
प्याज का ताजा भाव: महाराष्ट्र के प्याज किसानों पर इस समय बड़ा आर्थिक संकट मंडरा रहा है। बता दें कि बाजार में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। जिसके वजह से हालत इतने खराब हो चुके हैं कि कई किसानों को अपनी उपज का दाम लागत से भी कम मिल रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन बाजार में प्याज के दाम तेजी से गिरते जा रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है।
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने राज्य और केंद्र सरकार से किसानों को राहत देने की मांग की है। संघ ने प्रति क्विंटल 1500 रुपये की सब्सिडी देने, प्याज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने और निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाने की मांग उठाई है।
बढ़ती लागत ने बढ़ाई किसानों की परेशानी
जानकारी के लिए बता दें कि पिछले कुछ सालों में खेती से जुड़ी लगभग हर चीज महंगी हो गई है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली, मजदूरी और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा भंडारण और परिवहन खर्च भी किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। जिसमें किसानों का कहना है कि एक तरफ खेती की लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में प्याज के दाम लगातार गिर रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई किसान कर्ज में डूब चुके हैं और आर्थिक दबाव के कारण मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
41 बोरे प्याज बेचकर मिले सिर्फ 519 रुपये
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के संस्थापक अध्यक्ष भरत दिघोले ने किसानों की बदहाल स्थिति का उदाहरण देते हुए बताया कि बीड जिले के नेकनूर गांव का एक किसान 41 बोरे प्याज लेकर सोलापुर मंडी पहुंचा था। लेकिन बाजार में केवल 20 बोरे प्याज ही बिक सके। जब मजदूरी, परिवहन, कमीशन, बाजार शुल्क और अन्य खर्च काटे गए, तब किसान के हाथ में मात्र 519 रुपये बचे। यह घटना किसानों की वास्तविक स्थिति को दिखाती है। किसान का कहना था कि इतने कम पैसे में खेती की लागत निकालना तो दूर, परिवार का खर्च चलाना भी संभव नहीं है।
50 पैसे किलो प्याज बेचने को मजबूर किसान
नासिक जिले की सटाना कृषि उपज बाजार समिति में भी एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां एक किसान को उसकी प्याज की फसल के लिए केवल 50 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला। यानी किसान को 1 किलो प्याज के बदले सिर्फ 50 पैसे मिले। ऐसे में इतनी कम कीमत मिलने के बाद किसान मानसिक रूप से टूट गया और उसने बाजार परिसर में ही आत्महत्या करने की कोशिश की। इस घटना के बाद किसानों में भारी नाराजगी फैल गई। किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो खेती करना पूरी तरह घाटे का सौदा बन जाएगा।
कई जिलों में किसानों का विरोध प्रदर्शन
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में किसान लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छत्रपति संभाजीनगर जिले की वैजापुर कृषि उपज बाजार समिति में किसानों ने प्याज की नीलामी रोक दी और धरना प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि व्यापारियों और बाजार समितियों की मनमानी के कारण उन्हें उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने कहा कि लगातार नुकसान के कारण अब खेती जारी रखना मुश्किल हो गया है। जिसमें कई किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द राहत नहीं दी तो राज्यभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
प्याज उत्पादक संघ ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। किसानों का कहना है कि अगर सरकार जल्द कदम नहीं उठाती तो हजारों किसान आर्थिक बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
- प्रति क्विंटल 1500 रुपये की सब्सिडी दी जाए।
- प्याज के लिए MSP लागू किया जाए।
- प्याज निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाई जाएं।
- बाजार समितियों में लगने वाले भारी कमीशन को नियंत्रित किया जाए।
- किसानों को सीधे बाजार में उपज बेचने की सुविधा मिले।
- भंडारण और परिवहन के लिए सरकारी सहायता दी जाए।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष Bharat Dighole ने मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से किसानों की समस्या में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि लगातार गिरते प्याज के दाम और बढ़ती खेती लागत के कारण किसान भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। संघ ने राज्य सरकार से किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज, सब्सिडी और MSP लागू करने की मांग की है, ताकि किसानों को बड़ी राहत मिल सके।
निर्यात प्रतिबंध से भी बढ़ी समस्या
किसानों का कहना है कि प्याज निर्यात पर लगी पाबंदियों ने भी बाजार पर बुरा असर डाला है। निर्यात बंद होने से घरेलू बाजार में प्याज की अधिक आवक हो गई, जिसके कारण कीमतें तेजी से गिर गईं।
ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि सरकार निर्यात नीति में बदलाव करती है तो किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है। किसानों ने मांग की है कि सरकार जल्द निर्यात नीति में राहत दे।
क्यों गिर रहे हैं प्याज के दाम?
एक्सपर्ट्स के अनुसार इस बार महाराष्ट्र में प्याज का उत्पादन काफी अधिक हुआ है। उत्पादन बढ़ने से बाजार में सप्लाई ज्यादा हो गई है। दूसरी ओर मांग सामान्य रहने के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई है। इसके अलावा भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण किसान मजबूरी में कम दाम पर प्याज बेच रहे हैं। यदि किसानों को बेहतर स्टोरेज सुविधा मिले तो वे उचित समय पर अपनी फसल बेच सकते हैं।
किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी
प्याज उत्पादक संगठनों ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत पैकेज और MSP जैसी मांगों पर फैसला नहीं लिया गया तो राज्यभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से नुकसान झेल रहे हैं और अब उनके पास संघर्ष के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
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