
Ram Mandir Daan Chori: अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और जमीन खरीद मामले में जांच तेज होती दिखाई दे रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह गुरुवार को विशेष जांच दल (SIT) के प्रमुख और लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के सामने पेश हुए। इस दौरान उन्होंने जमीन खरीद और मंदिर से जुड़े चढ़ावे में कथित अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज जांच टीम को सौंपने का दावा किया। संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने लंबे समय से जिन मामलों को सार्वजनिक मंचों पर उठाया था, उनसे जुड़े दस्तावेज अब SIT को उपलब्ध करा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में मंदिर के आसपास जमीन खरीद के कुछ सौदों में बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर खरीदारी की गई। हालांकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हीं दावों की जांच SIT कर रही है।
SIT के सामने पेश होकर सौंपे दस्तावेज
संजय सिंह निर्धारित समय पर लखनऊ स्थित कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने SIT प्रमुख विजय विश्वास पंत से मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को जमीन खरीद, दान राशि और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब जांच एजेंसी पर जिम्मेदारी है कि वह इन दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच करे और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
क्या हैं संजय सिंह के आरोप?
AAP सांसद ने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर के आसपास कुछ जमीनों की खरीद वास्तविक कीमत से काफी अधिक मूल्य पर की गई। उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में लगभग चार करोड़ रुपये मूल्य की जमीन बाद में आठ करोड़ रुपये में खरीदी गई। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अन्य संपत्तियों को भी वास्तविक बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर ट्रस्ट के लिए खरीदा गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इन्हीं दावों की जांच कर रही हैं। संबंधित पक्षों ने पहले भी ऐसे आरोपों से इनकार किया है।
चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का भी मुद्दा
संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने केवल जमीन खरीद ही नहीं बल्कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज भी SIT को सौंपे हैं। उनका कहना है कि जांच के दौरान यदि दस्तावेजों की सत्यता प्रमाणित होती है तो पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
क्यों बनाई गई थी SIT?
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस टीम का नेतृत्व लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल करना और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करना है।
पहले भी सौंप चुकी है प्रारंभिक रिपोर्ट
इस मामले में SIT पहले ही अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप चुकी है। हालांकि रिपोर्ट का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से आगे भी पूछताछ की जा सकती है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
राम मंदिर से जुड़े इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म है। एक ओर आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी लगातार पारदर्शी जांच की मांग कर रही हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी SIT की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुंच चुका है। एक याचिका में अदालत से जांच की निगरानी और स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को बाद की तारीख पर सूचीबद्ध करने को कहा है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अब SIT द्वारा संजय सिंह से प्राप्त दस्तावेजों की जांच की जाएगी। यदि जांच के दौरान दस्तावेजों में किसी प्रकार की आपराधिक या वित्तीय अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हुआ है। इसलिए पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकरण के निर्णय के बाद ही सामने आएगा।
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