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Sugar Export: ईरान युद्ध के बीच भारत का बड़ा फैसला, मोदी सरकार ने चीनी निर्यात पर लगाई रोक
Current image: Sugar Export

Sugar Export: India सरकार ने चीनी के निर्यात पर बड़ा फैसला लेते हुए फिलहाल रोक लगा दी है. सरकार ने एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा है कि 30 सितंबर तक या अगले आदेश आने तक देश से चीनी का निर्यात नहीं किया जाएगा. इस फैसले के बाद देश और विदेश दोनों बाजारों में हलचल तेज हो गई है.

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

सरकार का कहना है कि देश में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए यह कदम उठाया गया है. इसके अलावा अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस साल बारिश सामान्य से कम हुई तो गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है.

ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव का असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध की स्थिति ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन पर असर की आशंका के बीच भारत सरकार अब घरेलू बाजार को सुरक्षित रखना चाहती है. इसी वजह से जरूरी वस्तुओं के निर्यात को लेकर सरकार सतर्क नजर आ रही है.

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक

भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश माना जाता है. Brazil के बाद भारत का वैश्विक शुगर मार्केट में बड़ा योगदान है. भारत के फैसले का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई देने लगा है.

वैश्विक बाजार में बढ़ीं कीमतें

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत द्वारा Sugar Export रोकने के फैसले के बाद न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स में 2 फीसदी से ज्यादा तेजी देखी गई. वहीं लंदन वाइट शुगर फ्यूचर्स भी करीब 3 फीसदी तक उछल गया. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में चीनी की वैश्विक कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है.

पहले दी गई थी एक्सपोर्ट की अनुमति

सरकार ने इससे पहले चीनी मिलों को करीब 1.59 मिलियन टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी थी. तब अनुमान था कि देश में उत्पादन घरेलू मांग से ज्यादा रहेगा. लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं.

लगातार दूसरे साल उत्पादन घटने की आशंका

चीनी उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस बार गन्ना उत्पादन प्रभावित हो सकता है. अगर उत्पादन घटता है तो घरेलू बाजार में चीनी महंगी हो सकती है. इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने समय रहते यह फैसला लिया है.

ट्रेडर्स की बढ़ी चिंता

मुंबई के कई ग्लोबल ट्रेड हाउस से जुड़े डीलर्स का कहना है कि सरकार के फैसले से ट्रेडर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.कई व्यापारियों ने पहले ही एक्सपोर्ट के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लिए थे. अब उन ऑर्डर्स को पूरा करना चुनौती बन सकता है.

कितना चीनी निर्यात हो चुका?

जानकारी के अनुसार करीब 8 लाख टन चीनी के निर्यात के लिए कॉन्ट्रैक्ट किए गए थे. इनमें से 6 लाख टन से ज्यादा चीनी पहले ही विदेश भेजी जा चुकी है. हालांकि सरकार ने कुछ शर्तों के साथ राहत भी दी है.

किन शिपमेंट्स को मिलेगी अनुमति?

सरकार ने कहा है कि जिन शिपमेंट्स की लोडिंग नोटिफिकेशन जारी होने से पहले हो चुकी है, उन्हें निर्यात की अनुमति दी जाएगी. इसके अलावा जिन मामलों में शिपिंग बिल पहले ही फाइल हो चुका है और जहाज भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुका है, वहां भी एक्सपोर्ट की मंजूरी दी जाएगी.

घरेलू बाजार को राहत देने की कोशिश

सरकार का मानना है कि एक्सपोर्ट रोकने से देश में चीनी की उपलब्धता बनी रहेगी. इससे कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. त्योहारों के सीजन को देखते हुए भी सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती.

किसानों पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लंबे समय तक निर्यात बंद रहा तो इसका असर चीनी मिलों और किसानों पर भी पड़ सकता है. हालांकि सरकार फिलहाल घरेलू बाजार को प्राथमिकता देती नजर आ रही है. सरकार की कोशिश है कि आम लोगों पर महंगाई का बोझ कम पड़े.

ब्राजील और थाईलैंड को फायदा

भारत के निर्यात रोकने से अब Thailand और ब्राजील जैसे देशों को फायदा मिल सकता है. एशिया और अफ्रीका के खरीदार अब इन देशों की तरफ रुख कर सकते हैं. इससे वैश्विक व्यापार का संतुलन भी बदल सकता है.

चीनी उद्योग पर नजर बनाए हुए सरकार

सरकार लगातार चीनी उत्पादन, मानसून और घरेलू खपत पर नजर बनाए हुए है. अगर आने वाले महीनों में हालात बेहतर होते हैं तो निर्यात नीति में बदलाव भी संभव है. फिलहाल सरकार का फोकस घरेलू जरूरतों को पूरा करना और कीमतों को नियंत्रित रखना है.

आम लोगों के लिए क्या मतलब?

अगर चीनी का उत्पादन कम होता है और मांग बढ़ती है तो कीमतों में तेजी आ सकती है. सरकार का यह फैसला इसी संभावित महंगाई को रोकने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. अब सभी की नजर मानसून और आने वाले कृषि सीजन पर टिकी हुई है.

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Author

  • Sakshi Raj

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