
Taslima Nasrin Kolkata Return: बांग्लादेश की प्रसिद्ध और निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब 19 साल बाद एक बार फिर से कोलकाता पहुंच गई हैं। बता दें की आज शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही उन्होंने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया और अपनी खुशी जाहिर की। जिसके बाद उन्होंने कहा कि कोलकाता लौटना उनके लिए किसी “घर वापसी” से कम नहीं है। ऐसे में लंबे समय बाद इस शहर में लौटने पर उन्होंने इसे बेहद भावुक पल बताया।
जानकारी के लिए बता दें तस्लीमा नसरीन कल शनिवार (1 अगस्त) को कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित एक सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। जिसमें यह कार्यक्रम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और कट्टरपंथ के विरोध के संदेश के साथ आयोजित किया जा रहा है।
19 साल बाद लौटीं अपने पसंदीदा शहर
तस्लीमा नसरीन ने बताया कि कोलकाता हमेशा उनके दिल के सबसे करीब रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि बांग्लादेश छोड़ने के बाद उन्होंने इस शहर को अपना दूसरा घर माना था। यहां के लोगों का प्यार, साहित्यिक माहौल और संस्कृति उन्हें हमेशा अपनी ओर खींचती रही।
एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इतने सालों बाद फिर से कोलकाता आना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। साथ ही इस शहर से उनका रिश्ता केवल एक लेखक का नहीं, बल्कि भावनाओं का भी है।
रवींद्र सदन में होगा खास कार्यक्रम
तस्लीमा नसरीन कल शनिवार शाम को ‘सेक्युलर मिशन ट्रस्ट’ द्वारा आयोजित एक विशेष सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में बढ़ते धार्मिक कट्टरपंथ का विरोध करना और अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करना है।
कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा कई प्रमुख लेखक, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी इसमें भाग लेने वाले हैं। राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत की कई चर्चित हस्तियों के शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है।
2007 में क्यों छोड़ना पड़ा था कोलकाता?
तस्लीमा नसरीन को वर्ष 2007 में अचानक कोलकाता छोड़ना पड़ा था। उनकी आत्मकथात्मक पुस्तक ‘द्विखंडितो’ को लेकर कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। आरोप लगाया गया कि पुस्तक में लिखी कुछ बातें धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं।
विरोध इतना बढ़ गया कि कोलकाता में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने लगी है। ऐसे में हालात को संभालने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी और सेना की मदद भी ली गई। इसके बाद तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए तस्लीमा नसरीन को शहर छोड़ने की सलाह दी। उन्हें पहले जयपुर भेजा गया और बाद में दिल्ली में रहने की व्यवस्था की गई। तब से वह भारत में लंबे समय के निवास परमिट (Long-Term Residence Permit) के तहत रह रही हैं।
‘मैंने कभी अपनी मर्जी से कोलकाता नहीं छोड़ा’
कोलकाता रवाना होने से पहले तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से यह शहर कभी नहीं छोड़ा था। जिसमें उन्होंने दावा किया कि परिस्थितियों और तत्कालीन सरकार के फैसलों की वजह से उन्हें यहां से जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि 1994 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद कोलकाता ही वह शहर था, जहां उन्हें अपनापन महसूस हुआ। यहां के पाठकों और साहित्य प्रेमियों ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया। इसलिए इतने वर्षों बाद यहां लौटना उनके लिए बेहद भावुक पल है।
बांग्लादेश छोड़ने की वजह क्या थी?
तस्लीमा नसरीन को वर्ष 1994 में अपने देश बांग्लादेश से भी निकलना पड़ा था। उनकी किताब ‘लज्जा’ और अन्य लेखन को लेकर कट्टरपंथी संगठनों ने विरोध किया था। उनके खिलाफ फतवे जारी किए गए और जान से मारने की धमकियां भी मिलीं। इसके बाद उन्होंने देश छोड़ दिया और यूरोप समेत कई देशों में रहीं। बाद में भारत आईं और लंबे समय तक कोलकाता में रहीं। हालांकि 2007 की घटनाओं के बाद उन्हें दिल्ली जाना पड़ा।
साहित्य और अभिव्यक्ति की आजादी की रही मजबूत आवाज
तस्लीमा नसरीन को दक्षिण एशिया की उन लेखिकाओं में गिना जाता है जिन्होंने महिलाओं के अधिकार, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर खुलकर लिखा है। उनकी कई किताबें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रही हैं। हालांकि उनके लेखन को लेकर कई बार विवाद भी हुए, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने विचार खुलकर रखने की बात कही।
कोलकाता वापसी क्यों है खास?
दरअसल तस्लीमा नसरीन की यह यात्रा केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं मानी जा रही है। यह उनके और कोलकाता के बीच पुराने रिश्ते के फिर से जुड़ने का प्रतीक भी मानी जा रही है।
करीब 19 साल बाद उनकी वापसी ने साहित्य प्रेमियों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया पर भी उनके स्वागत को लेकर कई प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि कोलकाता हमेशा से विचारों की स्वतंत्रता और साहित्यिक संस्कृति का केंद्र रहा है, इसलिए तस्लीमा नसरीन की वापसी का विशेष महत्व है।
अब क्या आगे भी कोलकाता आती रहेंगी?
बता दें फिलहाल तस्लीमा नसरीन इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कोलकाता पहुंची हैं। जिसमें उन्होंने भविष्य में भी शहर आने की इच्छा जताई है। हालांकि उन्होंने स्थायी रूप से यहां रहने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि कोलकाता उनके दिल के बेहद करीब है और यहां के लोगों का स्नेह उन्हें हमेशा वापस खींच लाता है।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






