Skip to main content Scroll Top
Kolkata News: ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका, सुष्मिता देव ने राज्यसभा और TMC से दिया इस्तीफा
Current image: TMC राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा

Kolkata News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे की खबर सामने आई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सुष्मिता देव जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सुष्मिता देव ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद उनके इस्तीफे की चर्चा और तेज हो गई। अगर यह राजनीतिक बदलाव सच साबित होता है, तो यह ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।

TMC के लिए मुश्किल दौर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ समय से तृणमूल कांग्रेस लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर असंतोष और नेताओं के इस्तीफों की खबरें चर्चा में हैं। ऐसे में सुष्मिता देव जैसी वरिष्ठ नेता का पार्टी छोड़ना संगठन के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का चेहरा मानी जाने वाली सुष्मिता देव की विदाई TMC की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर असर डाल सकती है।

एक सप्ताह में दूसरा बड़ा झटका

सुष्मिता देव के इस्तीफे की चर्चा ऐसे समय सामने आई है, जब हाल ही में TMC के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे की खबर भी सुर्खियों में रही थी। राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने पद से इस्तीफा दिया था और इसे स्वीकार भी कर लिया गया था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक सप्ताह के भीतर दो प्रमुख नेताओं का पार्टी से दूर होना TMC के लिए गंभीर संकेत हो सकता है।

कौन हैं सुष्मिता देव?

सुष्मिता देव पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे स्वर्गीय संतोष मोहन देव की बेटी हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा कांग्रेस से शुरू की थी। असम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र से वह कांग्रेस सांसद भी रह चुकी हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर 2021 में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। TMC में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। बाद में उन्हें राज्यसभा भी भेजा गया।

ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में थीं शामिल

सुष्मिता देव को ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता था। वह राष्ट्रीय मीडिया में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखती थीं और पूर्वोत्तर भारत में TMC के विस्तार की रणनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाती थीं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उनकी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं।

बीजेपी में जाने की अटकलें क्यों?

हाल के दिनों में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और सुष्मिता देव की मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा पूर्वोत्तर भारत में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं को साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में सुष्मिता देव का नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि अभी तक न तो भाजपा और न ही सुष्मिता देव की ओर से किसी संभावित राजनीतिक कदम पर आधिकारिक बयान आया है।

बीजेपी का TMC पर हमला

इस बीच भाजपा नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस की स्थिति को लेकर लगातार हमले तेज कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर विचारों की स्वतंत्रता नहीं है और कई नेता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। भाजपा का दावा है कि राज्य में राजनीतिक परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है।

TMC की क्या है प्रतिक्रिया?

तृणमूल कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन मजबूत है और कुछ नेताओं के जाने से पार्टी की विचारधारा या जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि अगर पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार इस्तीफा दे रहे हैं, तो इसके पीछे क्या कारण हैं।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी सरगर्मी

पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले से ही काफी गर्म है। राज्य में हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने माहौल को और दिलचस्प बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुष्मिता देव वास्तव में भाजपा में शामिल होती हैं, तो इसका असर केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूर्वोत्तर भारत की राजनीति में भी देखने को मिल सकता है।

Read Related News: NTA मुख्यालय पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, परीक्षा व्यवस्था पर हुई बड़ी समीक्षा

Author

  • Sakshi Raj

    A passionate Content Writer with hand on experience in creating a SEO Friendly content. Turning a Complex topics into Simple articles that connect with readers.

Related Posts

लेटेस्ट ➤

Advertising Banner
305x250