
Nepal Flood 2026: जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। मुश्किल की इस घड़ी में भारत एक बार फिर नेपाल के साथ मजबूती के साथ खड़ा है। दरअसल, आपदा के कुछ ही घंटों के दौरान भारत ने राहत सामग्री नेपाल भेजकर अपनी ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (First Responder) की भूमिका को मजबूत किया है।
बता दें कि भारत की ओर से राहत पहुंचाने की शुरुआत महज कुछ घंटों बाद शुरु कर दी गई थी। बताया जा रहा है कि बुधवार रात करीब 8:35 बजे भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) का C-130J विमान 10 टन मानवीय और आपदा राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हुआ। भारत के द्वारा भेजी गई राहत की पहली खेप उसी रात काठमांडू (Kathmandu) पहुंच गई। इस सामग्री में दवाइयों के साथ अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट और सोलर लैंप (Solar lamp) जैसी जरूरी चीजें शामिल थीं।
पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से की खास बात
नेपाल में हालात बिगड़ने के बाद प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की। पीएम मोदी ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताई और नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया। ऐसे में भारत इस मुश्किल समय में नेपाल के लोगों के साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने यह भी बताया कि भारतीय टीमें राहत और बचाव अभियान में नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। भारत की ओर से राजनीतिक स्तर पर बातचीत के साथ ही जमीन पर राहत पहुंचाने की प्रक्रिया भी तेजी से शुरू कर दी गई।
2 दिनों में नेपाल पहुंची 62 टन राहत सामग्री
भारत ने राहत अभियान के तहत पहली खेप के बाद अपने इस मिशन को और तेज किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी जानकारी दी कि भारत-नेपाल के लोगों की मदद के लिए मानवीय सहायता भेज रहा है। इसके बाद गुरुवार को भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के जरिए राहत सामग्री की दूसरी खेप नेपाल भेजी गई।
दूसरी खेप में दवाइयों और खाद्य सामग्री (Food Item) समेत कई जरूरी सामान शामिल थे। दो विमानों के जरिए कुल 47.5 टन राहत सामग्री पहुंचाए जाने के बाद शुक्रवार तक भारत की ओर से नेपाल भेजी गई राहत सामग्री की कुल मात्रा 62 टन हो गई।
भारत की इस तेजी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) के बाद शुरुआती कुछ घंटे राहत और बचाव के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में भोजन, दवाइयां, अस्थायी आश्रय और दूसरी जरूरी चीजें जल्द से जल्द प्रभावित लोगों तक पहुंचाना जरूरी होता है।
नेपाल की त्रासदी में बड़े पैमाने पर नुकसान
वहीं, नेपाल में आई इस आपदा ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के पानी और मलबे ने सड़कों, पुलों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया है। पहाड़ी इलाकों में राहत और बचाव अभियान को खराब रास्तों और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में मृतकों की संख्या 500 से अधिक हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
आपदा के समय भारत ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’?
नेपाल में तेजी से राहत पहुंचाना भारत की मानवीय (India’s Humanitarian) सहायता नीति का एक और उदाहरण है। भारत पहले भी कई देशों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेजी से राहत और बचाव सहायता पहुंचाता रहा है। भूकंप, बाढ़, चक्रवात और दूसरी बड़ी आपदाओं के समय भारत ने अपने संसाधनों और विशेषज्ञ टीमों के जरिए प्रभावित देशों की मदद की है।
कोरोना महामारी के दौरान भारत ने कई देशों को वैक्सीन और जरूरी चिकित्सा सामग्री (Medical Supplies) उपलब्ध कराई थी। इसके अलावा 2023 में तुर्किये और सीरिया के भूकंप के बाद भारत ने राहत और बचाव अभियान चलाया। इसके बाद भी अलग-अलग देशों में आई प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disasters) के दौरान भारत की ओर से सहायता भेजी जाती रही है।
नेपाल के साथ भारत के संबंधों को देखते हुए इस मदद का महत्व और बढ़ जाता है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते रहे हैं। ऐसे में पड़ोसी देश पर आई बड़ी आपदा के समय भारत का तेजी से आगे आना इन संबंधों को भी दर्शाता है।
संकट की घड़ी में नेपाल के साथ भारत
नेपाल की इस भीषण त्रासदी (Horrific Tragedy) ने एक बार फिर दिखाया है कि प्राकृतिक आपदा किसी एक देश की समस्या नहीं होती। ऐसे समय में पड़ोसी और मित्र देशों की मदद प्रभावित लोगों के लिए बड़ी राहत बन सकती है। भारत ने नेपाल में आपदा के तुरंत बाद राहत सामग्री भेजकर यह संदेश दिया है कि संकट की घड़ी में वह अपने पड़ोसी के साथ खड़ा है।
पहली राहत खेप (First Relief Consignment) से लेकर दो दिनों में 62 टन सामग्री पहुंचाने तक भारत का अभियान लगातार जारी रहा। आने वाले दिनों में भी नेपाल में राहत और बचाव कार्य की जरूरत बनी रहने की संभावना है। ऐसे में भारत की ओर से आगे भी मानवीय सहायता जारी रहने की उम्मीद है।
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अपर्णा पवांर, एक हिंदी कंटेंट राइटर है, जिन्होंने डिजिटल मीडिया में अपनी लेखनी से पहचान बनाई। आज वे “Khaber Aaj Ki” में हिंदी कंटेंट राइटर के पद पर काम करते हुए पत्रकारिता को अपना जुनून मानती हैं। उनके विचारों में खबरें केवल सूचनाएं नहीं, बल्कि लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का माध्यम हैं।






