
Supreme Court: कक्षा 8 की NCERT सोशल साइंस की नई किताब में शामिल ‘Judicial Corruption’ चैप्टर को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत सख्त रुख अपनाती नजर आ रही है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर सुनवाई करने का फैसला किया है, जो गुरुवार को होगी. मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत की अगुवाई में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच इस मामले पर विचार करेगी.
बुधवार को इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की किसी को इजाजत नहीं दी जा सकती.उनके इस बयान के बाद शिक्षा जगत से लेकर राजनीतिक और न्यायिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. सवाल यह उठ रहा है कि बच्चों की किताबों में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ जैसे संवेदनशील विषय को किस तरह और किस संदर्भ में पेश किया जाना चाहिए.
विवादित चैप्टर क्या है और किताब में क्या लिखा है?
NCERT की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक का नाम है ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉंड पार्ट 2’, जिसे 23 फरवरी को जारी किया गया. इस किताब में ‘द रोल ऑफ द ज्यूडिशियरी इन अवर सोसायटी’ विषय के अंतर्गत ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ नाम का एक हिस्सा जोड़ा गया है.
इस चैप्टर में बताया गया है कि न्यायपालिका के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं, मामलों का लंबित रहना और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप. हालांकि किताब में न्यायपालिका की भूमिका, उसकी स्वतंत्रता और लोकतंत्र में उसके महत्व को भी समझाया गया है, लेकिन ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.आलोचकों का कहना है कि इस तरह का विषय बच्चों के मन में न्यायपालिका के प्रति नकारात्मक धारणा बना सकता है.
CJI का कड़ा रुख “न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं”
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मामले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ है और इसे बदनाम करने वाली किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.उन्होंने संकेत दिए कि बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में इस तरह के विषयों को बहुत संतुलित और जिम्मेदार तरीके से पेश किया जाना चाहिए. हालाँकि, कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की यह चिंता इस बात को लेकर है कि पाठ्यपुस्तकों के जरिए समाज में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास का माहौल न बने.अदालत इस बात की भी समीक्षा कर सकती है कि क्या NCERT ने इस चैप्टर को शामिल करते समय पर्याप्त सावधानी बरती थी या नहीं.
सरकार की आपत्ति, “तीनों अंगों का संदर्भ होना चाहिए था”
सरकारी सूत्रों ने NCERT पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भले ही NCERT एक ऑटोनॉमस संस्था है, लेकिन पाठ्यपुस्तकों में बदलाव करते समय उसे ज्यादा जिम्मेदारी दिखानी चाहिए थी. सरकार का कहना है कि अगर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया गया है, तो उसे शासन के तीनों अंगों यानि कार्यपालिका (Executive), विधायिका (Legislature) और न्यायपालिका (Judiciary) के संदर्भ में समान रूप से पेश किया जाना चाहिए था. केवल न्यायपालिका को उदाहरण के तौर पर दिखाना संतुलित दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता.
सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आंकड़े संसदीय अभिलेखों और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड में उपलब्ध हैं, लेकिन फैक्ट्स के क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिए केंद्र सरकार से परामर्श नहीं लिया गया.
NCERT की चुप्पी, अधिकारी बोले- मामला कोर्ट में है
इस पूरे विवाद पर NCERT के चेयरमैन दिनेश प्रसाद सकलानी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. काउंसिल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा. हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि NCERT को जल्द ही यह स्पष्ट करना होगा कि इस चैप्टर को किस शैक्षणिक उद्देश्य से शामिल किया गया और इसे तैयार करते समय किन विशेषज्ञों से सलाह ली गई थी.
इस विवाद के केंद्र में एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या कक्षा 8 के छात्रों के लिए ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ जैसा विषय उचित है? कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि बच्चों को लोकतंत्र के सभी पहलुओं के बारे में सच बताना जरूरी है, ताकि वे आलोचनात्मक सोच विकसित कर सकें.वहीं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील विषयों को बहुत संतुलित भाषा और संदर्भ के साथ पेश करना चाहिए, ताकि बच्चों में किसी संस्था के प्रति अविश्वास न पैदा हो.
वहीं, एक शिक्षा मनोवैज्ञानिक के अनुसार, “बच्चे किताब में लिखी बातों को सच मान लेते हैं, अगर किसी संस्था को सिर्फ नकारात्मक संदर्भ में दिखाया जाए, तो उनके मन में उसके प्रति गलत धारणा बन सकती है.”
कोर्ट की सुनवाई में क्या मुद्दे उठ सकते हैं?
गुरुवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इन बिंदुओं पर विचार कर सकता है:
- क्या NCERT ने इस चैप्टर को शामिल करते समय संतुलित दृष्टिकोण अपनाया?
- क्या न्यायपालिका पर ‘करप्शन’ का संदर्भ बच्चों के पाठ्यक्रम में उचित है?
- क्या पाठ्यपुस्तक में दिए गए तथ्यों का पर्याप्त सत्यापन हुआ है?
- क्या इस तरह के विषय को शासन के तीनों अंगों के संदर्भ में समान रूप से दिखाया जाना चाहिए था?
कोर्ट यह भी तय कर सकता है कि चैप्टर में बदलाव की जरूरत है या नहीं, या फिर NCERT को भविष्य में इस तरह के विषयों पर दिशानिर्देशों का पालन करने को कहा जाए.
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