
PM Modi AirTrunk Meeting: भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था लगातार तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी बीच आज शुक्रवार को देश के टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बताया जा रहा है की ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख डेटा सेंटर कंपनी AirTrunk ने भारत में 3 लाख करोड़ रुपये के विशाल निवेश की घोषणा की है। यह घोषणा कंपनी के संस्थापक और सीईओ रॉबिन खुदा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद की गई।
मिली जानकारी के अनुसार, यह निवेश भारत के डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक माना जा रहा है। इससे देश में क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पीएम मोदी ने जताई खुशी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस निवेश का स्वागत करते हुए कहा कि भारत दुनिया का तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार है। उन्होंने कहा कि ऐसे निवेश देश को क्लाउड कंप्यूटिंग और AI के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे। साथ ही इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सरकार का कहना है कि आने वाले सालों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा और इस दिशा में AirTrunk का निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कौन हैं रॉबिन खुदा?
आपकी जानकारी के लिए बता दें की AirTrunk के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रॉबिन खुदा मूल रूप से बांग्लादेश से हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के दम पर वैश्विक टेक्नोलॉजी उद्योग में एक अलग पहचान बनाई है।
रॉबिन खुदा का जन्म बांग्लादेश में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा वहीं हुई, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए वे ऑस्ट्रेलिया चले गए। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी (UTS) से बिजनेस की पढ़ाई की और बाद में टेक्नोलॉजी और फाइनेंस सेक्टर में विशेषज्ञता हासिल की है। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने Fujitsu में वरिष्ठ पदों पर काम किया। इसके बाद वे PIPE Networks में मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) बने। बाद में उन्होंने डेटा सेंटर कंपनी NEXTDC के विकास में भी अहम भूमिका निभाई।
2015 में शुरू की AirTrunk
रॉबिन खुदा ने वर्ष 2015 में AirTrunk की स्थापना की थी। जिसमें उनका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बड़े और आधुनिक डेटा सेंटर विकसित करना था, जो दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों की बढ़ती डेटा जरूरतों को पूरा कर सकें।
महज दस वर्षों के भीतर AirTrunk एशिया की प्रमुख डेटा सेंटर कंपनियों में शामिल हो चुकी है। कंपनी के डेटा सेंटर ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, जापान, हांगकांग और अन्य देशों में मौजूद हैं। आज AirTrunk दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को डेटा स्टोरेज और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाएं प्रदान करती है।
भारत में कहां होंगे डेटा सेंटर?
कंपनी की योजना भारत के प्रमुख महानगरों और टेक्नोलॉजी हब में अत्याधुनिक हाइपरस्केल डेटा सेंटर स्थापित करने की है।
इन शहरों में शामिल हैं:
- मुंबई
- चेन्नई
- हैदराबाद
- दिल्ली-एनसीआर
3 लाख करोड़ रुपये के निवेश का क्या मतलब?
भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा 5G नेटवर्क का विस्तार, AI तकनीक का तेजी से उपयोग और क्लाउड सेवाओं की मांग में वृद्धि के कारण डेटा स्टोरेज की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में AirTrunk का निवेश देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाएगा। इससे भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को बेहतर डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवाएं मिल सकेंगी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह निवेश भारत को एशिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर बाजारों में शामिल करने में मदद करेगा।
रोजगार के हजारों अवसर बनेंगे
AirTrunk की इस परियोजना से देश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार पैदा होने की संभावना है।
इन क्षेत्रों में नौकरियों के अवसर बढ़ सकते हैं:
- डेटा सेंटर संचालन
- इंजीनियरिंग
- साइबर सिक्योरिटी
- नेटवर्क प्रबंधन
- क्लाउड कंप्यूटिंग
- निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर
- AI और मशीन लर्निंग
ग्रीन एनर्जी पर रहेगा फोकस
AirTrunk अपनी पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के लिए भी जानी जाती है। जिससे कंपनी अपने डेटा सेंटरों को अधिकतम स्तर तक नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) से संचालित करने का प्रयास करती है।
भारत में बनने वाले नए डेटा सेंटर भी ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी और भारत के ग्रीन एनर्जी लक्ष्यों को भी समर्थन मिलेगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह निवेश?
भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार बन रहा है। सरकारी डिजिटल पहल, AI आधारित सेवाओं का विस्तार और डेटा उपयोग में बढ़ोतरी के चलते आधुनिक डेटा सेंटर की मांग लगातार बढ़ रही है।
AirTrunk का 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश न केवल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा बल्कि विदेशी निवेशकों का भारत पर बढ़ता भरोसा भी दिखाता है। यह निवेश आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक डेटा सेंटर और क्लाउड टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
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