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New Voters Registration: ईसीआई  पर फिर उठे सवाल, नए युवा वोटर्स के रजिस्ट्रेशन को लेकर कांग्रेस ने घेरा
New Voters Registration: ईसीआई  पर फिर उठे सवाल
New Voters Registration: ईसीआई  पर फिर उठे सवाल

New Voters Registration: नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन और वोटर लिस्ट अपडेट करने की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2024 के बाद 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर प्रक्रिया में बदलाव आया है।

वहीं, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि युवाओं के वोटर रजिस्ट्रेशन में देरी का असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है।

2024 के बाद वोटर लिस्ट अपडेट को लेकर क्या दावा?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग की ओर से 2024 के बाद युवाओं के नए वोटर रजिस्ट्रेशन और मतदाता सूची के नियमित अपडेट की प्रक्रिया पहले जैसी नहीं रही। सामान्य तौर पर 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए साल में चार बार पात्रता की तारीख निर्धारित की जाती है।

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को आधार बनाया जाता है। यानी जिस युवा की उम्र इन तारीखों के आधार पर 18 साल पूरी हो जाती है, वह मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2024 के बाद राज्यों में होने वाली नियमित प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिला। इसे लेकर चुनाव आयोग की भूमिका और वोटर लिस्ट अपडेट करने की प्रक्रिया पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं।

SIR को लेकर भी उठे सवाल

मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चुनाव आयोग समय-समय पर Special Intensive Revision (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करना, पात्र नए मतदाताओं को शामिल करना और गलत या अपात्र नामों को हटाना होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के बाद राज्यों में होने वाली नियमित SIR प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। 2025 में बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया बाद में दूसरे राज्यों तक पहुंची। इसी वजह से विपक्ष का कहना है कि पहले जिन राज्यों में नियमित तौर पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाता था, वहां प्रक्रिया के स्वरूप में बदलाव हुआ है। इस पूरे मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि आने वाले चुनावों से पहले नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने की प्रक्रिया किस तरह पूरी होगी।

Gen-Z वोटर्स क्यों हैं अहम?

18 से 27 वर्ष के बीच के युवा मतदाता आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 2029 के लोकसभा चुनाव तक बड़ी संख्या में ऐसे युवा मतदाता होंगे, जो पहली बार या हाल के वर्षों में मतदान के योग्य हुए हैं।

युवा मतदाताओं के बीच रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, महंगाई, डिजिटल सुविधाएं और सरकारी योजनाएं जैसे मुद्दे चर्चा में रहते हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए युवा वोटर्स तक पहुंच बनाना चुनावी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। हाल के वर्षों में अलग-अलग मुद्दों को लेकर युवाओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं। इससे युवा वर्ग की राजनीतिक भागीदारी और उनकी चुनावी भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ी है।

कांग्रेस ने केंद्र और चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में देरी लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रभावित कर सकती है।

कांग्रेस ने दावा किया कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की मौजूदा प्रक्रिया से बड़ी संख्या में युवा मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस का कहना है कि सरकार युवाओं के राजनीतिक रुझान को लेकर चिंतित है और इसी वजह से वोटर लिस्ट अपडेट की प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। हालांकि, ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं। इनके आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नए युवाओं को जानबूझकर वोट देने से रोकने की कोई साजिश हुई है।

उत्तर प्रदेश और गोवा का भी जिक्र

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश और गोवा का उदाहरण देते हुए कहा है कि इन राज्यों में अगले साल चुनाव होने हैं। पार्टी का दावा है कि इन राज्यों में मतदाता सूची के नियमित अपडेट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और इसका असर नए युवा मतदाताओं पर पड़ सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले 18 साल की उम्र पूरी करने वाले सभी पात्र युवाओं के नाम मतदाता सूची में किस प्रक्रिया के तहत जोड़े जाएंगे।

क्या नए वोटर्स वोट नहीं दे पाएंगे?

किसी भी चुनाव में मतदान करने के लिए मतदाता का नाम संबंधित मतदाता सूची में होना जरूरी है। इसलिए 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं को समय पर रजिस्ट्रेशन कराना महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल SIR न होने या प्रक्रिया में बदलाव होने से यह कहना सही नहीं होगा कि सभी नए युवा मतदाता मतदान नहीं कर पाएंगे। पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। अंतिम स्थिति चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रक्रिया और संबंधित मतदाता सूची पर निर्भर करेगी।

नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने एक बार फिर चुनाव आयोग की मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब चुनाव से पहले यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए पात्र मतदाताओं के नाम किस तरह और किस समय सीमा में मतदाता सूची में शामिल किए जाते हैं।

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Author

  • Aparna Panwar

    अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।

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