
Assam Assembly Polls: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए चुनाव आयोग ने सोमवार को घोषणा की कि आज शाम 5 बजे से *साइलेंस पीरियड शुरू हो जाएगा। दरअसल यह पोलिंग के 48 घंटे पहले लागू होगी और इसके दौरान सभी प्रकार के चुनावी प्रचार पर पूरी तरह रोक रहेगी। इस दौरान जनसभाएँ, रैलियाँ, जुलूस और अन्य प्रचार गतिविधियाँ नहीं की जा सकेंगी। सामाजिक और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर चुनाव से जुड़ी सामग्री साझा करना भी प्रतिबंधित होगा। बुल्क SMS, कॉल और ऑनलाइन प्रचार पर भी रोक रहेगी। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें। इस कदम का उद्देश्य है कि मतदाता निर्णय स्वतंत्र रूप से सोच-समझकर ले सकें और चुनाव निष्पक्ष रूप से संपन्न हो।
साइलेंस पीरियड में क्या है प्रतिबंध
चुनाव आयोग ने Representation of the People Act, 1951 की धारा 126 के तहत स्पष्ट किया है कि इस अवधि में कोई भी जनसभाएँ, रैलियाँ, जुलूस या अन्य प्रचार गतिविधियाँ आयोजित नहीं की जा सकती हैं। इसके अलावा, सामाजिक और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी चुनाव से संबंधित सामग्री साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। खास तौर से, इस दौरान बुल्क SMS, कॉल्स और ऑनलाइन प्रचार पर रोक रहेगी। आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि अन्य निर्वाचन क्षेत्रों से लाए गए राजनीतिक नेता और पार्टी कार्यकर्ता, जो वहां के पंजीकृत मतदाता नहीं हैं, उन्हें प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद तुरंत लौट जाना होगा।
प्रशासन और पुलिस को सख्त निर्देश
चुनाव आयोग ने सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों को सख्त आदेश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि यह निर्वाचन प्रक्रिया निष्पक्ष और स्वतंत्र बनी रहे। यदि कोई भी उल्लंघन होता है, तो संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 126(1)(b) के तहत टीवी और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर चुनाव संबंधित सामग्री, जैसे ओपिनियन पोल और सर्वेक्षण परिणाम, साइलेंस पीरियड के दौरान प्रसारित नहीं किए जा सकते। असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने सभी पक्षों से अपील की कि वे निर्देशों का पालन करें, ताकि चुनाव साफ-सुथरे और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके।
भाजपा और एनडीए का रुख
जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “असम में भाजपा और एनडीए के पक्ष में माहौल है। सभी वर्गों से एनडीए को समर्थन मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा असम में किए गए कार्यों और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा द्वारा उनके कार्यान्वयन को लोग सराह रहे हैं। यह लोगों द्वारा स्वागत योग्य है। जेपी नड्डा के इस बयान से साफ है कि भाजपा और एनडीए असम में अपना प्रचार पूरी ताकत से कर चुके हैं, और अब मतदान से पहले शांतिपूर्ण साइलेंस पीरियड शुरू हो गया है।
असम में मतदान और मतगणना की तारीखें
असम में पोलिंग एक ही चरण में 9 अप्रैल को संपन्न होगी। इसके बाद मतगणना 4 मई को की जाएगी। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि संपूर्ण प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित हो।
अन्य राज्यों में भी साइलेंस पीरियड
केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. रतन यू. केलकर ने भी सोमवार को घोषणा की राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार शाम 6 बजे तक ही किया जा सकता है। इसके बाद 48 घंटे की साइलेंस पीरियड लागू होगी। इस अवधि में सभी प्रकार के प्रचार और राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को चेतावनी दी है कि उल्लंघन की स्थिति में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
साइलेंस पीरियड का महत्व
चुनाव आयोग द्वारा घोषित साइलेंस पीरियड का मुख्य उद्देश्य है कि मतदाता बिना किसी बाहरी दबाव या प्रचार के स्वतंत्र रूप से मतदान कर सके। यह अवधि मतदाताओं को सोच-समझकर निर्णय लेने का समय देती है। जिसमें विशेषकर सामाजिक और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रचार और विज्ञापनों की रोक, मतदाता को निष्पक्ष जानकारी तक सीमित करती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि मतदाता चुनाव में अपने विवेक का इस्तेमाल कर सकें।
मतदाताओं के लिए दिशा-निर्देश
- इस अवधि में किसी भी राजनीतिक बैठक या रैली में भाग न लें।
- सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक चैनलों पर चुनाव संबंधी सामग्री साझा न करें।
- बाहर से आए नेताओं या कार्यकर्ताओं के संपर्क में आने से बचें, जो वहां के पंजीकृत मतदाता नहीं हैं।
- किसी भी प्रकार के प्रचार या मतदान को प्रभावित करने वाले कार्यों की सूचना तुरंत पुलिस या चुनाव आयोग को दें।
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