
PM Modi Indonesia Parliament Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने रिश्तों को नई मजबूती देने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है। बता दें प्रधानमंत्री ने रामायण और महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि यही साझा विरासत दोनों देशों को एक-दूसरे के और करीब लाती है।
जानकारी के लिए बता दें तीन देशों की राजकीय यात्रा के पहले चरण में जकार्ता पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाले 25 साल भारत और इंडोनेशिया दोनों के भविष्य के लिए बेहद अहम होंगे। जिसमें उन्होंने दोनों देशों से मिलकर मानवता के हित में काम करने का आह्वान किया।
रामायण और महाभारत से जुड़ा है दोनों देशों का रिश्ता
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और इंडोनेशिया का रिश्ता हजारों साल पुरानी सभ्यताओं पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों को रामायण और महाभारत जैसी महान सांस्कृतिक विरासत जोड़ती है। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी दोनों देशों की संस्कृति, परंपरा और समाज में इसकी झलक साफ दिखाई देती है। यही साझा विरासत भारत और इंडोनेशिया की दोस्ती को और मजबूत बनाती है।
अगले 25 साल दोनों देशों के लिए होंगे निर्णायक
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी की पहली तिमाही पूरी हो चुकी है और अब आने वाले 25 सालों तक भारत और इंडोनेशिया दोनों के विकास की दिशा तय करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक विकास और वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। भारत चाहता है कि दोनों देशों की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित न रहे, बल्कि विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचे।
राष्ट्रपति प्रबोवो की ‘कॉपीराइट’ टिप्पणी पर दिया जवाब
संसद में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने ‘कॉपीराइट’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस पर प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि प्रेम, सम्मान और दोस्ती पर किसी का कोई कॉपीराइट नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ उनकी व्यक्तिगत मित्रता किसी भी कॉपीराइट की सीमा से कहीं ऊपर है। प्रधानमंत्री के इस बयान पर संसद में मौजूद सदस्यों ने तालियों से उनका स्वागत किया।
विस्तारवाद नहीं, विकासवाद में विश्वास रखता है भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत कभी विस्तारवाद की नीति पर नहीं चलता। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा विकासवाद, सहयोग और शांति की राह पर चलता है। भारत का मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास’ है और यही सोच दुनिया के साथ भी साझा की जाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत किसी पर अपना प्रभाव थोपने में विश्वास नहीं रखता, बल्कि सभी देशों के साथ समान सम्मान और साझेदारी के आधार पर आगे बढ़ना चाहता है।
समुद्र नहीं, दोनों देशों के बीच मजबूत पुल
भारत और इंडोनेशिया के भौगोलिक संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों की राजधानियां भले हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन समुद्री सीमा के लिहाज से दोनों के बीच केवल करीब 150 किलोमीटर की दूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों के लिए समुद्र दूरी का प्रतीक हो सकता है, लेकिन भारत और इंडोनेशिया के लिए यही समुद्र एक मजबूत सेतु का काम करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंद महासागर और आसपास के समुद्री क्षेत्र दोनों देशों को आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से जोड़ते हैं। भविष्य में समुद्री सहयोग दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करेगा।
लोकतंत्र और साझा मूल्यों पर दिया जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि के रूप में इंडोनेशिया पहुंचे हैं। उन्होंने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्य उन्हें और करीब लाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया वैश्विक चुनौतियों का समाधान मिलकर निकाल सकते हैं। जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर दोनों देशों का सहयोग पूरी दुनिया के लिए लाभकारी होगा।
रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती
प्रधानमंत्री के इस दौरे को भारत और इंडोनेशिया के संबंधों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक और कनेक्टिविटी को लेकर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत और इंडोनेशिया की साझेदारी रणनीतिक रूप से और अधिक मजबूत होगी। दोनों देश मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समर्थन में लगातार साथ काम कर रहे हैं।
भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिला नया संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का संसद में दिया गया संबोधन केवल औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि दोनों देशों की सदियों पुरानी मित्रता को भविष्य की नई दिशा देने का संदेश भी था। रामायण और महाभारत जैसी साझा सांस्कृतिक विरासत से लेकर विकास, लोकतंत्र और समुद्री सहयोग तक, प्रधानमंत्री ने हर मुद्दे पर दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
ऐसे में अब आने वाले सालों में भारत और इंडोनेशिया के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
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