
Anitha Radhakrishnan On Vijay Government: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर से बयानबाजी तेज हो गई है। जिसमें द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) की वरिष्ठ नेता और तिरुचेंदूर से विधायक Anita Radhakrishnan ने मुख्यमंत्री Joseph Vijay और उनकी TVK गठबंधन सरकार पर बड़ा हमला बोला है। साथ ही, उन्होंने दावा किया है कि मौजूदा सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी और अगले छह महीने के भीतर गिर सकती है। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि DMK प्रमुख M. K. Stalin फिर से तमिलनाडु की सत्ता में वापसी करेंगे।
DMK नेता का बड़ा दावा
बता दें की, दक्षिण तमिलनाडु में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनीता राधाकृष्णन ने कहा कि TVK सरकार सिर्फ कुछ महीनों की मेहमान है। जिसमें उन्होंने कहा है कि राज्य की जनता जल्द ही इस सरकार से निराश हो जाएगी और फिर से DMK की ओर लौटेगी। उन्होंने कहा कि “चार से छह महीने के अंदर हमारे नेता एमके स्टालिन दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे।” उनके इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
आधव अर्जुन को दी खुली चुनौती
अनीता राधाकृष्णन ने सत्ताधारी पार्टी के नेता Aadhav Arjuna पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने उन्हें खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे अपनी विधायक सीट से इस्तीफा दें और तिरुचेंदूर में आमने-सामने चुनाव लड़ें। DMK विधायक ने कहा कि तिरुचेंदूर उनका मजबूत गढ़ है और वहां किसी भी विरोधी को हराने की ताकत DMK के पास है। उन्होंने दावा किया कि जनता आज भी DMK और स्टालिन के साथ खड़ी है।
शपथ ग्रहण समारोह को लेकर उठाए सवाल
अनीता राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आखिर विजय की पत्नी और बच्चे समारोह में क्यों मौजूद नहीं थे, जबकि उनके माता-पिता वहां पहुंचे थे। उन्होंने इस मुद्दे को महिलाओं की सुरक्षा के वादे से जोड़ते हुए TVK सरकार पर तंज कसा। DMK नेता ने कहा कि जो नेता अपने परिवार को साथ नहीं ला सके, वे राज्य की महिलाओं की सुरक्षा का वादा कैसे पूरा करेंगे। हालांकि TVK की ओर से इन आरोपों और सवालों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तिरुचेंदूर में मजबूत पकड़
तिरुचेंदूर विधानसभा सीट को अनीता राधाकृष्णन का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। उन्होंने पहली बार साल 2001 में AIADMK के टिकट पर चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने DMK का दामन थाम लिया और 2009 में भी इस सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखी।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि दक्षिण तमिलनाडु में अनीता राधाकृष्णन का प्रभाव काफी मजबूत है और वे DMK के पुराने भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाती हैं।
स्टालिन के समर्थन में उतरीं अनीता
DMK विधायक ने एमके स्टालिन का जोरदार बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कोलाथुर क्षेत्र का तेजी से विकास किया था। अनीता राधाकृष्णन ने दावा किया कि स्टालिन ने कोलाथुर को “सिंगापुर जैसा” बना दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि DMK चाहती है कि स्टालिन भविष्य में त्रिची से चुनाव लड़ें। इस दौरान उन्होंने कोलाथुर के मतदाताओं की आलोचना भी की और कहा कि वहां के लोगों ने सही फैसला नहीं लिया। उनके बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।
तमिलनाडु चुनाव में TVK की ऐतिहासिक जीत
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam ने बेहद चौंकाने वाला प्रदर्शन किया था। 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव कर दिया। यह जीत इसलिए भी खास मानी गई क्योंकि तमिलनाडु में दशकों से DMK और AIADMK के बीच सत्ता बदलती रही थी। लेकिन इस बार विजय की पार्टी ने दोनों बड़े दलों को कड़ी चुनौती देते हुए सत्ता हासिल कर ली। बाद में कांग्रेस, वामपंथी दलों और Viduthalai Chiruthaigal Katchi के समर्थन से TVK ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। इसके बाद विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और विधानसभा में विश्वास मत भी आसानी से जीत लिया।
बढ़ती जा रही राजनीतिक तल्खी
चुनाव नतीजों के बाद तमिलनाडु की राजनीति में सत्ताधारी TVK और विपक्षी DMK के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। DMK नेताओं का दावा है कि TVK सरकार अनुभवहीन है और ज्यादा समय तक नहीं चल पाएगी। वहीं TVK नेताओं का कहना है कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और उनकी सरकार पूरे पांच साल काम करेगी।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले महीनों में तमिलनाडु की राजनीति और ज्यादा गरमा सकती है।
क्या सच में खतरे में है विजय सरकार?
अब ऐसे में फिलहाल TVK गठबंधन सरकार के पास बहुमत मौजूद है और विधानसभा में उसने विश्वास मत भी जीत लिया है। ऐसे में सरकार के तुरंत गिरने की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक का कहना है कि अगर गठबंधन के सहयोगी दलों में असंतोष बढ़ता है तो भविष्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। लेकिन फिलहाल मुख्यमंत्री विजय की सरकार मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।
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