साथ तमिलनाडु को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही।
केरल ने स्वास्थ्य योजनाओं के वित्तपोषण और तटीय इलाकों में बढ़ते कटाव से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया। राज्य ने तटीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए उपलब्ध केंद्रीय फंड के बेहतर इस्तेमाल की मांग की।
नायडू ने रखा 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का विजन
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दक्षिणी राज्यों की आर्थिक क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र मिलकर बड़ी आर्थिक ताकत बन सकता है।
नायडू ने गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना, बेहतर रेल कनेक्टिविटी और दक्षिणी राज्यों के बीच साझा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की जरूरत बताई। उन्होंने अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले आधुनिक परिवहन नेटवर्क और बुलेट ट्रेन कॉरिडोर जैसे प्रस्तावों पर भी जोर दिया।
क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर
बैठक में सिर्फ राजनीतिक और जल विवादों पर ही चर्चा नहीं हुई। राज्यों ने तटीय सुरक्षा, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, आपदा प्रबंधन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और अंतरराज्यीय सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया। ऐसे में कुल मिलाकर दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में दक्षिणी राज्यों ने एक साझा संदेश दिया कि देश की अर्थव्यवस्था में उनके योगदान के अनुरूप उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व, वित्तीय संसाधन, बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय नीति निर्माण में पर्याप्त भूमिका मिलनी चाहिए। वहीं केंद्र के सामने कावेरी, NEET और परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राज्यों की चिंताएं भी स्पष्ट रूप से सामने आईं।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






