
PM Modi Surat Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जून यानि कल गुजरात के सूरत स्थित लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के हजीरा प्लांट का दौरा करेंगे। बताया जा रहा है की देश के रक्षा क्षेत्र में तेजी से बढ़ती आत्मनिर्भरता के बीच प्रधानमंत्री का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिसमें हजीरा प्लांट न केवल भारत के सबसे बड़े रक्षा उत्पादन केंद्रों में शामिल है, बल्कि यहां तैयार होने वाले कई आधुनिक हथियार और सैन्य वाहन भारतीय सेना की ताकत बढ़ा रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2019 में भी इस प्लांट का दौरा कर चुके हैं। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी 2020 में यहां पहुंचकर रक्षा उत्पादन गतिविधियों का जायजा लिया था। ऐसे में प्रधानमंत्री का दोबारा यहां पहुंचना इस प्लांट की रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है हजीरा प्लांट?
गुजरात के सूरत में स्थित L&T का हजीरा प्लांट देश में ट्रैक्ड आर्मर्ड वाहनों और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण का प्रमुख केंद्र है। जिसमें यह प्लांट अत्याधुनिक तकनीक और उच्च स्तरीय विनिर्माण क्षमताओं के लिए जाना जाता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह भारत का सबसे बड़ा निजी रक्षा उत्पादन केंद्रों में से एक है, जहां सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। यहां तैयार होने वाले उपकरण भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
K-9 वज्र ने बढ़ाई भारतीय सेना की ताकत
हजीरा प्लांट की सबसे बड़ी उपलब्धियों में K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर तोप शामिल है। यह दक्षिण कोरिया की K-9 थंडर तकनीक पर आधारित भारतीय संस्करण है, जिसे भारतीय सेना की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया गया है। दरअसल यह देश की पहली ट्रैक्ड मीडियम आर्टिलरी गन मानी जाती है। अब तक भारतीय सेना को 100 K-9 वज्र तोपें सौंपी जा चुकी हैं। इनकी तैनाती पूर्वी लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में की गई है। भारत सरकार ने हाल ही में 100 अतिरिक्त K-9 वज्र तोपों की खरीद को भी मंजूरी दी है। इनका निर्माण भी हजीरा प्लांट में ही किया जाएगा। इससे न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी बल्कि घरेलू रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।
जोरावर लाइट टैंक बना आकर्षण का केंद्र
जानकारी के लिए बता दें की हाल के वर्षों में हजीरा प्लांट उस समय चर्चा में आया जब यहां से ‘जोरावर’ लाइट टैंक का पहला प्रोटोटाइप रोल आउट किया गया। यह परियोजना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। जिसमें सबसे खास बात यह रही कि इस टैंक को केवल 19 महीनों के रिकॉर्ड समय में डिजाइन और विकसित किया गया। सामान्य तौर पर ऐसी परियोजनाओं को पूरा होने में कई वर्ष लग जाते हैं।
जोरावर टैंक विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के लिए तैयार किया गया है। इसका हल्का वजन और आधुनिक तकनीक इसे लद्दाख जैसे क्षेत्रों में बेहद उपयोगी बनाती है। फिलहाल यह विभिन्न परीक्षणों से गुजर रहा है और भविष्य में भारतीय सेना का अहम हिस्सा बन सकता है।
FICV परियोजना में भी मजबूत दावेदारी
L&T का हजीरा प्लांट भारतीय सेना की महत्वाकांक्षी Futuristic Infantry Combat Vehicle (FICV) परियोजना में भी प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य सेना में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे सोवियत मूल के BMP-2 इन्फैंट्री फाइटिंग व्हीकल्स को बदलना है। नई पीढ़ी के लड़ाकू वाहनों के जरिए सेना की गतिशीलता और युद्ध क्षमता को आधुनिक बनाया जाएगा। वहीं, वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान L&T ने अपने FICV प्रोटोटाइप भी प्रदर्शित किए थे। इस परियोजना में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, महिंद्रा डिफेंस, भारत फोर्ज और आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड जैसी कंपनियां भी प्रतिस्पर्धा में शामिल हैं।
रक्षा आत्मनिर्भरता का मजबूत केंद्र
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता दी है। सरकार का लक्ष्य विदेशों से हथियार आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देना है। हजीरा प्लांट इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां बनने वाले सैन्य उपकरणों में स्थानीय तकनीक, भारतीय इंजीनियरिंग और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
रक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह प्लांट भारत के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा विनिर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का क्या महत्व?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हजीरा प्लांट दौरा केवल एक औद्योगिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि यह देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र के लिए एक बड़ा संदेश भी है।
बता दें की यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत रक्षा निर्यात बढ़ाने और वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी से रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा यह दौरा रक्षा उत्पादन से जुड़े हजारों इंजीनियरों, तकनीशियनों और कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है।
भारत के रक्षा क्षेत्र का भविष्य
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक से रक्षा उत्पादन और निर्यात करने वाले देशों की श्रेणी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की नीतियों, निजी क्षेत्र की भागीदारी और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है। हजीरा प्लांट जैसे अत्याधुनिक रक्षा उत्पादन केंद्र भारत को भविष्य में रक्षा क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बना सकते हैं। K-9 वज्र, जोरावर लाइट टैंक और FICV जैसी परियोजनाएं इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा न केवल हजीरा प्लांट के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और सैन्य आधुनिकीकरण के संकल्प को भी मजबूत करेगा।






