
Petrol Price Today: दुनियाभर की नजर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हुई है. मध्य पूर्व में जारी हालात और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम का असर अब सीधे कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump चीन दौरे पर पहुंचे हैं, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से होने वाली है. इस बैठक को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.
तेल बाजार में बनी अनिश्चितता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में बड़ी तेजी देखी जा सकती है. वहीं अगर बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो कीमतों में राहत मिल सकती है.
70 डॉलर से 125 डॉलर तक पहुंचा तेल
रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को इजरायल हमले से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी. लेकिन बाद में अमेरिका और ईरान के बीच हालात बिगड़ने लगे और तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं. हालांकि फिलहाल बाजार में कुछ स्थिरता देखने को मिल रही है.
आज क्या है कच्चे तेल का भाव?
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग सपाट रहीं. ब्रेंट क्रूड मामूली तेजी के साथ 105.64 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया. वहीं WTI क्रूड करीब 101.10 डॉलर प्रति बैरल पर रहा.
भारत में नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं. सरकारी तेल कंपनियों ने आम लोगों को राहत देते हुए कीमतों में किसी तरह की बड़ी बढ़ोतरी नहीं की है. कई शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम में हल्की कमी भी देखने को मिली है.
नोएडा और गुरुग्राम में राहत
दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई. Noida और Gurugram जैसे शहरों में लोगों को थोड़ी राहत मिली है. हालांकि अलग-अलग राज्यों में टैक्स के कारण कीमतों में अंतर बना हुआ है.
तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव
जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतें स्थिर रखने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है. बताया जा रहा है कि कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये तक की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है.
शिपिंग कॉस्ट ने बढ़ाई चिंता
कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ शिपिंग कॉस्ट में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. इससे भारत का इंपोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार की हलचल का असर यहां भी महसूस होता है.
सरकार ने अफवाहों को बताया गलत
हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया. सरकार ने साफ कहा है कि फिलहाल तेल की कीमत बढ़ाने की कोई योजना नहीं है.
चुनाव के बाद बढ़ोतरी की चर्चा पर विराम
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल 25 से 28 रुपये तक महंगा हो सकता है. हालांकि सरकार ने इन खबरों को फर्जी बताया और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की.
आम जनता पर असर
तेल की कीमतों का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है. अगर पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं तो ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है और इसका असर खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक पर दिखाई देता है. इसी वजह से लोग लगातार तेल कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं.
वैश्विक राजनीति और तेल बाजार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय तेल बाजार पूरी तरह वैश्विक राजनीति से प्रभावित हो रहा है. अमेरिका, ईरान, चीन और मध्य पूर्व की घटनाएं आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय कर सकती हैं. अगर तनाव बढ़ता है तो तेल फिर महंगा हो सकता है.
भारत के लिए चुनौती
भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए लगातार महंगा तेल बड़ी चुनौती बन सकता है. सरकार फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है ताकि आम जनता पर ज्यादा बोझ न पड़े. लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने पर आगे कठिन फैसले लेने पड़ सकते हैं.
आगे क्या होगा?
अब पूरी दुनिया की नजर ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी हुई है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस बातचीत का असर वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है. फिलहाल आम लोगों के लिए राहत की बात यही है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी नियंत्रण में बनी हुई हैं.
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