
Narendra Modi: भारतीय राजनीति में 10 जून 2026 का दिन एक ऐतिहासिक पड़ाव के रूप में दर्ज हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4,399 दिन तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देकर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही वह स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।
26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी अब अपने शासन के 12 साल पूरे कर चुके हैं। तीन लगातार लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर सत्ता में लौटने वाले मोदी भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं।
नेहरू का रिकॉर्ड कैसे टूटा?
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1952 के पहले आम चुनाव के बाद निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,398 दिनों तक देश का नेतृत्व किया था। 10 जून 2026 को नरेंद्र मोदी ने 4,399 दिन पूरे कर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यह रिकॉर्ड केवल चुनाव के बाद के कार्यकाल को ध्यान में रखकर गिना गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह उपलब्धि केवल लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि लगातार तीन आम चुनावों में जनता का समर्थन हासिल करने का भी प्रतीक है।
2014 में शुरू हुआ नया राजनीतिक अध्याय
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने। उस समय भ्रष्टाचार, आर्थिक सुस्ती और प्रशासनिक चुनौतियां प्रमुख चुनावी मुद्दे थे। प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही महीनों बाद अगस्त 2014 में उन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य बैंकिंग सुविधाओं से दूर लोगों को वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना था। करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) को बढ़ावा मिला।
जनधन से लेकर आयुष्मान भारत तक
मोदी सरकार के 12 वर्षों में कई बड़ी योजनाएं शुरू की गईं, जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ा। इनमें प्रधानमंत्री जनधन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं प्रमुख हैं। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ मिला है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत देशभर में शौचालय निर्माण को बढ़ावा मिला, जबकि उज्ज्वला योजना के जरिए गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए।
आर्थिक सुधारों की बड़ी पहल
मोदी सरकार के कार्यकाल में कई बड़े आर्थिक फैसले भी लिए गए। इनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST) का लागू होना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। GST ने देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एकीकृत करने का प्रयास किया। हालांकि इसके शुरुआती वर्षों में व्यापारियों और उद्योगों को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। इसके अलावा “मेक इन इंडिया”, “डिजिटल इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों के जरिए उत्पादन, तकनीक और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की कोशिश की गई।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
पिछले 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति भी लगातार चर्चा में रही है। G20 की अध्यक्षता, क्वाड जैसे मंचों में सक्रिय भूमिका, वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज उठाना और कई देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मोदी की लोकप्रियता और भारत की भूमिका में वृद्धि का दावा किया जाता रहा है।
आलोचनाएं भी कम नहीं रहीं
जहां समर्थक मोदी सरकार की उपलब्धियों को ऐतिहासिक बताते हैं, वहीं विपक्ष कई मुद्दों पर सवाल उठाता रहा है। बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट, सामाजिक ध्रुवीकरण, आर्थिक असमानता और संस्थागत स्वतंत्रता जैसे विषयों पर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है। विपक्ष का कहना है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ रोजगार सृजन और सामाजिक संतुलन पर भी उतना ही ध्यान देने की जरूरत है।
तीसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती
2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार अब अपने तीसरे कार्यकाल में है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। इनमें रोजगार सृजन, आर्थिक विकास की गति बनाए रखना, विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना, कृषि सुधार और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटना शामिल है। इसके अलावा 2047 तक विकसित भारत (Viksit Bharat) का लक्ष्य भी सरकार के सामने एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
राजनीतिक रूप से क्यों अहम है यह रिकॉर्ड?
भारतीय राजनीति में लंबे समय तक सत्ता में बने रहना आसान नहीं माना जाता। क्षेत्रीय दलों के बढ़ते प्रभाव, गठबंधन राजनीति और बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच लगातार तीन बार जनादेश हासिल करना अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसी वजह से मोदी का यह रिकॉर्ड केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के बदलते स्वरूप की कहानी भी माना जा रहा है।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रिकॉर्ड बनाना जितना महत्वपूर्ण है, उसे बनाए रखना उससे भी ज्यादा कठिन होता है। मोदी सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी उपलब्धियों को जमीन पर और प्रभावी तरीके से लागू करने तथा जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की होगी। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि यह रिकॉर्ड केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि बनकर रह जाएगा या फिर भारत के विकास की नई दिशा तय करने वाला पड़ाव साबित होगा।
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