
G7 Summit France 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16-17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) में हिस्सा लेने जा रहे हैं। आप को बता दें की भारत के विदेश मंत्रालय ने इसकी ऑफिशियल पुष्टि कर दी है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हो सकती है।
मिली जानकारी के अनुसार, भारत सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक ऐसी किसी संभावित मुलाकात की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रमों को देखते हुए इसकी संभावना से इनकार भी नहीं किया जा रहा है। यदि यह मुलाकात होती है तो फरवरी 2025 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली आमने-सामने की बैठक होगी।
G7 समिट में क्या रहेगा भारत का फोकस?
बता दें फ्रांस की मेजबानी में होने वाले इस साल के जी7 शिखर सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता एक मंच पर जुटेंगे। भारत जी7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती भूमिका को देखते हुए उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया गया है।
सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ भी महत्वपूर्ण चर्चाएं होने की संभावना है।
इस वर्ष जी7 सम्मेलन के मुख्य मुद्दों में शामिल हैं:
- वैश्विक एकजुटता और सहयोग
- समावेशी आर्थिक विकास
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिम्मेदार उपयोग
- जलवायु परिवर्तन
- वैश्विक व्यापार और निवेश
- ऊर्जा सुरक्षा
क्या मोदी और ट्रंप की होगी आमने-सामने बातचीत?
जी7 सम्मेलन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर हो रही है। जिसमें कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने पुष्टि की थी कि वह भी जी7 सम्मेलन में भाग लेने फ्रांस जाएंगे। इसके बाद से दोनों नेताओं के बीच संभावित बैठक की अटकलें तेज हो गई हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि दोनों नेता मिलते हैं तो यह केवल औपचारिक मुलाकात नहीं होगी, बल्कि कई महत्वपूर्ण वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा का अवसर बनेगी। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग, व्यापार, इंडो-पैसिफिक रणनीति, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा जैसे विषय बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों में आए कई उतार-चढ़ाव
दरअसल पिछले डेढ़ साल के दौरान भारत और अमेरिका के संबंधों में कई महत्वपूर्ण घटनाएं देखने को मिली हैं। जिसमें दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए हैं। इसके बावजूद दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाए रखने पर लगातार जोर दिया है। यही कारण है कि वैश्विक मंचों पर दोनों देशों के बीच संवाद जारी है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच मजबूत संबंध वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में जी7 सम्मेलन के दौरान होने वाली किसी भी मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
रिश्तों में सुधार के संकेत
बता दें की हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के संबंधों में सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। जिसमें दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच लगातार संवाद जारी है।
ऐसे में सूत्रों का कहना है की पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप कई बार टेलीफोन पर बातचीत कर चुके हैं। इससे दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है। रिश्तों में सुधार का एक बड़ा संकेत उस समय देखने को मिला जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत का दौरा किया। अपनी भारत यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच चल रहे विभिन्न सहयोग कार्यक्रमों की समीक्षा की। बैठक में रक्षा, उन्नत तकनीक, व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
बड़े व्यापार समझौते की तैयारी
भारत और अमेरिका इस समय एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। हाल ही में अमेरिका का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत आया था। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई।
रिपोर्ट्स के अनुसार व्यापार समझौते पर अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और केवल कुछ तकनीकी पहलुओं पर चर्चा जारी है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। इससे निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जी7 सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की संभावित मुलाकात में इस व्यापार समझौते पर भी चर्चा हो सकती है।
वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
जी7 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की लगातार मौजूदगी उसकी बढ़ती वैश्विक ताकत को दर्शाती है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत आज वैश्विक नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर भारत की राय को गंभीरता से सुना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान भारत कई वैश्विक मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा और विभिन्न देशों के साथ सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में काम करेगा।
दुनिया की नजरें एवियन समिट पर
फ्रांस के एवियन में होने वाला जी7 सम्मेलन इस बार कई कारणों से खास माना जा रहा है। रूस-यूक्रेन संकट, वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, एआई का बढ़ता प्रभाव और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियां सम्मेलन के एजेंडे में प्रमुख रहेंगी।
ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित मुलाकात को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस सम्मेलन पर टिकी हुई हैं। अब अगर दोनों नेताओं की मुलाकात होती है तो यह भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।
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