
NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट(NEET) एक बार फिर से विवादों में है। लेकिन इस बार सवाल केवल पेपर लीक का नहीं है, बल्कि उस लापरवाही का है जिसने पूरे सिस्टम को कमजोर बनाए रखा है। बता दें की 2024 में पेपर लीक के बाद सरकार ने पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। जिसमें इस कमेटी का मकसद था NTA की परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना।
जानकारी के अनुसार, कमेटी ने चार महीने तक जांच-पड़ताल कर नवंबर 2024 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। इसमें परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव सुझाए गए थे। लेकिन दो साल तक यह रिपोर्ट फाइलों में दबाकर रखी गई। जिसमें अब 2026 के नए पेपर लीक विवाद के बाद सरकार उन्हीं सिफारिशों को लागू करने की बात कर रही है। यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार की देरी ने ही सिस्टम को दोबारा संकट में धकेला।
राधाकृष्णन कमेटी क्यों बनाई गई थी?
2024 में NEET पेपर लीक ने देशभर में भारी विवाद खड़ा कर दिया था। जिसमें लाखों छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। इसके बाद केंद्र सरकार ने एक हाई-लेवल कमेटी बनाई, जिसकी जिम्मेदारी थी कि NTA की परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद कमजोरियों की पहचान की जाए।
कमेटी ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्र ट्रांसपोर्ट सिस्टम, डिजिटल निगरानी, डेटा सुरक्षा और परीक्षा मोड जैसे मुद्दों पर विस्तृत सुझाव दिए। जिसमें सबसे अहम सिफारिश थी कि NEET परीक्षा को धीरे-धीरे Computer-Based Test यानी CBT मोड में बदला जाए, ताकि पेपर लीक की संभावना कम हो सके। लेकिन यही सबसे बड़ा बदलाव लागू नहीं किया गया। सरकार ने दावा जरूर किया कि कुछ सुधार किए गए हैं, लेकिन जिस कदम से सबसे ज्यादा असर पड़ सकता था, वही दो साल तक अटका रहा।
दो साल तक रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सरकार की ओर से इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि सरकार राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को लागू कर रही है। लेकिन यह नहीं बताया गया कि 2024 में तैयार रिपोर्ट को 2025 और 2026 तक क्यों ठंडे बस्ते में रखा गया। अब अगर यही बदलाव 2025 में लागू हो जाते, तो शायद 2026 का नया पेपर लीक विवाद टाला जा सकता था। इस देरी का असर उन लाखों छात्रों पर पड़ा जिन्होंने हर साल NEET परीक्षा दी।
संसदीय समिति ने भी दी थी चेतावनी
मार्च 2025 में दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने भी सरकार और NTA को राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें याद दिलाई थीं। समिति ने साफ कहा था कि परीक्षा प्रणाली में सुधार तुरंत लागू किए जाएं। लेकिन उस समय कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया। 2025 की परीक्षा बिना बड़े विवाद के पूरी हो गई, तो मान लिया गया कि सब कुछ सामान्य है। यही सबसे बड़ी चूक साबित हुई।
2024 का पेपर लीक कैसे हुआ?
5 मई 2024 को NEET परीक्षा वाले दिन झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल से पेपर लीक होने का मामला सामने आया। आरोप लगा कि एक संगठित गैंग ने परीक्षा शुरू होने से पहले सील तोड़कर प्रश्नपत्र हासिल कर लिया। जांच बाद में CBI को सौंपी गई। शुरुआत में कुछ गिरफ्तारियां हुईं और बाद में आरोपियों की संख्या बढ़ती गई। जांच में सामने आया कि कई राज्यों तक फैला नेटवर्क सक्रिय था और बड़ी रकम लेकर छात्रों को पेपर उपलब्ध कराया गया। लेकिन सबसे बड़ा झटका तब लगा जब इस मामले के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को जमानत मिल गई। वजह यह थी कि CBI तय समय के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। इससे जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हुए।
दो साल बाद भी नतीजा क्यों नहीं निकला?
NEET पेपर लीक मामले में गिरफ्तारियां जरूर हुईं, लेकिन अब तक किसी बड़े आरोपी को सजा नहीं मिली। जांच लगातार चलती रही, लेकिन पूरे नेटवर्क की असली परतें सामने नहीं आ सकीं। CBI ने कई राज्यों में छापेमारी की, बिचौलियों को पकड़ा और छात्रों से पूछताछ की। फिर भी हर बार यह सवाल बना रहा कि क्या इतना बड़ा नेटवर्क बिना अंदरूनी मदद के काम कर सकता है। यही कारण है कि अब शक सिर्फ बाहरी गैंग पर नहीं, बल्कि NTA के भीतर मौजूद लोगों पर भी जा रहा है। विपक्ष और छात्र संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि जांच सिर्फ पेपर बेचने वालों तक सीमित न रहे, बल्कि सिस्टम के अंदर बैठे जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचे।
2025 में भी उठे थे सवाल
2025 की परीक्षा बड़े विवाद के बिना पूरी हो गई थी, लेकिन उस साल भी कई संदिग्ध घटनाएं सामने आई थीं। राजस्थान के एक परिवार का मामला चर्चा में रहा, जिसके कई सदस्यों ने NEET परीक्षा पास की थी और जिनका नाम पहले भी पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ चुका था। उस समय बड़े स्तर पर लीक की पुष्टि नहीं हुई, इसलिए मामला धीरे-धीरे शांत हो गया। लेकिन इससे सरकार और NTA को यह संदेश चला गया कि सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। यही सोच आगे जाकर भारी पड़ी।
अब क्या बदलाव होने जा रहे हैं?
2026 के NEET विवाद के बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक अब NEET परीक्षा CBT यानी Computer-Based Test मोड में कराई जाएगी, ठीक IIT-JEE की तरह। सरकार का दावा है कि इससे पेपर लीक की संभावना कम होगी। साथ ही दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों को अतिरिक्त समय, करेक्शन विंडो और फीस रिफंड जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी।
असली सवाल अब भी बाकी
NEET विवाद सिर्फ परीक्षा लीक का मामला नहीं रह गया है। अब यह देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है। हर साल लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करके परीक्षा देते हैं। लेकिन जब बार-बार पेपर लीक और गड़बड़ियों की खबरें आती हैं, तो छात्रों का भरोसा टूटता है। सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि आखिर NTA के भीतर जवाबदेही तय कब होगी? क्या सिर्फ बाहरी गैंग पकड़ लेने से समस्या खत्म हो जाएगी? या फिर सिस्टम के अंदर मौजूद कमजोर कड़ियों पर भी कार्रवाई होगी। सरकार अब सुधारों की बात कर रही है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों को जवाब चाहिए कि दो साल तक राधाकृष्णन कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्योंकि कई लोगों का मानना है कि यही देरी इस पूरे संकट की सबसे बड़ी वजह बनी।
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