
Nishant Kumar: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार ने आखिरकार मंत्री पद की शपथ लेकर सक्रिय राजनीति में ऑफिशियल एंट्री कर ली है। बिहार सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि आखिर नीतीश कुमार के बाद उनकी राजनीतिक विरासत कौन संभालेगा। अब मंत्री पद की शपथ के साथ इस सवाल का जवाब भी लगभग साफ होता नजर आ रहा है। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि निशांत कुमार को कौन-सा मंत्रालय मिलेगा, लेकिन उनकी एंट्री को बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
राजनीति से दूरी बनाकर रखते थे निशांत कुमार
करीब 50 साल के निशांत कुमार अब तक राजनीति से दूर ही रहे। वे बहुत कम सार्वजनिक मंचों पर दिखाई देते थे। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पहली बार खुलकर राजनीतिक बयान दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि जनता एक बार फिर उनके पिता नीतीश कुमार को मौका देगी क्योंकि उन्होंने बिहार के लिए काफी काम किया है। बता दें कि निशांत कुमार का स्वभाव हमेशा शांत और सादा माना जाता रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उनमें पारंपरिक नेताओं जैसी आक्रामक राजनीतिक शैली नहीं दिखती। कई मौकों पर उन्होंने खुद भी कहा था कि उनकी रुचि आध्यात्मिक जीवन में अधिक है। लेकिन अब पिता नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से पीछे हटने के बाद उन्होंने जिम्मेदारी संभाल ली है।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बढ़ी चर्चा
जानकारी के लिए बता दें कि पिछले महीने नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वे राज्यसभा सांसद बने। उनकी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। ऐसे में माना जा रहा था कि जल्द ही परिवार से कोई नया चेहरा राजनीति में आएगा। अब निशांत कुमार के मंत्री बनने से इन अटकलों पर विराम लग गया है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिहार की सत्ता और जनता के बीच नीतीश कुमार की जो छवि बनी हुई है, उसका सीधा फायदा निशांत कुमार को मिल सकता है। हालांकि उनके सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती भी होगी।
बख्तियारपुर से जुड़ा है परिवार
नीतीश कुमार का परिवार खास तौर से बिहार के बख्तियारपुर का रहने वाला है। आज भी परिवार के कई सदस्य वहीं रहते हैं। निशांत कुमार का जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था। बचपन से ही वे पढ़ाई में अच्छे माने जाते थे और हमेशा मीडिया की चकाचौंध से दूर रहे। जिसमें उनकी शुरुआती पढ़ाई पटना के प्रतिष्ठित St. Karen’s School से हुई। इसके बाद उन्होंने मसूरी के Manava Bharati India International School में शिक्षा हासिल की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने BIT Mesra में दाखिला लिया और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया।दिलचस्प बात यह है कि नीतीश कुमार भी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से आते हैं। यानी पिता और पुत्र दोनों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी रही है।
सादगी भरी जिंदगी जीते हैं निशांत कुमार
निशांत कुमार हमेशा बेहद सादगी से जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर साधारण कपड़ों में नजर आते हैं और मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं। बिहार की राजनीति में कई बड़े नेताओं के परिवार जहां आलीशान जीवनशैली के लिए चर्चा में रहते हैं, वहीं निशांत कुमार की छवि इससे बिल्कुल अलग रही है।उनके करीबी लोगों का कहना है कि उन्हें आध्यात्मिक और शांत वातावरण पसंद है। यही वजह है कि वे लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाकर रहे। हालांकि अब मंत्री बनने के बाद उनकी सार्वजनिक सक्रियता बढ़ने वाली है।
कितनी संपत्ति के मालिक हैं निशांत कुमार?
मंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब लोगों की दिलचस्पी उनकी संपत्ति को लेकर भी बढ़ गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक निशांत कुमार की कुल अनुमानित संपत्ति करीब 3.5 करोड़ रुपये बताई जाती है। इसमें करीब 1.63 करोड़ रुपये की चल संपत्ति शामिल है, जबकि लगभग 1.98 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। बताया जाता है कि उनकी ज्यादातर संपत्ति उन्हें उनकी मां मंजू सिन्हा से विरासत में मिली है। मंजू सिन्हा सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं। उनका निधन मई 2007 में हो गया था। परिवार की संपत्ति का बड़ा हिस्सा उसी विरासत से जुड़ा हुआ माना जाता है।
कहां-कहां है जमीन और संपत्ति?
निशांत कुमार के पास बिहार के नालंदा जिले के कल्याण बीघा गांव में कृषि भूमि मौजूद है। यह जमीन पैतृक और विरासत में मिली संपत्ति का हिस्सा मानी जाती है। इसके अलावा कल्याण बीघा में गैर-कृषि जमीन भी उनके नाम बताई जाती है। बख्तियारपुर के हकीकतपुर इलाके में परिवार का पैतृक मकान और जमीन भी मौजूद है। राजधानी पटना के कंकड़बाग इलाके में भी एक प्लॉट होने की चर्चा है। हालांकि इसको लेकर आधिकारिक जानकारी सीमित है।
अब सबकी नजर मंत्रालय पर
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री तो हो चुकी है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन्हें कौन-सा मंत्रालय मिलेगा। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर उन्हें कोई बड़ा विभाग मिलता है तो यह साफ संकेत होगा कि उन्हें भविष्य के बड़े नेता के तौर पर तैयार किया जा रहा है। वहीं विपक्ष पहले से ही इस मुद्दे को परिवारवाद से जोड़कर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। हालांकि समर्थकों का कहना है कि निशांत कुमार की शिक्षा, सादगी और साफ छवि उन्हें अलग पहचान दिला सकती है। अब आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीति में अब तक शांत और सीमित दायरे में रहने वाले निशांत कुमार बिहार की जनता और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को किस तरह संभालते हैं।
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